Q. भारत की नेबरहुड पालिसी वैश्विक शक्तियों की गतिशीलता एवं पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता का प्रबंधन करते हुए क्षेत्रीय जुड़ाव से द्विपक्षीय संबंधों में परिवर्तित हो रही है। इस परिवर्तन का भारत के रणनीतिक हितों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और वर्ष 2025 में संतुलित नेबरहुड कनेक्शन के लिए रूपरेखा सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत की नेबरहुड पॉलिसी में क्षेत्रीय संलग्नता से द्विपक्षीय संबंधों में हो रहे परिवर्तन पर प्रकाश डालिए।
  • परीक्षण कीजिए कि भारत पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता के साथ वैश्विक महाशक्तियों की गतिशीलता का प्रबंधन कैसे करता है।
  • विश्लेषण कीजिए कि यह परिवर्तन भारत के रणनीतिक हितों को किस प्रकार प्रभावित करता है।
  • वर्ष 2025 में पड़ोसी देशों के साथ संतुलित जुड़ाव के लिए एक रूपरेखा का सुझाव दीजिये।

उत्तर

भारत की नेबरहुड पॉलिसी सार्क जैसे क्षेत्रीय जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देने की ओर विकसित हो रही है, जो वैश्विक महाशक्तियों की गतिशीलता और चीन व पाकिस्तान के साथ पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित है। यह परिवर्तन, नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को संतुलित करते हुए रणनीतिक हितों की रक्षा करने पर केंद्रित है, जैसा कि नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी में देखा गया है। 

Enroll now for UPSC Online Course

भारत की नेबरहुड पॉलिसी का क्षेत्रीय जुड़ाव से द्विपक्षीय संबंधों की ओर परिवर्तन

  • रणनीतिक स्वायत्तता पर ध्यान: भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने और सार्क जैसे क्षेत्रीय संरचनाओं पर निर्भरता कम करने के लिए द्विपक्षीय संबंधों की ओर बढ़ रहा है, जो राजनीतिक बाधाओं के कारण अप्रभावी रहे हैं। 
    • उदाहरण के लिए: जल-साझाकरण संधियों पर बांग्लादेश के साथ भारत की सक्रिय भागीदारी ने सार्क को दरकिनार कर दिया और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया।
  • अनुकूलित भागीदारी: द्विपक्षीय भागीदारी भारत को देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सामान्यीकृत क्षेत्रीय दृष्टिकोणों के विपरीत अनुकूलित समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाती है। 
    • उदाहरण के लिए: भारतभूटान जलविद्युत सहयोग एक लक्षित द्विपक्षीय सफलता की कहानी है, जो भूटान की अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाती है।
  • क्षेत्रीय गतिरोधों को दरकिनार करना: भारत का द्विपक्षीय ध्यान भारत-पाकिस्तान तनाव जैसी प्रतिद्वंद्विता के कारण होने वाले क्षेत्रीय गतिरोधों को कम करता है जो अक्सर क्षेत्रीय तंत्र को पंगु बना देते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: पाकिस्तान की अवरोधक नीतियों के कारण भारत ने SAARC को शामिल किए बिना भारत-मालदीव रक्षा सहयोग समझौता किया।
  • आर्थिक प्राथमिकता: द्विपक्षीय ढाँचे मजबूत व्यापार समझौतों को सुगम बनाते हैं, जिससे धीमी क्षेत्रीय सहमति-निर्माण की तुलना में तीव्र गति से वार्ता में और कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत और नेपाल के द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार समझौतों ने क्षेत्रीय ऊर्जा-साझाकरण में होने वाली देरी को दरकिनार करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा विनिमय को बढ़ावा दिया।

परंपरागत प्रतिद्वंद्विता के साथ वैश्विक महाशक्ति गतिशीलता का प्रबंधन

  • चीन के साथ संतुलन बनाना: भारत चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के खिलाफ है परंतु BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर, बिना संघर्ष के तनाव को प्रबंधित करने के लिए भागीदारी बनाए रखता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत ने BRI का विरोध किया, परंतु रणनीतिक लाभ बनाए रखने के लिए आतंकवाद विरोधी SCO की पहल में शामिल हो गया।
  • QUAD का लाभ उठाना: QUAD (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के साथ सहयोग करके, भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए वैश्विक महाशक्ति प्रतिस्पर्धा को संतुलित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत ने QUAD सदस्यों के साथ मालाबार नौसैनिक अभ्यास 2023 का आयोजन किया, जिससे चीनी आक्रामकता के खिलाफ समुद्री सुरक्षा मजबूत हुई।
  • रूस-भारत साझेदारी: पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत अमेरिकी अपेक्षाओं को संतुलित करते हुए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए रूस के साथ अपने रक्षा और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखता है।
  • अमेरिका के साथ रणनीतिक जुड़ाव: अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने से भारत की तकनीकी और रक्षा क्षमताएँ बढ़ेंगी, जिससे पश्चिम पर अत्यधिक निर्भरता के बिना चीनी आक्रामकता का मुकाबला किया जा सकेगा। 
    • उदाहरण के लिए: महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर US-INDIA पहल (iCET)AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है।

भारत के रणनीतिक हितों पर इन परिवर्तनों का प्रभाव

  • द्विपक्षीय सहयोग में वृद्धि: द्विपक्षीय संबंधों से भारत को प्रत्येक पड़ोसी की विशिष्ट प्राथमिकताओं के अनुरूप समझौते करने का अवसर मिलता है, जिससे क्षेत्रीय मंचों पर निर्भरता कम होती है। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2023 में मालदीव को भारत द्वारा दिए गए 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज ने प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के माध्यम से संबंधों को मजबूत किया।
  • सामूहिक सौदेबाजी की चुनौतियों में कमी: द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान केंद्रित करके, भारत SAARC जैसे क्षेत्रीय संगठनों के अंदर भिन्न हितों से उत्पन्न वाली बाधाओं को कम करता है, जिससे निर्णय लेने में तेजी आती है।
  • बाह्य प्रभावों का मुकाबला करना: द्विपक्षीयता, बहुपक्षीय मंचों पर बाह्य शक्तियों के प्रभाव को कम करती है, जिससे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के खिलाफ भारत की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत होती है। 
    • उदाहरण के लिए: श्रीलंका के साथ भारत के सीधे जुड़ाव ने रणनीतिक बंदरगाहों तक पहुंच सुनिश्चित की, जिससे हंबनटोटा में चीनी प्रभाव का मुकाबला किया जा सका।
  • संसाधन आवंटन दक्षता में वृद्धि: द्विपक्षीय संबंध, विशिष्ट परियोजनाओं के अनुरूप केंद्रित संसाधन परिनियोजन सुनिश्चित करते हैं, जिससे कूटनीतिक और आर्थिक लाभ बढ़ता है। 
    • उदाहरण के लिए: म्यांमार में भारत की कलादान मल्टीमॉडल परियोजना रणनीतिक, परिणाम-संचालित निवेश का उदाहरण है।

Check Out UPSC CSE Books From PW Store

वर्ष 2025 में संतुलित पड़ोस सहभागिता के लिए रूपरेखा

  • मजबूत द्विपक्षीय बुनियादी ढाँचा: आपसी लाभ सुनिश्चित करने के लिए पड़ोसी देशों की संप्रभुता और संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का निर्माण करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: भारत का BBIN मोटर वाहन समझौता द्विपक्षीय और उपक्षेत्रीय प्रयासों के माध्यम से सहकारी क्षेत्रीय संपर्क को दर्शाता है।
  • एकीकृत बहुपक्षीय दृष्टिकोण: क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करने और सामूहिक निर्णय लेने को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ BIMSTEC जैसे मंचों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: BIMSTEC के वर्ष 2024 शिखर सम्मेलन में आपदा प्रबंधन और ऊर्जा सहयोग को प्राथमिकता दी गई तथा क्षेत्रीय एकता को बढ़ावा दिया गया।
  • महाशक्तियों की गतिशीलता को संतुलित करना: साझेदारी में विविधता लाकर तथा ध्रुवीकरण से बचने के लिए पारदर्शी क्षेत्रीय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी होगी।
    • उदाहरण के लिए: भारत की QUAD सदस्यता रूस और आसियान देशों के साथ संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ साझेदारी को संतुलित करती है।
  • केंद्रित आर्थिक कूटनीति: क्षेत्र में आर्थिक प्रत्यास्थता सुनिश्चित करने के लिए परस्पर निर्भरता को बढ़ावा देने हेतु व्यापार समझौतों और बुनियादी ढाँचे के निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2024 में नेपाल को भारत की रियायती ऋण सुविधा ने सीमा पार ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी।

वर्ष 2025 में एक संतुलित पड़ोस जुड़ाव संरचना के अंतर्गत द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता के बीच रणनीतिक स्वायत्तता पर बल देना चाहिए। BIMSTEC जैसे प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए, कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करते हुए और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए, भारत एक सामंजस्यपूर्ण दक्षिण एशिया के निर्माण में योगदान देते हुए अपने रणनीतिक हितों को बनाए रख सकता है।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">






    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.