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Q. पर्याप्त निवेश और व्यापार के बावजूद, हाल के वर्षों में भारत-नाइजीरिया संबंध स्थिर हो गए हैं। इसके कारणों पर चर्चा कीजिये और साझेदारी को पुनः जीवंत करने के उपाय सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

November 15, 2024

GS Paper II

प्रश्न की मुख्य माँग

  • इस बात पर प्रकाश डालिये कि पर्याप्त निवेश और व्यापार के बावजूद, हाल के वर्षों में भारत-नाइजीरिया संबंधों में स्थिरता आ गई  है।
  • भारत और नाइजीरिया के बीच के संबंधों में आई स्थिरता के पीछे के कारणों पर चर्चा कीजिए।
  • साझेदारी को पुनर्जीवित करने के उपाय सुझाइये।

उत्तर

एशिया और अफ्रीका की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भारत और नाइजीरिया ऐतिहासिक संबंधों, पर्याप्त व्यापार  और ऊर्जा एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग पर आधारित एक मजबूत नींव वाला संबंध साझा करते हैं। 7.9 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, भारत नाइजीरिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालाँकि, हाल के वर्षों में इन दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता देखी गई है, जो इन दोनों देशों के बीच फिर से एक ऐसी साझेदारी बनाने की आवश्यकता को उजागर करता है जो वर्तमान चुनौतियों का समाधान करती हो और दोनों देशों को पारस्परिक लाभ पहुँचाये।

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भारत-नाइजीरिया संबंधों में ठहराव के कारण

  • द्विपक्षीय व्यापार में कमी: नाइजीरियाई तेल का शीर्ष खरीदार होने के बावजूद, नाइजीरिया के साथ भारत का व्यापार आधा हो गया है, जिससे भारत नाइजीरिया के ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक निवेशक के बजाय केवल खरीदार बनकर रह गया है। 
    • उदाहरण के लिए: चीन जिसके पास पर्याप्त उत्पादन अधिकार हैं, के विपरीत भारत के पास नाइजीरिया में पर्याप्त अपस्ट्रीम परिसंपत्तियों का अभाव है, जिससे इस क्षेत्र में भारत का प्रभाव सीमित हो गया है।
  • उच्च स्तरीय संपर्कों का अभाव: 17 वर्ष पहले प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा के बाद से सीमित राजनयिक संपर्कों ने राजनीतिक संबंधों को कमजोर किया है, जिससे अवसरों का लाभ उचित रूप से नहीं उठाया जा सका है। 
    • उदाहरण के लिए: संयुक्त आयोग की नियमित बैठकें होने से रक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों पर सामरिक संवाद होना बहुत कम हो गया है।
  • प्रतिस्पर्धी विदेशी प्रभाव: चीन और तुर्की जैसे देशों ने नाइजीरिया में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है, खास तौर विशेष रूप से बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, जिससे भारत की, एक प्रमुख भागीदार की भूमिका को चुनौती मिल रही है। 
    • उदाहरण के लिए: चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसी परियोजनायें जो विशेष रूप से परिवहन बुनियादी ढाँचे की योजना में है, ने नाइजीरिया में चीन के सामरिक प्रभाव को बढ़ा दिया है।
  • आर्थिक भागीदारी ढाँचे का अभाव: व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते की अनुपस्थिति, व्यापार विविधीकरण और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को सीमित करती है । 
    • उदाहरण के लिए : India-UAE CEPA जिसने व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ावा दिया है, के विपरीत, भारत और नाइजीरिया के बीच द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कोई ऐसा समझौता नहीं है।
  • नाइजीरिया की राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक सुधार: आवश्यक सुधार होने के बावजूद, हाल ही में हुए राजनीतिक सुधारों ने  नाइजीरिया में आर्थिक उथल-पुथल की स्थिति उत्पन्न कर दी है जो भारतीय व्यवसायों के लिए भागीदारी को चुनौतीपूर्ण बनाती है । 
    • उदाहरण के लिए: सब्सिडी में कटौती और मुद्रा अवमूल्यन के संबंध में राष्ट्रपति टीनूबू द्वारा लिये गये निर्णय हालाँकि नाइजीरिया की अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण थे परंतु यही निर्णय मुद्रास्फीति और विदेशी निवेशकों के लिए अनिश्चितता का कारण बने, जिसका भारतीय निवेश पर असर पड़ा।

भारत-नाइजीरिया साझेदारी को पुनर्जीवित करने के उपाय

  • व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) स्थापित करना: CEPA, व्यापार प्रोत्साहनों को औपचारिक रूप देगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा और रक्षा एवं हाइड्रोकार्बन जैसे क्षेत्रों में व्यापार बाधाओं को कम करेगा। 
    • उदाहरण के लिए: UAE के साथ भारत के CEPA ने व्यापार प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि की है, एक ऐसा मॉडल जिसे निवेश को बढ़ावा देने के लिए नाइजीरिया के साथ भी लागू किया जा सकता है।
  • नाइजीरिया के बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाना: नाइजीरियाई क्षमता निर्माण के लिए परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में भारत की बुनियादी ढाँचा विशेषज्ञता का लाभ उठाने से इन‌ दोनों देशों के बीच के आर्थिक संबंध मजबूत हो सकते हैं और नाइजीरिया की विकास संबंधी आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: नाइजीरियाई परिवहन नेटवर्क में निवेश करके, भारत द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ा सकता है और सद्भावना ला सकता है, जैसा कि इथियोपिया के विद्युत बुनियादी ढाँचे में इसकी भूमिका से पता चलता है।
  • रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण , प्रशिक्षण और संयुक्त सैन्य अभ्यास के माध्यम से रक्षा सहयोग का विस्तार करने से नाइजीरिया की सुरक्षा चुनौतियों का समाधान होगा और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
    • उदाहरण के लिए: नाइजीरियाई सैन्य अधिकारियों को भारत द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण, संयुक्त अभियानों या आतंकवाद पर साझा खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तक विस्तारित हो सकता है, जिससे रक्षा संबंध मजबूत हो सकते हैं।
  • आर्थिक कूटनीति के लिए प्रवासी भारतीयों का लाभ उठाना: नाइजीरिया में 50,000 की संख्या में मौजूद भारतीय प्रवासी,  सांस्कृतिक और व्यावसायिक राजदूत के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक और सामाजिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे सकते हैं।
    • उदाहरण के लिए: नाइजीरिया में टाटा और एयरटेल जैसी भारतीय कंपनियाँ नए संयुक्त उद्यम विकसित करने और स्थानीय सद्भावना को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।
  • मुद्रा विनिमय व्यवस्था के साथ नाइजीरिया के आर्थिक स्थिरीकरण का समर्थन करना: मुद्रा विनिमय समझौते की पेशकश, नाइजीरिया की विदेशी मुद्रा की कमी को कम कर सकती है, व्यापार को स्थिर कर सकती है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचा सकती है। 
    • उदाहरण के लिए: श्रीलंका के साथ भारत के मुद्रा विनिमय ने मुद्रा अस्थिरता को कम किया है; ऐसा ही  मॉडल, नाइजीरिया के आर्थिक स्थिरीकरण में सहायता कर सकता है।

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भारत-नाइजीरिया साझेदारी को पुनर्जीवित करने के लिए गतिरोध को दूर करने और सहयोग को गहरा करने हेतु रणनीतिक और अच्छी तरह से संरेखित कदमों की आवश्यकता है। आर्थिक समझौतों, बुनियादी ढाँचे में निवेश और रक्षा सहयोग को शामिल करते हुए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाकर, भारत नाइजीरिया में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। यह नई साझेदारी आपसी विकास, स्थिरता को बढ़ा सकती है और एक प्रमुख विकास भागीदार के रूप में अफ्रीका में भारत की उपस्थिति को मजबूत कर सकती है।

Despite substantial investments and trade, India-Nigeria relations have stagnated in recent years. Discuss the reasons behind this and suggest measures to rejuvenate the partnership. in hindi

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