Q. "भारत के पास पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत वैधानिक ढांचा है, लेकिन शहरी वायु प्रदूषण पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने में यह चीन से पीछे है। इस विचलन के लिए उत्तरदाई संरचनात्मक और शासन संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। भारत परिवर्तन हासिल करने के लिए बीजिंग के 'ब्लू स्काई' पहल के कौन से विशिष्ट सिद्धांत अपना सकता है?" (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भिन्नता के लिए जिम्मेदार संरचनात्मक चुनौतियाँ।
  • भिन्नता के लिए जिम्मेदार शासन संबंधी चुनौतियाँ।
  • बीजिंग के ‘ब्लू स्काई’ अनुभव से प्राप्त सिद्धांत।

उत्तर

वायु अधिनियम (वर्ष 1981) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (वर्ष 1986) जैसे सुदृढ़ वैधानिक ढाँचे के बावजूद, भारतीय शहर लगातार वैश्विक प्रदूषण सूचकांकों में शीर्ष पर बने रहते हैं। इसके विपरीत, कभी विश्व का सबसे प्रदूषित देश रहा चीन एक तीव्र “प्रदूषण के विरुद्ध युद्ध” में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुका है, जो प्रवर्तन और नीति-प्रभावशीलता के  बढ़ते  अंतर को रेखांकित करता है।

विचलन के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक चुनौतियाँ

  • विखंडित वायुक्षेत्र प्रबंधन: भारत प्रदूषण का विनियमन प्राकृतिक वायुक्षेत्रों के बजाय राज्य सीमाओं के आधार पर करता है, जिससे अंतर-राज्यीय प्रदूषण बना रहता है।
    • उदाहरण: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के बावजूद, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक बार-बार बढ़ जाता है।
  • अवसंरचना निवेश अंतर: चीन के तीव्र अवसंरचना विस्तार की तुलना में भारत सामूहिक सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक व्हीकल नेटवर्क और स्वच्छ हीटिंग में पीछे है।
  • स्रोत-निर्धारण में विलंब: वास्तविक समय में राष्ट्रव्यापी स्रोत-विभाजन के अभाव में संरचनात्मक सुधारों के बजाय प्रतिक्रियात्मक नीतियाँ अपनाई जाती हैं।
    • उदाहरण: विषम–सम योजना जैसे अल्पकालिक उपायों पर निरंतर निर्भरता।
  • धीमा आर्थिक संक्रमण: लोकतांत्रिक और सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ भारत में प्रदूषणकारी उद्योगों के त्वरित स्थानांतरण को सीमित करती हैं।
    • उदाहरण: चीन ने प्रमुख स्वच्छ-वायु कार्ययोजनाओं से पहले बीजिंग के आस-पास हजारों छोटे कारखाने बंद कर दिए।

विचलन के लिए उत्तरदायी शासन संबंधी चुनौतियाँ

  • कमजोर प्रवर्तन क्षमता: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में भारी रिक्तियाँ हैं और “प्रदूषक भुगतान” दंड प्रभावी ढंग से लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी क्षमता का अभाव है।
    • उदाहरण: कई बोर्डों में लगभग 50% तकनीकी पद रिक्त हैं, जिससे निगरानी प्रयास बाधित होते हैं।
  • संघीय घर्षण: पर्यावरण साझा दायित्व है, किंतु केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक टकराव समन्वित कार्रवाई के बजाय आरोप-प्रत्यारोप को बढ़ाता है।
    • उदाहरण: पराली जलाने पर सब्सिडी को लेकर दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच वार्षिक विवाद।
  • अनुपालन बनाम परिणाम: शासन का जोर प्रक्रियात्मक अनुपालन (रिपोर्ट दाखिल करना) पर है, न कि मापनीय वायु गुणवत्ता परिणामों या स्वास्थ्य-आधारित लक्ष्यों पर।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी और गैर-बाध्यकारी हैं, जिनमें चीन की वायु कार्य योजना के कानूनी जनादेश का अभाव है।
  • सीमित न्यायिक प्रवर्तन: राष्ट्रीय हरित अधिकरण सक्रिय है, पर एकीकृत कार्यकारी निगरानी तंत्र के अभाव में उसके निर्देश अक्सर स्थगित या अनदेखे रह जाते हैं।
    • उदाहरण: कचरा जलाने पर बार-बार प्रतिबंध के बावजूद जमीनी नगर निकाय प्रवर्तन के अभाव में उल्लंघन जारी रहता है।

बीजिंग के ‘ब्लू स्काई’ अनुभव से सिद्धांत

  • समयबद्ध जवाबदेही: चीन ने “वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण कार्ययोजना” के तहत प्रांतीय गवर्नर के लिए कड़े, कानूनी रूप से बाध्यकारी पाँच-वर्षीय कमी लक्ष्य निर्धारित किए।
    • उदाहरण: स्थानीय अधिकारियों के अनिवार्य प्रदर्शन मूल्यांकन के माध्यम से बीजिंग ने वर्ष 2013 में औसत पीएम 2.5 स्तर 102 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटाकर 2024 में 31 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर कर दिया।
  • क्षेत्रीय समन्वय तंत्र: बीजिंग–तियानजिन–हेबई क्षेत्र ने उत्सर्जन और आपात प्रतिक्रियाओं के लिए एकीकृत मानक अपनाए, पूरे क्षेत्र को एक इकाई के रूप में माना।
    • उदाहरण: “रेड अलर्ट” के दौरान प्रांतीय सीमाओं के पार औद्योगिक गतिविधि रोकने की शक्ति वाले क्षेत्रीय पर्यावरण पर्यवेक्षण केंद्र स्थापित किए गए।
  • व्यापक राजकोषीय अंतरण: ‘ब्लू स्काई’  परियोजना को स्वच्छ प्रौद्योगिकी में संक्रमण और नागरिकों द्वारा इलेक्ट्रिक व्हीकल  खरीद को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र से अरबों की सब्सिडी का समर्थन मिला।
  • उच्च-प्रौद्योगिकी निगरानी जाल: चीन ने उच्च-परिभाषा सेंसरों और उपग्रह निगरानी का सघन जाल तैनात किया, जिससे वास्तविक समय में व्यक्तिगत प्रदूषकों की पहचान और दंड संभव हुआ।

निष्कर्ष

भारत को “प्रतीकात्मक पर्यावरणवाद” से आगे बढ़कर “परिणामोन्मुख शासन” की ओर विकसित होना होगा। वायुक्षेत्र-आधारित प्रबंधन को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के साथ एकीकृत कर तथा राजनीतिक जवाबदेही को संस्थागत बनाकर भारत बीजिंग मॉडल को दोहरा सकता है। सफलता इस कथानक को केवल नियामक बोझ से हटाकर हरित नवाचार और जन-स्वास्थ्य लचीलापन के अवसर में रूपांतरित करने में निहित है।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.