प्रश्न की मुख्य माँग
- वैश्विक व्यापार अशांति और आर्थिक अनिश्चितताओं के संदर्भ में India-UK मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।
- चर्चा कीजिए कि India-UK मुक्त व्यापार समझौता (FTA ) ब्रेक्सिट पश्चात् के युग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती गतिशीलता को कैसे प्रतिबिंबित करता है।
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उत्तर
MAY 2025 में हस्ताक्षरित India-UK मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का उद्देश्य टैरिफ कम करना, बाजार पहुँच बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। इस ऐतिहासिक सौदे का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश को बढ़ावा देना और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं व परिवर्तित होती व्यापार गतिशीलता के बीच भारत और UK के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना है।
वैश्विक व्यापार अशांति और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच India-Uk FTA का महत्त्व
वैश्विक व्यापार अशांति
- द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना: भारत-ब्रिटेन FTA से द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाएगा।
- उदाहरण: यह समझौता ब्रिटेन को किए जाने वाले 99% भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त कर देगा, जिससे व्यापार की मात्रा में वृद्धि होगी।
- व्यापार साझेदारी में विविधता लाना: RCEP से भारत के बाहर निकलने से पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ FTA पर ध्यान केंद्रित हुआ है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉकों पर निर्भरता कम हुई है।
- आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाना: यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला व्यवधानों के प्रति प्रत्यास्थता बढ़ती है।
- उदाहरण: FTA के तहत बेहतर सीमा शुल्क सहयोग का उद्देश्य व्यापार रसद को सुव्यवस्थित करना है।
- सेवा व्यापार को बढ़ावा देना: FTA, IT और स्वास्थ्य सेवा सहित सेवा क्षेत्रों में उदारीकरण लाना है, जिससे सीमा पार सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण: पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता पेशेवरों की आसान आवाजाही की सुविधा प्रदान करती है।
- निवेश प्रवाह को प्रोत्साहित करना: इस समझौते में द्विपक्षीय निवेश संधि के प्रावधान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य आपसी निवेश को बढ़ावा देना है।
- उदाहरण: UK के व्यवसाय भारत में 6,00,000 से अधिक नौकरियों के सृजन का स्त्रोत हैं, जो मजबूत निवेश संबंधों को दर्शाता है।
आर्थिक अनिश्चितताएँ
- आर्थिक सुधार में सहायता: महामारी के बाद, FTA नए बाजार खोलकर आर्थिक पुनरुद्धार के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य करता है।
- उदाहरण: वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर टैरिफ में कटौती से निर्यात क्षमता में वृद्धि होती है।
- MSME विकास को बढ़ावा देना: यह समझौता भारतीय MSME को UK के बाजार तक पहुँचने के अवसर प्रदान करता है, जिससे विकास को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण: सरलीकृत व्यापार प्रक्रियाएँ, परिधान और चमड़े के सामान जैसे क्षेत्रों में छोटे निर्यातकों को लाभ पहुँचाती हैं।
- रोजगार को बढ़ावा: व्यापार और निवेश का विस्तार करके, FTA से दोनों देशों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है।
- उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि: स्कॉच व्हिस्की और लक्जरी वस्तुओं जैसे UK उत्पादों पर टैरिफ में कमी से भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।
- उदाहरण: ब्रिटिश फैशन और सौंदर्य ब्रांडों पर टैरिफ में कटौती से UK निर्यातकों के लिए नए रास्ते खुलते हैं।
- नवाचार को बढ़ावा देना: FTA के तहत प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
Brexit के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती गतिशीलता पर विचार
- व्यापार संबंधों को फिर से संतुलित करना: Brexit के बाद, UK नए व्यापार साझेदारों की तलाश कर रहा है; भारत के साथ FTA इंडो-पैसिफिक की ओर एक रणनीतिक मोड़ का संकेत देता है।
- उदाहरण: Brexit के बाद यह UK का सबसे बड़ा सौदा है, जिसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को मजबूत करना है।
- विनियामक मतभेदों को संबोधित करना: यह समझौता विनियामक मतभेदों को दूर करता है तथा यूरोपीय संघ के ढाँचे के बाहर भविष्य के UK व्यापार सौदों के लिए मिसाल कायम करता है।
- उदाहरण: बौद्धिक संपदा और डेटा संरक्षण पर समझौता, मानकों को सुसंगत बनाने के प्रयासों को दर्शाता है।
- वैश्विक व्यापार उपस्थिति में वृद्धि: FTA वैश्विक व्यापार में स्वतंत्र रूप से प्रमुख भूमिका स्थापित करने की ब्रिटेन की महत्त्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
- रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना: यह सौदा भू-राजनीतिक संबंधों को मजबूत करता है, जो दोनों देशों की व्यापक विदेश नीति के लक्ष्यों के साथ संरेखित है।
- उदाहरण: बढ़ा हुआ सहयोग व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों तक भी विस्तारित हो सकता है।
- आर्थिक प्रत्यास्थता को प्रोत्साहित करना: व्यापार संबंधों में विविधता लाने से दोनों देशों को वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
भारत-यू. के. FTA द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, जो पारस्परिक आर्थिक लाभ और रणनीतिक लाभ प्रदान करता है। वैश्विक व्यापार अशांति और Brexit के बाद के पुनर्गठन के बीच, यह समझौता अनुकूली व्यापार रणनीतियों का उदाहरण है, जो दोनों देशों के बीच प्रत्यास्थता, विकास और गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है ।