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Q. भारतीय दर्शन और परंपरा ने भारत में स्मारकों और उनकी कला की संकल्पना और उन्हें आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

August 19, 2025

GS Paper IModern History

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत में दार्शनिक विचारों से प्रेरित स्मारक
  • भारत में कला को प्रभावित करने वाली सांस्कृतिक परंपराएँ

उत्तर

मौर्यकालीन स्तूपों से लेकर मुगल मकबरों और विजयनगर मंदिरों तक, भारतीय स्मारक केवल भौतिक संरचनाएँ नहीं थे, बल्कि देश की दार्शनिक धारणाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के साकार रूप रहें। भारतीय दर्शन—चाहे वह वैदिक-हिन्दू, बौद्ध, जैन या सूफी हो—ने स्मारकों की संरचना, प्रतीकवाद और सौंदर्यशास्त्र को आकार दिया, जबकि सांस्कृतिक परंपराओं ने उनमें क्षेत्रीय और कलात्मक विविधता का संचार किया।

भारत में दार्शनिक विचारों से प्रेरित स्मारक

  • हिंदू धर्म में मोक्ष की अवधारणा: मंदिर एक आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक थे, जहाँ गर्भगृह ईश्वर के साथ परम मिलन का स्थल माना जाता था। 
    • उदाहरण: बृहदेश्वर मंदिर, जहां भक्त बाहरी मंडप से गर्भगृह तक जाते हैं।
  • बौद्ध धर्म में निर्वाण की अवधारणा: स्तूपों का निर्माण ज्ञानप्राप्ति की यात्रा को प्रतीकात्मक रूप देने हेतु किया गया, जहाँ उनका वृत्ताकार स्वरूप अनंतता और मुक्ति का द्योतक है।
  • संयम और पवित्रता का जैन दर्शन: मंदिरों में संगमरमर की सादगीपूर्ण शिल्पकला और स्तंभयुक्त मंडप, आन्तरिक पवित्रता को दर्शाते हैं।
    • उदाहरण: दिलवाड़ा जैन मंदिर, माउंट आबू।
  • ईश्वरीय एकता का सूफी दर्शन (तौहीद): गुंबद और सममिति का प्रयोग ‘एक ईश्वर के अस्तित्व’ को दर्शाने हेतु किया गया, जहाँ मानव आकृतियों से परहेज किया गया।
    • उदाहरण: ताजमहल ईश्वरीय प्रेम और सृजन की एकता का प्रतीक है।
  • दर्शन का संगम: इंडो-सरसेनिक शैली में गुंबदों और मेहराबों जैसे भारतीय तत्वों को यूरोपीय गोथिक और पुनर्जागरण विशेषताओं के साथ मिश्रित किया गया।
    • उदाहरण: चेन्नई में मद्रास उच्च न्यायालय।
  • ब्रह्मांडीय नृत्य (नटराज) का शैव दर्शन: मूर्तिकला में शिव के ताण्डव का चित्रण सृजन, पालन और संहार के चक्र का प्रतीक है।
    • उदाहरण: चिदंबरम मंदिर (तमिलनाडु), जहाँ नटराज के रूप में भगवान शिव की उपासना होती है।

यद्यपि दर्शन ने भारतीय स्मारकों के लिए आध्यात्मिक आधार प्रदान किया, भारतीय उपमहाद्वीप की विविध सांस्कृतिक परंपराओं नें इन संरचनाओं को क्षेत्रीय प्रतीकवाद, अनुष्ठानों और कलात्मक विविधता से समृद्ध किया।

भारत में कला को प्रभावित करने वाली सांस्कृतिक परंपराएँ

  • मंदिर के लेआउट में मंडल विन्यास का उपयोग: मंदिर योजनाओं में ज्यामितीय सममिति और मण्डल आकृति ब्रह्माण्डीय सामंजस्य और संतुलन को दर्शाती है।
    • उदाहरण: कोणार्क सूर्य मंदिर को एक विशाल रथ के रूप में डिजाइन किया गया है जो सूर्य की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है।
  • कलश और कमल का प्रतीकवाद: कलश (पवित्र बर्तन) और कमल जैसे स्थापत्य रूपांकन उर्वरता, पवित्रता और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं।
    • उदाहरण के लिए: कंदरिया महादेव मंदिर जिसमें मंदिर के शिखर पर आमलक और कलश हैं।
  • स्थानीय देवताओं और लोक कथाओं का समावेश: स्थानीय सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखने के लिए क्षेत्रीय मिथकों और लोक परंपराओं को शामिल करते हुए भित्ति चित्र और मूर्तियां बनाई गईं।
    • उदाहरण के लिए: ओडिशा की पट्टचित्र कला।
  • तीर्थयात्रा और अनुष्ठान-आधारित संरचनायें: मंदिर परिसरों को विशाल सभाओं, यात्राओं और अनुष्ठानों हेतु विकसित किया गया।
    • उदाहरण: जगन्नाथ मंदिर, पुरी।
  • मंदिर कला में संगीत और नृत्य का एकीकरण: नर्तकों, संगीतकारों और अनुष्ठान प्रदर्शनों को दर्शाती मूर्तियां और नक्काशी, जीवित परंपराओं की महत्ता को दर्शाती है।
    • उदाहरण: होयसलेश्वर मंदिर, कर्नाटक, जो अपने संगीतमय स्तंभों (Musical Pillars)  और नृत्य मूर्तियों के लिए अति प्रसिद्ध है।

निष्कर्ष

भारतीय स्मारक केवल स्थापत्य की दृष्टि से ही अद्भुत नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक बहुलता के साक्ष्य हैं। इनकी रचना में दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक विश्वास और भक्ति ने मिलकर उन पत्थरों को जीवन्त बना दिया, जिनसे राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर संरक्षित हुई है।

Indian Philosophy and tradition played a significant role in conceiving and shaping the monuments and their art in India. Discuss. in hindi

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