प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत का आसियान के प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन किस तरह कनेक्टिविटी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- भारत का आसियान के प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन किस तरह समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
|
उत्तर
कुआलालंपुर में आयोजित 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (2025) में भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट नीति को रणनीतिक और आर्थिक एकीकरण की रणनीति के रूप में पुनः सुदृढ़ किया। भारतीय प्रधानमंत्री ने आसियान विजन 2045 और विकसित भारत 2047 के अनुरूप क्षेत्रीय संपर्कता और समुद्री सुरक्षा पर बल दिया।
भारत के आसियान के प्रति दृष्टिकोण में आए परिवर्तन से कनेक्टिविटी की दिशा में कदम
- व्यापक रणनीतिक साझेदारी: भारत ने सीमित सहभागिता से आगे बढ़कर संस्थागत साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जो बुनियादी ढाँचा, डिजिटल कनेक्टिविटी और व्यापार सहयोग को सुदृढ़ करती हैं।
- उदाहरण: वर्ष 2024 में भारत और मलेशिया ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित किया, जिससे लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग विस्तृत हुआ।
- व्यापार सुधारों के माध्यम से आर्थिक एकीकरण: भारत द्वारा आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) की समीक्षा का प्रयास आपूर्ति शृंखला एकीकरण को बढ़ाने और व्यापार बाधाओं को कम करने की दिशा में एक कदम है।
- भौतिक और बहु-मोडल संपर्कता: भारत की सहभागिता अब दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले बहु-मोडल परिवहन गलियारों के विकास पर केंद्रित है।
- उदाहरण: भारत-आसियान संपर्कता पर हालिया चर्चाएँ भारत–म्याँमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी पूर्ववर्ती पहलों को पूरक बनाती हैं।
- संस्थागत संवाद और ट्रैक 1.5 सहभागिता: भारत द्वारा थिंक टैंक्स, शिक्षाविदों और उद्योग जगत को आसियान संवाद मंचों में शामिल करना, इसकी बहु-हितधारक दृष्टि को दर्शाता है।
- उदाहरण: शिखर सम्मेलन से पूर्व आयोजित पहला भारत–आसियान रणनीतिक संवाद ने ट्रैक 1.5 सहभागिता के माध्यम से नीति समन्वय को सुदृढ़ किया।
- साझा विकास दृष्टि: भारत का विकसित भारत 2047 और आसियान विजन 2045 के साथ समन्वय समावेशी तथा सतत् क्षेत्रीय विकास की साझा राह को रेखांकित करता है।
भारत के दृष्टिकोण में आए परिवर्तन से समुद्री सुरक्षा की दिशा में कदम
- समुद्री सहयोग को केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करना: भारत ने आसियान सहभागिता के केंद्र में समुद्री सुरक्षा को रखा है ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।
- उदाहरण: वर्ष 2025 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष घोषित किया गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को प्रमुखता देता है।
- क्षेत्रीय संकटों में प्रथम उत्तरदाता की भूमिका: मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रयासों में भारत की सक्रिय भूमिका ने इसे एक विश्वसनीय समुद्री साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण-पूर्व एशिया में संकटों के दौरान भारत की ‘प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता’ (First Responder) की भूमिका को पुनः रेखांकित किया, जिससे सामूहिक समुद्री कार्रवाई की तत्परता प्रदर्शित हुई।
- आसियान के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के साथ सामंजस्य: भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI), आसियान के क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण को संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों और क्षमता निर्माण के माध्यम से पूरक करती है।
- उदाहरण: भारत का समावेशिता और स्थिरता पर जोर आसियान की वर्ष 2025 अध्यक्षता की थीम के अनुरूप है।
- प्रमुख आसियान देशों के साथ रणनीतिक सहभागिता: भारत द्वारा तटीय आसियान देशों के साथ रक्षा सहयोग का विस्तार सामूहिक समुद्री निगरानी को सशक्त बनाता है।
- उदाहरण: मलेशिया और फिलीपींस की आगामी राजकीय यात्राओं को समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
- ब्लू इकोनॉमी और सतत् विकास पर ध्यान: भारत की समुद्री नीति अब पर्यावरण संरक्षण और महासागरीय संसाधनों के सतत् प्रबंधन को भी समाहित करती है।
- उदाहरण: भारत की सततता-केंद्रित नीतियाँ आसियान की 2025 की थीम ‘समावेशिता और स्थिरता’ के अनुरूप हैं।
निष्कर्ष
भारत की विकसित होती आसियान सहभागिता केवल प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर व्यावहारिक सहयोग की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन दर्शाती है। यह कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा को एकीकृत कर साझा समृद्धि और स्थिरता पर आधारित एक सशक्त इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।