Q.
भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक एकजुटता से हटकर व्यावहारिक रणनीतिक विस्तार की ओर अग्रसर हुई है। भारत-अफ्रीका संबंधों में हो रहे बदलावों और रणनीतिक लचीलेपन के सिद्धांतों के संदर्भ में इसका विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
May 14, 2026
GS Paper IIInternational Relations
प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत–अफ्रीका संबंधों में ऐतिहासिक एकजुटता से व्यावहारिक रणनीतिक विस्तार की ओर परिवर्तन की चर्चा कीजिए।
- भारत की समकालीन अफ्रीका नीति के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में रणनीतिक लचीलेपन की व्याख्या कीजिए।
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उत्तर
औपनिवेशिक-विरोधी एकजुटता से लेकर हित-आधारित सहभागिता तक, भारत की अफ्रीका नीति व्यापक विदेश नीति परिवर्तन को दर्शाती है, जिसमें ऐतिहासिक सद्भावना के साथ-साथ व्यापार, खनिज संसाधन, सुरक्षा और रणनीतिक लचीलेपन के बीच संतुलन स्थापित किया जा रहा है, विशेषकर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के दौर में।
ऐतिहासिक एकजुटता से व्यावहारिक रणनीतिक विस्तार की ओर परिवर्तन
- एकजुटता से व्यापार: भारत–अफ्रीका संबंध औपनिवेशिक-विरोधी एकजुटता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) से आगे बढ़कर अब बाजार पहुँच, निर्यात और निवेश-आधारित साझेदारियों पर केंद्रित हो गए हैं।
- उदाहरण: भारत–अफ्रीका व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है, और अफ्रीका भारतीय फार्मास्यूटिकल्स तथा इंजीनियरिंग वस्तुओं का एक प्रमुख बाजार बन गया है।
- मित्रता से संसाधन सुरक्षा: पहले संबंध मुख्यतः राजनीतिक सद्भावना पर आधारित थे, जबकि अब अफ्रीका के लीथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ भंडारों ने रणनीतिक संसाधन कूटनीति को केंद्र में ला दिया है।
- उदाहरण: भारत ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियों और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक कोबाल्ट और ताँबा प्राप्त करने हेतु कांगो और जांबिया के साथ संबंधों को मजबूत किया है।
- सहायता से संपर्क-संवर्द्धन: पहले जोर विकासात्मक सहायता और कूटनीतिक प्रतीकवाद पर था, जबकि अब बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल कनेक्टिविटी रणनीतिक प्राथमिकताएँ बन गई हैं।
- उदाहरण: भारत समर्थित एग्जिम (EXIM) बैंक लाइन्स ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत पूर्वी अफ्रीका में रेलवे और बंदरगाह अवसंरचना परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
- समर्थन से सुरक्षा सहयोग : पहले संबंध मुख्यतः बहुपक्षीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन तक सीमित थे, जबकि अब समुद्री सुरक्षा, एंटी-पाइरेसी और रक्षा सहयोग प्रमुख आयाम बन गए हैं।
- उदाहरण: भारत मॉरीशस और सेशेल्स के साथ नौसैनिक सहयोग करता है तथा हिंद महासागर क्षेत्र में तटीय निगरानी प्रणालियों को समर्थन प्रदान करता है।
- नैतिकतावाद से प्रतिस्पर्द्धा: भारत की अफ्रीका नीति अफ्रो-एशियाई एकजुटता और ऐतिहासिक सद्भावना से आगे बढ़कर अब रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और तीव्र भू-राजनैतिक सहभागिता की दिशा में विकसित हो चुकी है।
मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में रणनीतिक लचीलापन
- बहु-संरेखण: भारत गुटीय राजनीति से बचते हुए अफ्रीका के साथ ऐसे संबंध स्थापित करता है, जिनमें पश्चिम, चीन या रूस के बीच किसी एक विकल्प को चुनने का दबाव न हो।
- उदाहरण: भारत मुद्दा-विशिष्ट हितों के आधार पर अफ्रीकी देशों के साथ ब्रिक्स और क्वाड- दोनों मंचों के माध्यम से सहयोग करता है।
- हित सर्वोपरि: भारत की नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित होती है।
- मुद्दा-आधारित गठबंधन: व्यापार, जलवायु, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत, मुद्दे और देश के अनुसार अलग-अलग साझेदारियाँ विकसित करता है।
- उदाहरण: भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में यूरोपीय संघ के साथ सहयोग करता है, जबकि समानांतर रूप से अफ्रीका में खनिज कूटनीति का भी विस्तार कर रहा है।
- तेज़ कार्यान्वयन: रणनीतिक लचीलेपन के लिए कार्यान्वयन की गति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि केवल कूटनीतिक सद्भावना तेजी से सक्रिय बाहरी शक्तियों से प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर सकती।
- उदाहरण: भारत के विकास साझेदारी प्रशासन (DPA) ने अफ्रीका में विकास परियोजनाओं की प्रगति सुधारने हेतु निगरानी व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ किया है।
- घरेलू सुदृढ़ता: भारत की बाह्य रणनीति उसकी आंतरिक आर्थिक सुधारों, औद्योगिक क्षमता और संस्थागत दक्षता पर निर्भर करती है।
निष्कर्ष
भारत की अफ्रीका नीति अब उत्तरदायित्व के साथ यथार्थवादी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें उपनिवेशवाद-विरोधी विश्वास को बनाए रखते हुए रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाया जा रहा है।