प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत के मध्यम वर्ग की भविष्य की आर्थिक संवृद्धि के प्रेरक (Engine of Growth) के रूप में भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- वित्तीय संवेदनशीलता (Financial Vulnerability) तथा ‘मिसिंग मिडिल’ (Missing Middle) की समस्या की व्याख्या कीजिए।
- मध्यम वर्ग को एक सशक्त एवं लचीली आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने हेतु आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।
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उत्तर
परिचय
भारत की लगभग 31% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाला मध्यम वर्ग, OECD के अनुसार, वर्ष 2035 तक विश्व का सबसे बड़ा मध्यम वर्ग बनने की ओर अग्रसर है, जिससे यह भविष्य की आर्थिक संवृद्धि का एक प्रमुख प्रेरक बन सकता है। फिर भी, अनेक परिवार ‘मिसिंग मिडिल’ (Missing Middle) की स्थिति में फँसे हुए हैं, जो एक ओर कल्याणकारी योजनाओं के दायरे से बाहर हैं और दूसरी ओर प्रतिकूल आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा भी नहीं रखते।
भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रेरक के रूप में मध्यम वर्ग
- उपभोग का प्रमुख चालक: मध्यम वर्ग वस्तुओं एवं सेवाओं पर बढ़ते व्यय के माध्यम से घरेलू माँग को बढ़ावा देता है।
- उदाहरण: विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, वर्ष 2036 तक भारत का मध्यम वर्ग कुल उपभोग का 93% हिस्सा वहन करेगा, जो वर्ष 2026 में 80% है ।
- मानव पूँजी का विकास: शिक्षा एवं कौशल में निवेश उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देता है।
- उदाहरण: भारत के 24.69 करोड़ छात्र तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 भविष्य के कार्यबल की क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहे हैं।
- उद्यमिता का आधार: मध्यम वर्ग की आकांक्षाएँ उद्यम सृजन एवं रोजगार निर्माण को प्रोत्साहित करती हैं।
- उदाहरण: स्टार्ट-अप इंडिया के अंतर्गत मार्च 2026 तक 2.23 लाख मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स ने 23.3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए।
- कर योगदान: मध्यम वर्ग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से राजकोषीय क्षमता को मजबूत करता है।
- उदाहरण: GST करदाताओं की संख्या वर्ष 2017 के 66.5 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 में 1.64 करोड़ हो गई।
- शहरी विस्तार: मध्यम वर्ग की बढ़ती माँग उभरते शहरों के विकास को गति देती है।
- उदाहरण: WEF के अनुसार, शहरी उपभोक्ता वृद्धि का 93% हिस्सा देश के शीर्ष पाँच शहरों के बाहर से आएगा।
वित्तीय संवेदनशीलता और ‘मिसिंग मिडिल’ की समस्या
- बीमा कवरेज की कमी: मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा पर्याप्त वित्तीय जोखिम सुरक्षा से वंचित है।
- उदाहरण: नीति आयोग की रिपोर्ट “हेल्थ इंश्योरेंस फॉर इंडियाज मिसिंग मिडिल” ने गरीबी रेखा से ऊपर के अनौपचारिक परिवारों में सीमित बीमा कवरेज को रेखांकित किया है।
- स्वास्थ्य संबंधी स्थितियाँ: चिकित्सा व्यय अल्प समय में बचत और संपत्ति को क्षीण कर सकता है।
- उदाहरण: वर्ष 2021-22 में कुल स्वास्थ्य व्यय में आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय की हिस्सेदारी 39.4% रही (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)।
- आय की असुरक्षा: अनौपचारिक रोजगार परिवारों को अस्थिर आय के जोखिम के प्रति संवेदनशील बनाता है।
- उदाहरण: अनेक स्वरोजगार एवं गिग वर्कर्स अभी भी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढाँचे से बाहर हैं।
- सेवानिवृत्ति संबंधी जोखिम: निजी क्षेत्र से जुड़े मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रायः सुनिश्चित पेंशन उपलब्ध नहीं होती।
- उदाहरण: यूनिफाइड पेंशन स्कीम (2025) मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों को कवर करती है।
- ऋण पर बढ़ती निर्भरता: बढ़ती आकांक्षाएँ ऋण एवं EMI पर निर्भरता को बढ़ा सकती हैं।
- उदाहरण: आवास, शिक्षा एवं व्यक्तिगत ऋणों के विस्तार से मध्यम आय वर्ग में बढ़ते वित्तीय कर्ज की प्रवृत्ति परिलक्षित होती है।
मध्यम वर्ग को एक लचीली आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने के उपाय
- सार्वभौमिक कवरेज: किफायती बीमा एवं स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र का विस्तार किया जाए।
- उदाहरण: IRDAI का “इंश्योरेंस फॉर ऑल बाय 2047” विजन सुरक्षा संबंधी अंतरालों को समाप्त करने का लक्ष्य रखता है।
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों तक पेंशन एवं सुरक्षा जाल का विस्तार किया जाए।
- उदाहरण: ई-श्रम (e-Shram) तथा अंशदायी पेंशन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाया जा रहा है।
- गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ: किफायती सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाए।
- उदाहरण: 1.85 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर सुलभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
- कौशल उन्नयन: आजीवन अधिगम तथा भविष्य उन्मुख कौशलों को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: PMKVY 4.0 के अंतर्गत मार्च 2026 तक 27.74 लाख अभ्यर्थियों को उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया।
- उद्यमिता को समर्थन: ऋण तक आसान पहुँच तथा व्यवसायिक लचीलापन बढ़ाने के उपाय किए जाएँ।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के अंतर्गत मार्च 2026 तक 57 करोड़ ऋण, जिनका कुल मूल्य ₹40.07 लाख करोड़ है, वितरित किए जा चुके हैं।
निष्कर्ष
विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक सशक्त एवं लचीला मध्यम वर्ग अनिवार्य है। ‘मिसिंग मिडिल’ की समस्या को सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा, मानव पूँजी में निवेश तथा व्यापक आर्थिक अवसरों के माध्यम से दूर कर इस आकांक्षी वर्ग को सतत् आर्थिक वृद्धि के प्रमुख प्रेरक में परिवर्तित किया जा सकता है।