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Q. हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक न्यायिक फैसले में प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को उनके व्यसनकारी, एल्गोरिदम-आधारित डिजाइन के कारण मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है, जिसे अक्सर "तत्कालिक संतुष्टि" (Instant Gratification) को बढ़ावा देने वाला बताया जाता है। इस संदर्भ में, ऐसे प्लेटफॉर्मों द्वारा उत्पन्न नैतिक और नियामक चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में "तत्कालिक संतुष्टि को कम करने’ (Detoxing Instant Gratification) की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

March 28, 2026

GS Paper IVEthics, Integrity and Aptitude

प्रश्न की मुख्य माँग

  • नैतिक एवं नियामकीय चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
  • बताइए कि तात्कालिक संतुष्टि से दूरी की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर

हाल ही में एक अमेरिकी जूरी द्वारा सोशल मीडिया मंचों को मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के लिए उत्तरदायी ठहराए जाने से एल्गोरिद्म-आधारित लत और तात्कालिक संतुष्टि को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं, जो वैश्विक स्तर पर अधिक स्वस्थ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु महत्त्वपूर्ण नैतिक और नियामकीय प्रश्न उठाती हैं।

नैतिक एवं नियामकीय चुनौतियाँ

  • एल्गोरिद्मिक हेरफेर: मंच उपयोगकर्ता के कल्याण के बजाय सहभागिता बढ़ाने के लिए सामग्री को अनुकूलित करते हैं।
    • उदाहरण: अनंत स्क्रॉल और अनुशंसा प्रणालियाँ डोपामिन-आधारित उपयोग पैटर्न को बढ़ाती हैं, जैसा कि अमेरिका में प्रौद्योगिकी कंपनियों के विरुद्ध मामलों में सामने आया।
  • मानसिक दुष्प्रभाव: लत उत्पन्न करने वाली संरचना चिंता, अवसाद और ध्यान क्षमता में कमी का कारण बनती है।
  • जवाबदेही की कमी: मंचों की संरचना से होने वाले नुकसान के लिए स्पष्ट उत्तरदायित्व का अभाव है।
    • उदाहरण: मंचों को जिम्मेदार ठहराया गया, बदलते कानूनी मानकों को दर्शाता है।
  • डेटा का दुरुपयोग: उपयोगकर्ता डेटा का उपयोग लत को और मजबूत करने के लिए किया जाता है।
    • उदाहरण: व्यवहार-आधारित ट्रैकिंग पर आधारित व्यक्तिगत विज्ञापन और सामग्री चक्र।
  • कमजोर विनियमन: वर्तमान कानून तकनीकी प्रगति के अनुरूप नहीं हैं।
    • उदाहरण: भारत का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एल्गोरिद्मिक दुष्प्रभावों को समग्र रूप से संबोधित करने में सीमित है।

तात्कालिक संतुष्टि से दूरी की आवश्यकता

  • डिजिटल कल्याण: अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग में कमी लाने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
    • उदाहरण: भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा स्क्रीन-समय नियंत्रण से संबंधित परामर्श।
  • नैतिक डिजाइन: सहभागिता बढ़ाने के बजाय उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन की ओर परिवर्तन।
    • उदाहरण: वैश्विक डिजिटल नैतिकता आंदोलनों से प्रेरित मानवीय तकनीकी डिजाइन की माँग।
  • सूचित विकल्प: उपयोगकर्ताओं को एल्गोरिद्म के बारे में पारदर्शिता देकर सशक्त बनाना।
    • उदाहरण: भारत के सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत प्रस्तावित प्रकटीकरण मानदंड।
  • व्यावहारिक संतुलन: त्वरित मान्यता के बजाय विलंबित संतुष्टि को प्रोत्साहित करना।
    • उदाहरण: युवाओं में सजग डिजिटल उपयोग को बढ़ावा देने वाली शैक्षिक पहलें।
  • नियामकीय विकास: भ्रामक और हेरफेर करने वाली प्रथाओं को रोकने के लिए मजबूत ढाँचा विकसित करना।
    • उदाहरण: यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम, जो मंचों की जवाबदेही के लिए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।

निष्कर्ष

नवाचार और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्कल्पना आवश्यक है, जहाँ नैतिक डिजाइन, सुदृढ़ विनियमन और सजग उपयोगकर्ता व्यवहार मिलकर तात्कालिक संतुष्टि की प्रवृत्ति को कम करें, ताकि प्रौद्योगिकी मानव कल्याण को सुदृढ़ करे, न कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता को कमजोर करे।

A recent jury verdict in the United States held major social media platforms liable for causing mental health harm due to their addictive, algorithm-driven design, often described as fostering “instant gratification.” In this context, discuss the ethical and regulatory challenges posed by such platforms, and examine the need for “detoxing instant gratification” in digital ecosystems. in hindi

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