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Q. भारत और नाइजीरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी अफ्रीकी देशों के साथ जुड़ने के भारत के दृष्टिकोण को कैसे दर्शाती है? दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए। (15 अंक, 250 शब्द)

December 5, 2024

GS Paper II

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत और नाइजीरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों के दृष्टिकोण को कैसे प्रतिबिंबित करती है, इसका परीक्षण कीजिए।
  • दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालिये।

उत्तर

नाइजीरिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को गहरा करने की उसकी बढ़ती प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में, नाइजीरिया सहयोग के लिए अपार संभावनाएँ प्रदान करता है। नाइजीरिया में ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हाल की की गई पहलें पूरे महाद्वीप में सतत विकास और आपसी विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है ।

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भारत और नाइजीरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी अफ्रीकी देशों के साथ जुड़ने के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती है

  • विकासात्मक भागीदारी पर ध्यान: भारत रियायती ऋणों और क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से विकास पर बल देता है , जो दीर्घकालिक भागीदारी बनाने की उसकी रणनीति को दर्शाता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत ने नाइजीरिया को 100 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण प्रदान किया और स्थानीय क्षमताओं को उन्नत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए।
  • सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना: भारत अफ्रीकी देशों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए आतंकवाद और सुरक्षा पर सहयोग करता है व क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत नाइजीरिया को हथियार सप्लाई करता है और बोको हराम के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अभियानों का समर्थन करता है।
  • आर्थिक और व्यापारिक जुड़ाव को बढ़ावा देना: भारत अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देता है। 
    • उदाहरण के लिए: हाल ही में व्यापार में हुए पतन के बावजूद, भारत और नाइजीरिया के बीच अच्छे व्यापार संबंध बने हुए हैं। पूर्व में भारत  नाइजीरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।
  • रक्षा संबंधों का विस्तार: भारत अफ्रीकी देशों की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए रक्षा समाधान प्रदान करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारतीय हथियार खरीदने में नाइजीरिया की रुचि मिस्र और मोजाम्बिक जैसे देशों में इसी तरह की रक्षा साझेदारी के साथ मेल खाती है ।
  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना: भारत आपसी विकास और एकजुटता को बढ़ावा देकर खुद को ग्लोबल साउथ के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: नाइजीरिया द्वारा भारत को अपना दूसरा सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करना, ग्लोबल साउथ के मुद्दों में भारत के नेतृत्व में विश्वास को दर्शाता है।

भारत और नाइजीरिया के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • रक्षा और सुरक्षा: सहयोग में हथियारों की बिक्री , आतंकवाद विरोधी अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। 
    • उदाहरण के लिए: नाइजीरियाई सैन्य कर्मियों को अक्सर भारतीय रक्षा संस्थानों, जैसे कि नई दिल्ली में राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (NDC) और अन्य विशेष सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण मिलता है।
  • ऊर्जा क्षेत्र: तेल और गैस संसाधनों से भरपूर नाइजीरिया, रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से अपनी बढ़ती ऊर्जा माँगों को पूरा करने के लिए भारत के साथ सहयोग करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत पारंपरिक रूप से नाइजीरियाई कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक रहा है , हालाँकि हाल ही में इसके आयात में गिरावट आई है।
  • प्रौद्योगिकी और अवसंरचना: भारत, सहयोगी परियोजनाओं के माध्यम से नाइजीरिया को अपनी तकनीकी और अवसंरचनात्मक क्षमताएँ विकसित करने में सहायता करता है। 
    • उदाहरण के लिए: टेक महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियाँ डिजिटल ट्रॉंसफॉर्मेशन परियोजनाओं में संलग्न हैं, जो विशेष रूप से नाइजीरियाई व्यवसायों के दूरसंचार और उद्यम जगत के लिए लाभकारी है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा: भारत नाइजीरिया के सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा और शैक्षिक सहायता प्रदान करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के माध्यम से नाइजीरियाई डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सुविधा प्रदान की है ।
  • व्यापार और निवेश: भारत विनिर्माण और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में निवेश करता है, जिससे आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत के फार्मा उद्योग, विशेष रूप से सिप्ला और रैनबैक्सी जैसी कंपनियां नाइजीरिया में सस्ती जेनेरिक दवाइयों की आपूर्ति करती हैं।
  • कृषि और खाद्य सुरक्षा: भारत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश के माध्यम से नाइजीरिया की कृषि उत्पादकता और स्थिरता को बेहतर बनाने में सहायता करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत मशीनीकृत खेती में अपनी विशेषज्ञता नाइजीरिया के साथ साझा करता है और नाइजीरिया के कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए मशीनरी प्रदान करता है।
  • डिजिटल और IT सहयोग: दोनों देश आईटी क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन और क्षमता निर्माण में सहयोग करते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: इंफोसिस जैसी भारतीय आईटी फर्म, नाइजीरियाई कंपनियों और सरकारी संगठनों को ERP सिस्टम और डेटा प्रबंधन सहित अन्य IT समाधान प्रदान करती हैं ।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और स्थिरता: भारत नाइजीरिया को अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत नाइजीरिया में सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सहायता प्रदान करता है , जिससे सतत ऊर्जा विकास में सहायता मिलती है।
  • विज्ञान और नवाचार: इस साझेदारी में विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान पहल और नवाचार शामिल हैं। 
    • उदाहरण के लिए: भारत और नाइजीरिया के बीच जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में सहयोगी परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है।

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भारत-नाइजीरिया साझेदारी को मजबूत करने के लिए, दोनों देशों को हरित ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और कौशल विकास जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने से आपसी समझ बढ़ेगी। अपनी साझा शक्तियों का लाभ उठाकर, भारत और नाइजीरिया एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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