प्रश्न की मुख्य माँग
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।
- भारत के विकसित हो रहे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में, इन नियमों के कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- आगे की राह सुझाएँ।
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उत्तर
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 का उद्देश्य भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल परिदृश्य में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करना है। ये नियम, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023 का हिस्सा, डेटा प्रोसेसिंग, सहमति प्रबंधन एवं डेटा संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना के प्रावधानों की रूपरेखा तैयार करते हैं। भारत के डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क तथा TRAI की रिपोर्ट डेटा उल्लंघनों से जुड़े बढ़ते जोखिमों को उजागर करती है, जो डिजिटल युग में गोपनीयता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन प्रावधानों को महत्त्वपूर्ण बनाती है।
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डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान
- डेटा संग्रह पारदर्शिता: नियमों के अनुसार ऑनलाइन सेवाओं को उन उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से सूचित करने की आवश्यकता होती है, जिनके लिए उपयोगकर्ताओं से व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया जा रहा है।
- उदाहरण के लिए: सोशल मीडिया प्लेटफार्म को उपयोगकर्ताओं को यह बताना होगा कि स्थान, ब्राउजिंग हिस्ट्री एवं प्राथमिकताएँ जैसे डेटा क्यों एकत्र किए जा रहे हैं।
- बच्चों के डेटा की सुरक्षा: ऑनलाइन सेवाओं को बच्चों के डेटा की सुरक्षा, शोषण या अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिए विशेष उपाय करने चाहिए।
- उदाहरण के लिए: स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म एवं शैक्षिक ऐप्स 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं से डेटा एकत्र करने से पहले माता-पिता की सहमति प्रोटोकॉल लागू करेंगे।
- भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड (Data Protection Board of India- DPBI): एक नियामक संस्था, DPBI, डेटा उल्लंघनों से संबंधित शिकायतों की निगरानी करेगी एवं यह सुनिश्चित करेगी कि संगठन कानून का अनुपालन सुनिश्चित करें।
- उदाहरण के लिए: यदि कोई तकनीकी फर्म उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग करती है, तो DPBI हस्तक्षेप कर सकता है, जुर्माना लगा सकता है एवं सुधारात्मक उपाय लागू कर सकता है।
- सरकारी छूट: नियम उन शर्तों को रेखांकित करते हैं, जिनके तहत सरकारी एजेंसियों को अधिनियम के कुछ प्रावधानों से छूट दी जा सकती है।
- उदाहरण के लिए: कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कड़ी निगरानी में जाँच के दौरान व्यक्तिगत डेटा तक पहुँचने की अनुमति दी जा सकती है।
- उल्लंघन प्रबंधन प्रक्रियाएँ: व्यक्तिगत डेटा उल्लंघन के मामले में पालन करने के लिए डेटा फिडुशियरी के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित किए गए हैं, जिसमें उपयोगकर्ताओं के लिए अनिवार्य सूचनाएँ भी शामिल हैं।
भारत के विकसित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- डेटा स्थानीयकरण मुद्दे: डेटा स्थानीयकरण आवश्यकताओं को लागू करना मुश्किल साबित हो सकता है, क्योंकि भारत का डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक प्लेटफार्मों के साथ गहराई से एकीकृत है।
- उदाहरण के लिए: अमेजन वेब सर्विसेज जैसे क्लाउड सेवा प्रदाताओं को भारतीय डेटा को केवल देश के भीतर संग्रहीत करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उनका बुनियादी ढाँचा वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है।
- नियामक प्रवर्तन: भारत के विशाल एवं विविध डिजिटल परिदृश्य में नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर छोटी संस्थाओं के साथ।
- उदाहरण के लिए: स्थानीय e-कॉमर्स व्यवसाय संसाधनों एवं जागरूकता की कमी के कारण नए अनुपालन मानकों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर सकते हैं।
- गोपनीयता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा: उपयोगकर्ता के गोपनीयता अधिकारों को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के साथ संतुलित करना, विशेष रूप से सरकारी निगरानी के संदर्भ में, एक महत्त्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है।
- उदाहरण के लिए: सुरक्षा कारणों से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की सरकारी निगरानी डेटा सुरक्षा नियमों द्वारा गारंटीकृत व्यक्तिगत गोपनीयता अधिकारों के साथ टकराव हो सकती है।
- जागरूकता एवं क्षमता निर्माण: डेटा सुरक्षा नियमों के बारे में नागरिकों, व्यवसायों एवं सरकारी एजेंसियों के बीच जागरूकता तथा क्षमता की कमी प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा बन सकती है।
- तकनीकी प्रगति: तकनीकी विकास की तीव्र गति एवं उभरते डिजिटल खतरे डेटा सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन को पीछे छोड़ सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: AI-संचालित डेटा एनालिटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ नए गोपनीयता जोखिम उत्पन्न सकती हैं जिनकी मौजूदा नियमों में पूरी तरह से उम्मीद नहीं थी।
आगे की राह
- जन जागरूकता अभियान: सरकार को नागरिकों, व्यवसायों एवं सरकारी एजेंसियों को डेटा सुरक्षा अधिकारों तथा दायित्वों के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: लोगों को यह समझने में मदद करने के लिए कि उनके डेटा का उपयोग कैसे किया जा रहा है, स्कूलों, विश्वविद्यालयों एवं कार्यस्थलों पर डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम लागू किए जा सकते हैं।
- व्यवसायों के लिए क्षमता निर्माण: सरकार को व्यवसायों, विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि उन्हें डेटा सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन करने में मदद मिल सके।
- सरकारी एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश: गोपनीयता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच टकराव से बचने के लिए, सरकारी एजेंसियां व्यक्तिगत डेटा तक कब पहुँच सकती हैं, इस पर स्पष्ट तथा पारदर्शी दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए।
- समय-समय पर समीक्षा एवं अपडेट: प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास को देखते हुए, डिजिटल क्षेत्र में नई चुनौतियों तथा विकास से निपटने के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियमों की समय-समय पर समीक्षा एवं अद्यतन किया जाना चाहिए।
- प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना: भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड (DPBI) की स्थापना में तेजी लाई जानी चाहिए, एवं अनुपालन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बोर्ड को प्राधिकरण तथा संसाधनों से सुसज्जित किया जाना चाहिए।
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डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025, डेटा गोपनीयता के लिए एक मजबूत ढाँचा प्रदान करते हैं, परन्तु उनके कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें प्रवर्तन में अंतराल, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे एवं सार्वजनिक जागरूकता शामिल हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार, तकनीकी कंपनियों तथा नागरिकों के बीच सहयोग की आवश्यकता होगी। डिजिटल इंडिया एवं MeitY की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति जैसी पहल प्रभावी प्रवर्तन का समर्थन कर सकती हैं। भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को बढ़ावा देते हुए नागरिकों की गोपनीयता की रक्षा के लिए इन नियमों का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण होगा।
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