प्रश्न की मुख्य माँग
- मध्य आयु वर्ग की महिलाओं (25–60 वर्ष) के समक्ष मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- मध्य आयु वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य की उपेक्षा के परिणामों की चर्चा कीजिए।
- जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के उपाय सुझाइए।
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उत्तर
भारत की महिला-केंद्रित स्वास्थ्य नीतियाँ मुख्यतः किशोरावस्था और मातृत्व पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण 25–60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएँ पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाती हैं। यह “मिसिंग मिडिल” स्वास्थ्य समानता, आर्थिक उत्पादकता और महिलाओं के समग्र सशक्तीकरण को जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में कमजोर करता है।
मध्य आयु वर्ग की महिलाओं (25–60 वर्ष) के समक्ष संरचनात्मक चुनौतियाँ
- प्रजनन-केंद्रित दृष्टिकोण: अधिकांश स्वास्थ्य योजनाएँ प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं, जिससे प्रजनन आयु के बाद की महिलाएँ नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से बाहर रह जाती हैं।
- सीमित शोध: दीर्घकालिक और जीवन-चक्र आधारित अध्ययनों की कमी के कारण मध्य आयु वर्ग की महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं को पर्याप्त रूप से समझा और संबोधित नहीं किया जा रहा है।
- उदाहरण: एम् पटना ने मझधार (Majhdhaar) पहल के अंतर्गत महिलाओं के मध्य आयु स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक अध्ययनों की कमी को रेखांकित किया।
- गैर-संचारी रोगों की उपेक्षा: उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों की पर्याप्त जाँच नहीं हो पाती, क्योंकि महिलाओं के स्वास्थ्य को अक्सर केवल प्रजनन क्षमता के दृष्टिकोण से देखा जाता है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) समग्र स्वास्थ्य सेवा पर बल देती है, फिर भी मध्य आयु वर्ग की महिलाओं में NCD पर ध्यान सीमित बना हुआ है।
- कार्यभार: महिलाएँ अवैतनिक देखभाल कार्यों के साथ-साथ अनौपचारिक श्रम भी करती हैं, जिससे उनके पास निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार के लिए समय कम बचता है।
- उदाहरण: जीविका (JEEViKA) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएँ आजीविका कार्य और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाती हैं।
- सामाजिक चुप्पी: रजोनिवृत्ति (Menopause), मानसिक स्वास्थ्य और वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों पर सामाजिक स्तर पर खुलकर चर्चा नहीं होती, जिससे निदान और उपचार में देरी होती है।
- उदाहरण: रजोनिवृत्ति को एक व्यापक जीवन-चरण परिवर्तन के बजाय केवल एक घटना के रूप में देखा जाता है।
मध्य आयु वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य की उपेक्षा के परिणाम
- खराब स्वास्थ्य स्थिति: महिलाएँ अपने जीवन का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अस्वस्थता में बिताती हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता और स्वस्थ वृद्धावस्था प्रभावित होती है।
- उदाहरण: महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं, लेकिन उनके जीवन का 25% से अधिक हिस्सा खराब स्वास्थ्य से प्रभावित रहता है।
- आर्थिक हानि: अनुपचारित बीमारियाँ महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी और उत्पादकता को उनके सबसे सक्रिय आर्थिक वर्षों में कम कर देती हैं।
- गरीबी का दुष्चक्र: स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्चों के लिए पर्याप्त सहायता न होने पर जेब से होने वाला व्यय बढ़ता है।
- उदाहरण: NSSO के आँकड़े दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य व्यय ग्रामीण ऋणग्रस्तता का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
- देखभाल संकट: मध्य आयु में महिलाओं के खराब स्वास्थ्य का प्रभाव बच्चों के कल्याण, बुजुर्गों की देखभाल और परिवार की स्थिरता पर पड़ता है, जिससे देखभाल अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।
- उदाहरण: इस आयु वर्ग की महिलाएँ बच्चों और वृद्ध माता-पिता दोनों की देखभाल करती हैं, जिससे “सैंडविच जनरेशन” का बोझ उत्पन्न होता है।
- सशक्तीकरण में कमी: स्वास्थ्य संबंधी कमजोरियों की अनदेखी महिलाओं की स्वयं सहायता समूह (SHGs), कौशल विकास और वेतनभोगी कार्यों में भागीदारी को सीमित करती है, जिससे सशक्तीकरण की उपलब्धियाँ कम हो जाती हैं।
जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के उपाय
- नीतिगत विस्तार: महिलाओं की स्वास्थ्य नीति को मातृत्व तक सीमित न रखकर जीवन के विभिन्न चरणों में निवारक, उपचारात्मक तथा जेरियाट्रिक (वृद्धावस्था) देखभाल को शामिल करना चाहिए।
- उदाहरण: पीसीआई इंडिया (PCI India) की मझधार पहल मातृत्व से आगे बढ़कर महिलाओं के समग्र कल्याण पर केंद्रित है।
- गैर-संचारी रोगों की जाँच: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और स्तन कैंसर की नियमित जाँच को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से संस्थागत बनाया जाना चाहिए।
- उदाहरण: आयुष्मान आरोग्य मंदिर (Ayushman Arogya Mandir) व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
- रजोनिवृत्ति देखभाल: रजोनिवृत्ति से संबंधित परामर्श, जागरूकता और उपचार सहायता को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
- सामुदायिक सहयोग: स्वयं सहायता समूह (SHGs), आशा कार्यकर्ता और स्थानीय महिला समूहों को जागरूकता, रेफरल तथा सहकर्मी-आधारित सहायता प्रणालियों को बढ़ावा देना चाहिए।
- उदाहरण: पीसीआई इंडिया, एम्स पटना जैसे साझेदार संस्थानों के साथ सामुदायिक-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से कार्य करता है।
- जेंडर बजटिंग: समर्पित वित्तपोषण और आयु-संवेदनशील स्वास्थ्य बजटिंग के माध्यम से इस उपेक्षित वर्ग के लिए सतत् स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- उदाहरण: केंद्रीय बजट के अंतर्गत जेंडर बजटिंग का विस्तार मध्य आयु वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य संकेतकों को शामिल करने हेतु किया जा सकता है।
निष्कर्ष
वास्तविक जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवा मॉडल के लिए महिलाओं को केवल प्रजनन और मातृत्व तक सीमित दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। मध्य आयु वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य में निवेश परिवारों, उत्पादकता और सामाजिक न्याय को मजबूत करता है तथा सतत् विकास लक्ष्य-3 (अच्छा स्वास्थ्य) और सतत् विकास लक्ष्य-5 (लैंगिक समानता) की प्राप्ति को आगे बढ़ाता है।