Q. भारत की स्वतंत्रता के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रणनीति पारंपरिक राजनीति से परे जाकर वैश्विक सैन्य संघर्ष पर केंद्रित थी, जिसे गहरे क्षेत्रीय संबंधों का समर्थन प्राप्त था। भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की भूमिका और तमिलनाडु क्षेत्र के लोगों के विशिष्ट योगदान के संदर्भ में इस कथन की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

January 24, 2026

GS Paper IModern History

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वैश्विक संघर्ष में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की भूमिका
  • तमिल क्षेत्र के लोगों का विशेष योगदान

उत्तर

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भारत की स्वतंत्रता के लिए रणनीति, परंपरागत राजनीति से आगे बढ़कर एक वैश्विक सैन्य संघर्ष तक विस्तृत थी, जो गहन क्षेत्रीय बंधनों से समर्थित थी। नेताजी ने आजाद हिंद की अंतरिम सरकार और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की स्थापना करके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय रूप दिया, द्वितीय विश्व युद्ध के भू-राजनीतिक दरारों का लाभ उठाते हुए और अपने आंदोलन को विभिन्न क्षेत्रीय पहचान, विशेषकर तमिल प्रवासी समुदाय के अडिग समर्थन पर आधारित किया।

वैश्विक संघर्ष में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की भूमिका

भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA/ आजाद हिंद फौज) ने नेताजी के दृष्टिकोण की सैन्य शक्ति के रूप में कार्य किया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को घरेलू आंदोलन से परिवर्तित कर एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में परिवर्तित कर दिया।

  • अंतरराष्ट्रीय विधिक स्थिति: नेताजी ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद की अंतरिम सरकार स्थापित करके नौ धुरी राष्ट्रों से औपचारिक मान्यता प्राप्त की, जिससे INA को वैध सहयोगी सेना का दर्जा मिला।
  • भू-राजनीतिक लाभ उठाना: नेताजी ने “शत्रु का शत्रु मित्र है” के सिद्धांत का उपयोग करते हुए जापान से सैन्य और लॉजिस्टिक समर्थन प्राप्त किया तथा भारत की पूर्वी सीमाओं पर सशस्त्र आक्रमण की योजना बनाई।
  • सैन्य विद्रोह का प्रतीक: INA का नारा “चलो दिल्ली” और मॉयरांग (मणिपुर) का कब्जा, जहाँ पहली बार मुख्यभूमि पर तिरंगा फहराया गया, ने ब्रिटिश सैन्य अजेयता होने के भ्रम को तोड़ दिया।
  • मनोवैज्ञानिक युद्ध: एक विद्रोही भारतीय सेना के अस्तित्व ने ब्रिटिश भारतीय सेना के भीतर गंभीर चिंता उत्पन्न की, जिसके परिणामस्वरूप “जिफ्स” प्रचार अभियान शुरू किया गया ताकि सेना में पलायन और बगावत को रोका जा सके।
  • झाँसी की रानी रेजिमेंट: नेताजी ने सभी महिलाओं की इकाई बनाकर युद्ध में लैंगिक समावेशिता प्रस्तुत की, जिससे विश्व के समक्ष भारत की प्रगतिशील क्रांतिकारी भावना उजागर हुई।
    • उदाहरण: कैप्टन लक्ष्मी सहगल के नेतृत्व में यह रेजिमेंट औपनिवेशिक संघर्षों में महिलाओं के सशक्तीकरण का वैश्विक प्रतीक बन गई।
  • युद्धबंदियों का एकीकरण: INA ने हजारों ब्रिटिश-भारतीय युद्धबंदियों को राष्ट्रवादी क्रांतिकारियों में बदलने में सफलता प्राप्त की, जिससे ब्रिटिश शासन की मुख्य नियंत्रण शक्ति, अर्थात सेना, की नींव कमजोर हुई।
  • एकीकृत राष्ट्रीय पहचान: INA ने धर्म और जाति की सीमाओं को पार करते हुए हिंदुस्तानी को साझा भाषा और “जय हिंद” को सार्वभौमिक अभिवादन के रूप में अपनाया, जिससे समग्र भारतीय चेतना को बढ़ावा मिला।

तमिल क्षेत्र के लोगों का विशिष्ट योगदान

तमिल क्षेत्र और उसके प्रवासी समुदाय ने नेताजी की सैन्य महत्त्वाकांक्षाओं के लिए सामाजिक और वित्तीय आधार प्रदान किया, जिससे INA को बनाए रखने वाला एक “गहरा क्षेत्रीय बंधन” स्थापित हुआ।

  • थेवर–बोस गठबंधन: पासुम्पोन मुथुरामलिंगम थेवर ने दक्षिण तमिलनाडु के योद्धा समुदायों को INA और फॉरवर्ड ब्लॉक के समर्थन में सक्रिय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • उदाहरण: थेवर का प्रभाव इतना गहरा था कि आज भी बोस की छवि और प्रतीकात्मकता जैसे रामनाथपुरम और मदुरै जिलों में थेवर की विरासत से अटूट रूप से जुड़ी हुई है।
  • प्रवासी समुदाय का वित्तीय समर्थन: मलाया, बर्मा और सिंगापुर में तमिल बागान श्रमिकों और व्यापारी वर्ग ने आजाद हिंद बैंक में अपनी जीवनभर की बचत दान कर दी।
    • उदाहरण: नेताजी ने प्रसिद्ध रूप से कहा कि “गरीब तमिल मजदूर” INA के युद्ध कोष के सबसे उदार योगदानकर्ता थे।
  • भर्ती का आधार: INA के अधिकांश सैनिक, विशेष रूप से बाद के चरणों में, दक्षिण-पूर्व एशिया के तमिल लोग थे।
  • महिलाओं की भागीदारी: प्रवासी तमिल महिलाएँ पारंपरिक सामाजिक सीमाओं को तोड़ते हुए बड़ी संख्या में झाँसी की रानी रेजिमेंट में शामिल हुईं।
    • उदाहरण: जानकी अथि नाहप्पन (जानकी थेवर), जिन्होंने मात्र 14 वर्ष की उम्र में अपने आभूषण दान किए, बाद में रेजिमेंट की उप-कमांडर बनीं।
  • खुफिया और बलिदान: कई तमिल युवा INA की विशेष खुफिया इकाइयों में अपनी  सेवाएँ दी तथा औपनिवेशिक गतिविधियों के लिए ब्रिटिशों द्वारा उन्हें फाँसी दे दी गई।
    • उदाहरण: रामु थेवर, जो 18 वर्षीय INA खुफिया एजेंट, को गोपनीय ऑपरेशनों में भूमिका निभाने के लिए ब्रिटिशों द्वारा फाँसी दी गई।
  • बौद्धिक समर्थन: तमिल साप्ताहिक “नेताजी” के प्रकाशन ने क्रांतिकारी विचारों का प्रसार किया और जनता में सशस्त्र संघर्ष की भावना को जीवित रखा।
  • नैतिक त्याग: नेताजी के “सेवा और बलिदान” के दर्शन का पालन करते हुए कई तमिल परिवारों ने इस संघर्ष को पवित्र कर्तव्य के रूप में देखा और अपने कई सदस्यों को मोर्चे पर भेजा।

निष्कर्ष 

नेताजी का “पराक्रम” भारत की प्रगति के मार्ग के लिए मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में बना हुआ है। उनकी वैश्विक सैन्य कूटनीति को जमीनी क्षेत्रीय निष्ठा के साथ जोड़ने की क्षमता ने एक अद्वितीय क्रांतिकारी मॉडल तैयार किया। जैसा कि वर्ष 2026 में पराक्रम दिवस पर उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया, तमिल सैनिकों का योगदान और नेताजी की रणनीतिक दूरदर्शिता ब्रिटिश साम्राज्यवाद के ताबूत में अंतिम कील सिद्ध हुई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि भारत की आजादी नैतिक शक्ति और सैन्य प्रतिरोध दोनों से हासिल हुई है।

Netaji Subhas Chandra Bose’s strategy for India’s independence went beyond conventional politics to encompass a global military struggle supported by deep regional bonds. Discuss this statement in light of the role of the Indian National Army (INA) and the specific contribution of the people of the Tamil region. in hindi

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