प्रश्न की मुख्य माँग
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की आर्थिक क्षमता तथा नए युग के व्यवसायों (New-age Professions) का उदय
- डिजिटल कार्य प्रणाली से उत्पन्न नैतिक एवं संवैधानिक चुनौतियाँ
- डिजिटल व्यवसायों के समान, सुरक्षित और उत्तरदायी विकास हेतु उपाय
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उत्तर
परिचय
डिजिटल अर्थव्यवस्था के तीव्र विस्तार ने डेटा विश्लेषक, एआई विशेषज्ञ, फिनटेक डेवलपर, गिग वर्कर तथा कंटेंट क्रिएटर जैसे नए युग के व्यवसायों को जन्म दिया है। ये भूमिकाएँ आर्थिक वृद्धि, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं। तथापि, इनके साथ नैतिक मानकों, श्रम अधिकारों, निजता तथा समानता एवं स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों से जुड़े प्रश्न भी उत्पन्न होते हैं।
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आर्थिक अवसर
- रोजगार सृजन और नवाचार: डिजिटल प्लेटफॉर्म कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं तथा भौगोलिक सीमाओं को कम करते हैं।
- उदाहरण: भारत के IT-BPM क्षेत्र ने वर्ष 2025 में 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया, जबकि एआई और डेटा एनालिटिक्स जैसे नए युग के रोजगार तीव्र गति से बढ़ रहे हैं।
- वैश्विक बाजार एकीकरण: फ्रीलांसर और प्लेटफॉर्म वर्कर अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुँच बना सकते हैं।
- उदाहरण: भारत की गिग अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 में अपवर्क (Upwork) और फ्रीलांसर जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का योगदान दिया।
- उद्यमिता और स्टार्ट-अप्स: तकनीक-आधारित उद्यमों में प्रवेश बाधाओं में कमी नवाचार को प्रोत्साहित करती है।
नैतिक और संवैधानिक चुनौतियाँ
- निजता और डेटा संरक्षण: संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय डेटा के प्रबंधन में कमी संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है।
- श्रम अधिकार और गिग वर्क: अनेक गिग वर्कर्स को औपचारिक अनुबंध, सामाजिक सुरक्षा या न्यूनतम वेतन सुरक्षा प्राप्त नहीं होती।
- उदाहरण: रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में 80% से अधिक गिग वर्कर्स न्यूनतम वेतन सीमा से कम आय अर्जित करते हैं।
- एल्गोरिदमिक संबंधी पक्षपात और निष्पक्षता: एआई-आधारित भर्ती एवं सेवा आवंटन प्रणालियाँ भेदभाव को बढ़ावा दे सकती हैं।
- उदाहरण: स्वचालित क्रेडिट स्कोरिंग और भर्ती एल्गोरिद्म में लिंग एवं जाति आधारित पूर्वाग्रह देखे गए हैं।
आगे की राह
- नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करना: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा क्षेत्र-विशिष्ट श्रम सुरक्षा प्रावधानों को मजबूत किया जाए।
- ई-श्रम पोर्टल का प्रभावी उपयोग: गिग एवं असंगठित श्रमिकों के लिए ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य डेटा समन्वयन को तीव्र किया जाए ताकि बेहतर नीति निर्माण संभव हो सके।
- नैतिक एआई और पारदर्शिता: रोजगार एवं वित्तीय सेवाओं में एल्गोरिद्मिक ऑडिट तथा एक्सप्लेनेबल एआई को अनिवार्य किया जाए।
- कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग वर्कर्स के कल्याणकारी प्रावधानों का विस्तार किया जाए तथा सतत कौशल उन्नयन को प्रोत्साहित किया जाए।
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निष्कर्ष
नए युग के डिजिटल व्यवसाय व्यापक आर्थिक परिवर्तन और अवसर प्रदान करते हैं, किंतु नैतिक त्रुटि एवं संवैधानिक जोखिम समावेशिता और निष्पक्षता को कमजोर कर सकते हैं। अतः संतुलित नीतिगत दृष्टिकोण, मजबूत नियामक ढाँचा तथा नैतिक तकनीक को अपनाना आवश्यक है, ताकि विकास को गति देते हुए अधिकारों और समानता की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।