Q. परमाणु बम विस्फोटों में जीवित बचे लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह निहोन हिडांक्यो (Nihon Hidankyo) को परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने में अपने कार्य के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में इस मान्यता के महत्त्व की जाँच कीजिये और वैश्विक शांति निर्माण प्रयासों को आगे बढ़ाने में निहोन हिडांक्यो जैसे उत्तरजीवी वकालत की भूमिका का मूल्यांकन कीजिये। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग 

  • परमाणु बम विस्फोटों में जीवित बचे लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘निहोन हिडांक्यो’ पर प्रकाश डालिये, जिसे परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने में अपने कार्य के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में निहोन हिंडाक्यो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के महत्त्व का परीक्षण कीजिए।
  • वैश्विक शांति निर्माण प्रयासों को आगे बढ़ाने में निहोन हिडांक्यो द्वारा प्रदर्शित सर्वाइवर एडवोकेसी की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर

निहोन हिडांक्यो एक जमीनी स्तर का संगठन है जो हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम विस्फोटों में जीवित बचे लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। वर्ष 1956 में स्थापित यह संगठन, हिडांक्यो परमाणु बम हमलों में  जीवित बचे लोगों (हिबाकुशा) का संगठन है। यह दशकों से विश्व को परमाणु हथियारों के खतरों से अवगत कराने के प्रयास में जुटा है। वर्ष 2024 में उन्हें प्राप्त हुये इस नोबेल शांति पुरस्कार ने परमाणु निरस्त्रीकरण में उनके दशकों पुराने प्रयासों को मान्यता प्रदान करते हुए, आज के अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में परमाणु निरस्त्रीकरण के संबंध में सबका ध्यान आकर्षित किया है।

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निहोन हिंडाक्यो का कार्य और नोबेल शांति पुरस्कार सम्मान

  • सर्वाइवर एडवोकेसी एवं वैश्विक जागरूकता: निहोन हिंडाक्यों ने परमाणु बम हमले में जीवित बचे लोगों की गवाही के माध्यम से परमाणु हथियारों के मानवीय परिणामों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 
    • उदाहरण के लिए: इस संगठन के प्रयासों ने ‘न्यूक्लियर टैबू’ की स्थापना में योगदान दिया है, जो परमाणु हथियारों का फिर कभी उपयोग न करने संबंधी विश्व  की  बढ़ती  हुई समझ है।  
  • परमाणु निरस्त्रीकरण अभियान: इस संगठन ने परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की संकल्पना करते हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरस्त्रीकरण अभियानों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
    • उदाहरण के लिए: परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि (2017) में निहोन हिडांक्यो की सक्रिय भागीदारी को निरस्त्रीकरण प्रयासों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना गया है।
  • परिवर्तन के माध्यम के रूप में परमाणु हमले में जीवित बचे लोगों की गवाही: परमाणु हमले में जीवित बचे लोगों ने अपने व्यक्तिगत आख्यानों के माध्यम से परमाणु युद्ध के विनाशकारी प्रभावों की और विश्व का ध्यान आकर्षित किया  जिससे उनके प्रति लोगों के मन में समानुभूति की भावना उत्पन्न हुई और निरस्त्रीकरण की दिशा में वैश्विक स्तर पर कई कदम उठाए गए। 
    • उदाहरण के लिए: संयुक्त राष्ट्र में हिबाकुशा की गवाहियों ने वैश्विक निरस्त्रीकरण से संबंधित चर्चाओं और विभिन्न परमाणु संधियों की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  • वैश्विक शांति के लिए जमीनी स्तर पर आंदोलन: निहोन हिडांक्यो, कई दशकों से हमले में जीवित बचे लोगों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचा रहा है और इस तरह से यह इन हमलों में बचे हुए लोगों के प्रतिरोध का प्रतीक बन चुका है। 
    • उदाहरण के लिए: नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने शांति को बढ़ावा देने और संघर्षों में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने में इस संगठन के ‘असाधारण प्रयासों’ की प्रशंसा की है।
  • ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करना: यह सुनिश्चित करके कि भविष्य की पीढ़ियाँ परमाणु युद्ध की भयावहता को समझें , निहोन हिडांक्यो भविष्य के संघर्षों के निवारक के रूप में ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित किये हुये है और इन हमलों की भयावहता की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।
    • उदाहरण के लिए: जापानी सरकार और संयुक्त राष्ट्र सहायता कार्यक्रम,  परमाणु निरस्त्रीकरण संबंधित शिक्षा में इस संगठन की भूमिका को उजागर करते हैं।

वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में निहोन हिडांक्यो की मान्यता का महत्त्व

  • बढ़ते परमाणु तनाव: यूक्रेन संघर्ष में रूस की धमकियों और ईरान तथा उत्तर कोरिया की परमाणु महत्त्वाकांक्षाओं को देखते हुए यह नोबेल पुरस्कार, निरस्त्रीकरण की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है।
  • न्यूक्लियर टैबू पर बल देना: आधुनिक समय में जहाँ हर देश अपने परमाणु शस्त्रागार को मजबूत करने में प्रयासरत है, यह पुरस्कार हिरोशिमा और नागासाकी के बाद स्थापित ‘न्यूक्लियर टैबू’ पर बल देता है। 
    • उदाहरण के लिए: परमाणु हथियारों पर वैश्विक प्रतिबंध संधि, आज के भू-राजनीतिक माहौल में परमाणु हथियारों के प्रसार को सीमित करने के लिए एक आवश्यक उपकरण बनी हुई है।
  • परमाणु प्रतिवारण को निरस्त्रीकरण के साथ संतुलित करना: यह पुरस्कार, परमाणु प्रतिवारण सिद्धांत का पालन करने वाले देशों और पूर्ण रूप से परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत करने वाले देशों के बीच संतुलन बनाने पर बल देता है। 
    • उदाहरण के लिए: चीन और उत्तर कोरिया जैसी परमाणु शक्तियों के साथ जापान की निकटता, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच निरस्त्रीकरण की उसकी वकालत को और भी महत्त्वपूर्ण बनाती है।
  • विखंडित विश्व में शांति का संदेश: निहोन हिडांक्यो का शांति संदेश कई क्षेत्रों में बढ़ते सैन्यीकरण का मुकाबला कर सकता है।
    • उदाहरण के लिए: अमेरिका-चीन-रूस त्रिपक्षीय गतिशीलता और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में जारी संघर्ष, इस संदेश की आवश्यकता को बढ़ावा देते हैं।
  • परमाणु नीति में मानवीय चिंताओं को बढ़ावा देना: यह पुरस्कार इस बात पर बल देता है कि परमाणु निरस्त्रीकरण केवल भू-राजनीति से संबंधित नहीं है, अपितु यह मानवता को विनाशकारी परिणामों से बचाने के लिए भी अति महत्त्वपूर्ण है। 
    • उदाहरण के लिए: परमाणु हथियारों को समाप्त करने हेतु अंतरराष्ट्रीय अभियान (ICAN), परमाणु नीति चर्चाओं में मानवीय चिंताओं को सबसे आगे रखने के लिए, निहोन हिडांक्यो के साथ मिलकर कार्य करता है।

वैश्विक शांति स्थापना को आगे बढ़ाने में सर्वाइवर एडवोकेसी की भूमिका

  • पीड़ितों का नैतिक अधिकार: निहोन हिडांक्यो जैसे संगठन परमाणु विनाश के अपने प्रत्यक्ष अनुभवों को साझा करके शांति निर्माण प्रयासों को नैतिक अधिकार प्रदान करते हैं ।
    • उदाहरण के लिए: संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर हिबाकुशा की गवाही, परमाणु हथियार न्यूनीकरण संधियों को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण रही है।
  • मानवीय संबंध का निर्माण: सर्वाइवर एडवोकेसी युद्ध के परिणामों को एक मानवीय स्वरूप प्रदान करती है, और हमले में जीवित बचे लोगों के साथ एक गहरा भावनात्मक संबंध बनाती है जो इन लोगों के प्रति समानुभूति विकसित करते हुए शांति प्रयासों को बढ़ावा देने में सहायता करता है।
  • हमलों के गवाहों की गवाही के माध्यम से नीति परिवर्तन को आगे बढ़ाना: जीवित बचे लोगों की गवाही, नीति निर्माताओं को प्रभावित करने तथा शांति वार्ता में ठोस कार्रवाई करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में कार्य करती है। 
    • उदाहरण के लिए: जापान के शांतिवादी संविधान को आकार देने में हिबाकुशा की गवाहियाँ महत्त्वपूर्ण थीं, जो जापान के युद्धोत्तर शांति प्रयासों की आधारशिला बनी हुई है।
  • निरस्त्रीकरण के लिए वैश्विक आंदोलन: परमाणु हमले में बचे हुए लोग, ICAN जैसे वैश्विक आंदोलनों को मजबूती प्रदान करते हैं। ICAN के  परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति मानवीय दृष्टिकोण ने उन्हें वर्ष 2017 में नोबेल शांति पुरस्कार दिलाया।
  • भावी पीढ़ियों के लिए सबक: सर्वाइवर समूह, भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को शांति कायम रखने के लिए प्रेरित करते हुए, शांति और निरस्त्रीकरण के महत्त्व पर युवा पीढ़ी को शिक्षित करने में मदद करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: जापान में शैक्षिक कार्यक्रमों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को यह जिम्मेदारी सौंपना है, कि परमाणु निरस्त्रीकरण आंदोलन जारी रहे।

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 निहोन हिडांक्यो संगठन को प्रदान किया गया नोबेल शांति पुरस्कार ,परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने में सर्वाइवर एडवोकेसी की शक्ति का प्रमाण है । उनके प्रयासों ने 80 से अधिक वर्षों तक न्यूक्लियर टैबू को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आगे बढ़ते हुए, शांति निर्माण और निरस्त्रीकरण प्रयासों की गति को बनाए रखने के लिए शिक्षा, डिजिटल प्लेटफार्म और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संयोजन अति महत्त्वपूर्ण है।

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