प्रश्न की मुख्य माँग
- विदेश यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए जोखिम उत्पन्न करने वाले संस्थागत एवं नियामकीय अंतराल।
- निवारक सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक तंत्र।
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उत्तर
परिचय
भारत से विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है, जहाँ प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ भारतीय विदेश यात्रा करते हैं, जिनमें टियर-II एवं टियर-III शहरों के यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। किंतु पर्यटन क्षेत्र का यह विस्तार अनेक देशों में सुरक्षा विनियमन, आपातकालीन तैयारी तथा उपभोक्ता जागरूकता की तुलना में अधिक तेजी से हुआ है। हाल ही में फू कॉक (Phú Quốc), वियतनाम में हुई नौका दुर्घटना, जिसमें लगभग 15 भारतीय पर्यटकों की मृत्यु हुई, ने विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए अधिक सुदृढ़ संस्थागत तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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विदेशों में भारतीय पर्यटकों के लिए बढ़ते जोखिमों के कारण
- सुरक्षा विनियमन का अभाव: उभरते हुए पर्यटन स्थलों में प्रायः सुरक्षा संबंधी विनियम एवं उनके प्रवर्तन तंत्र पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होते।
- उदाहरण: फू कॉक (Phú Quốc) की स्पीडबोट दुर्घटना ने जीवनरक्षक जैकेट के अनिवार्य उपयोग, यात्री सुरक्षा प्रणाली तथा आपातकालीन तैयारी में विद्यमान कमियों को उजागर किया।
- साहसिक एवं मनोरंजक पर्यटन का कमजोर विनियमन: जल क्रीड़ा, नौका विहार तथा साहसिक गतिविधियों में सुरक्षा नियमों का प्रवर्तन प्रायः असंगत होता है।
- उदाहरण: केवल जीवनरक्षक जैकेट वितरित कर देना, बिना यह सुनिश्चित किए कि यात्री उन्हें वास्तव में पहनें, उनकी प्रभावशीलता को कम कर देता है।
- पर्यटकों एवं संचालकों के मध्य सूचना विषमता: यात्रियों को स्थानीय सुरक्षा मानकों, बीमा कवरेज तथा आपातकालीन प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होती है।
विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित संस्थागत अंतराल
- यात्रा-पूर्व सुरक्षा तंत्र का अभाव: यात्रा परामर्श प्रायः वीजा एवं यात्रा संबंधी औपचारिकताओं पर केंद्रित रहते हैं, जबकि जोखिम मूल्यांकन पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।
- उदाहरण: स्थानीय परिवहन, मौसम की परिस्थितियों तथा साहसिक गतिविधियों से संबंधित सुरक्षा चेतावनियाँ अभी भी सीमित हैं।
- विखंडित जवाबदेही: उत्तरदायित्व विदेशी नियामक संस्थाओं, टूर ऑपरेटरों तथा भारतीय एजेंसियों के मध्य विभाजित रहता है।
- उदाहरण: विदेशों में होने वाली दुर्घटनाओं में स्थानीय संचालकों एवं टूर आयोजकों के मध्य उत्तरदायित्व निर्धारित करना कठिन हो जाता है।
- पर्यटन संचालकों की कमजोर निगरानी: भारतीय ट्रैवल कंपनियाँ हमेशा विदेशी सेवा प्रदाताओं के सुरक्षा अनुपालन का पर्याप्त सत्यापन नहीं करती हैं।
- उदाहरण: भारतीय कॉरपोरेट समूहों की विदेश यात्राओं के लिए विदेशी साहसिक गतिविधि संचालकों का अधिक कठोर समुचित परीक्षण अनिवार्य है।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया संबंधी सीमाएँ: बचाव, चिकित्सीय सहायता तथा संचार में विलंब से जनहानि बढ़ जाती है।
- उदाहरण: वियतनाम नौका दुर्घटना में निकासी में हुई देरी के कारण फँसे हुए यात्रियों में मृतकों की संख्या अधिक रही।
आगे की राह: विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना
- व्यापक यात्रा सुरक्षा ढाँचा विकसित करना: परिवहन, साहसिक गतिविधियों तथा आपातकालीन प्रोटोकॉल को सम्मिलित करते हुए गंतव्य-विशिष्ट सुरक्षा दिशा-निर्देश तैयार किए जाएँ।
- उदाहरण: विदेश मंत्रालय (MEA) एवं पर्यटन मंत्रालय लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए जोखिम रेटिंग जारी कर सकते हैं।
- ट्रैवल ऑपरेटरों की जवाबदेही सुदृढ़ करना: भारतीय पर्यटकों की यात्रा आयोजित करने वाले टूर ऑपरेटरों के लिए सुरक्षा ऑडिट एवं प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाया जाए।
- उदाहरण: कॉरपोरेट यात्रा पैकेजों में सुरक्षा अनुपालन का रिकॉर्ड रखने वाले सत्यापित स्थानीय संचालकों को ही शामिल किया जाए।
- आपातकालीन तैयारी को सुदृढ़ करना: भारतीय दूतावासों, स्थानीय प्रशासन तथा भारतीय ट्रैवल कंपनियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
- उदाहरण: दूतावास अधिक पर्यटक-आगमन वाले क्षेत्रों में आपातकालीन हेल्पलाइन एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र संचालित कर सकते हैं।
- पर्यटक सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देना: यात्रा परामर्श एवं बुकिंग प्लेटफॉर्म में सुरक्षा प्रशिक्षण को सम्मिलित किया जाए।
- उदाहरण: साहसिक पर्यटन गतिविधियों से पूर्व जीवनरक्षक जैकेट, बीमा तथा स्थानीय कानूनों के संबंध में अनिवार्य जागरूकता सुनिश्चित की जाए।
- कांसुलर सुरक्षा तंत्र का विस्तार करना: संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए विदेश स्थित भारतीय मिशनों की क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
- उदाहरण: मदद (MADAD) पोर्टल तथा दूतावास सहायता प्रणाली का आपातकालीन सहायता के लिए और अधिक विस्तार किया जा सकता है।
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निष्कर्ष
विदेश पर्यटन में वृद्धि भारत की बढ़ती आर्थिक गतिशीलता को दर्शाती है, किंतु इसके साथ-साथ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के उपायों का भी समान रूप से विकास होना आवश्यक है। विदेशों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर निवारक शासन अपनाना होगा, जिसमें नियामकीय समन्वय, यात्रियों की जागरूकता, टूर ऑपरेटरों की जवाबदेही तथा सुदृढ़ कांसुलर सहायता तंत्र का समन्वित विकास सुनिश्चित किया जाए।