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Q. मुफ्त उपहार (फ्रीबीज़) की राजनीति से अल्पावधि में राजनीतिक परिणाम मिल सकते हैं लेकिन दीर्घावधि में इसकी बड़ी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी। टिप्पणी कीजिये । (150 शब्द, 10 अंक)

September 12, 2023

GS Paper IIIIndian Economy

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • परिचय: फ्रीबीज़ को संक्षेप में परिभाषित करते हुए मतदाता तुष्टीकरण के एक उपकरण के रूप में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  • मुख्य विषयवस्तु:
    • एक रणनीति के रूप में फ्रीबीज़ का उपयोग करते समय राजनीतिक दलों को होने वाले तात्कालिक लाभों पर चर्चा कीजिए।
    • लंबे समय में सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर फ्रीबीज़ के संभावित प्रभावों की जाँच कीजिए।  
  • निष्कर्ष: अल्पकालिक लाभ के बजाय सतत विकास और राजकोषीय संतुलन को प्राथमिकता देने वाली नीतियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए निष्कर्ष निकालें।

परिचय:

‘फ्रीबीज़’ शब्द का अर्थ उन वस्तुओं और सेवाओं से है जो लोगों को मुफ़्त में प्रदान की जाती हैं अर्थात यह अक्सर  लाभार्थी को बिना किसी कीमत पर दी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं को संदर्भित करता है। राजनीतिक संदर्भों में देखा जाये, तो चुनावी मौसम के दौरान विशेष रूप से भारत जैसे देशों में, मुफ्तखोरी(फ्रीबीज़) राजनीतिक वादों के मूर्त प्रतीक के रूप में काम करती है । गौरतलब है कि 1967 में तमिलनाडु में सी.एन. अन्नादुराई की 1 रुपये में  चावल योजना ऐसी पेशकशों के ऐतिहासिक आकर्षण को उजागर करती है। हालांकि ये तत्काल चुनावी परिणाम तो दे सकते हैं, लेकिन दीर्घावधि में महत्वपूर्ण रूप से दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव दिखाई देते हैं।   

 मुख्य विषयवस्तु:

अल्पकालिक राजनीतिक लाभ:

  • मतदाता से जुड़ाव: मुफ्त टीवी या ग्राइंडर जैसे ठोस लाभों का आकर्षण मतदान प्रतिशत को बढ़ा सकता है, जैसा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में देखा गया है।
  • लोकलुभावन छवि निर्माण: मुफ्त उपहारों के माध्यम से, राजनीतिक संस्थाएं एक ऐसी पार्टी या नेता की छवि बना सकती हैं जो जमीनी स्तर के संपर्क में अपने आप को दिखाती हैं और जनता की परवाह करती हैं।
  • संवैधानिक प्रतिबद्धता: पीडीएस और मनरेगा जैसी फ्रीबीज़ सुनिश्चित करती हैं कि राज्य अपने नागरिकों के प्रति अपने संवैधानिक कर्त्तव्य को पूरा कर रहा है।
  • आर्थिक राहत: आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए, ये रियायतें गरीबी की तात्कालिक चुनौतियों से राहत दे सकती हैं।

दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ:

  • राजकोषीय स्वास्थ्य पर दबाव: कृषि ऋण माफी जैसी योजनाएं राज्य के वित्तीय अनुशासन को अस्थिर कर सकती हैं और बैंकिंग संस्थानों को प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, पंजाब में, जहाँ सब्सिडी का बोझ बढ़ने के कारण 2021-22 में ऋण-से-जीडीपी अनुपात बढ़कर 53.3% हो गया।
  • निर्भरता की संस्कृति: मुफ्त चीजों की बार-बार पेशकश निर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा दे सकती है, जिससे आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
  • संसाधनों का गलत आवंटन: आवश्यक दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अल्पकालिक चुनावी लाभ का प्रभाव पड़ सकता है। मुफ़्त चीज़ों का कभी न ख़त्म होने वाला चक्र देखा जाता है क्योंकि लोकलुभावन उपायों का मुकाबला अक्सर और भी अधिक लोकलुभावन योजनाओं से किया जाता है।
  • अस्थिर उपभोग: मुफ्त बिजली जैसे लाभ उन क्षेत्रों में बर्बादी को बढ़ावा दे सकते हैं जो टिकाऊ उपभोग की माँग करते हैं।
  • वित्तीय अस्थिरता: रणनीतिक राजस्व सृजन के बिना, लगातार मुफ्त वितरण वित्तीय तनाव का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश ने अपने 22,000 करोड़ के बजट का लगभग 13% केवल ब्याज भुगतान के लिए आवंटित किया।
  • बढ़ती सामाजिक असमानताएँ: मुफ्त वस्तुओं का वितरण कभी-कभी सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में, जहाँ पुरानी पेंशन योजना पर वापस जाने के निर्णय के बाद, केवल 6% आबादी को लाभ मिला, जो कुल पेंशन और वेतन व्यय का 56% था। 
  • भ्रष्टाचार और अक्षमता: वितरण तंत्र, जो अक्सर बिचौलियों से भरा होता है, भ्रष्टाचार का केंद्र बन सकता है।

निष्कर्ष

हालांकि फ्रीबीज़ तत्काल राजनीतिक ध्यान आकर्षित कर सकती हैं और अल्पकालिक लाभ दिला सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव अपेक्षा के अनुरूप नहीं होते हैं। फ्रीबीज़ के बजाय राजनीतिक दलों का जोर क्षणिक तुष्टिकरण से हटकर धीरे धीरे सशक्तिकरण, राजकोषीय उत्तरदायित्व और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर होना चाहिए। इस प्रकार राष्ट्र-निर्माण की व्यापक दृष्टि के साथ तात्कालिक चुनावी लाभ को संतुलित करने के लिए व्यावहारिक नेतृत्व की आवश्यकता है।

Politics of Freebies may yield political results in the short term but it will lead to a great social and economic price in the long term. Comment. in hindi

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