UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. साइबर खतरों का प्रणालीगत कमजोरियों' से 'मानवीय कमजोरियों' की ओर बढ़ना डिजिटल धोखाधड़ी में एक नए चरण का संकेत है। धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर RBI के हालिया दिशानिर्देशों के आलोक में, कमजोर ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नियामक ढाँचे की पर्याप्तता का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 30, 2026

GS Paper IIICyber Security

प्रश्न की मुख्य माँग 

  • धोखाधड़ी से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन (EBTs) पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नियामकीय ढाँचा।
  • वर्तमान ढाँचे की पर्याप्तता में विद्यमान कमियाँ एवं संरचनात्मक सीमाएँ।
  • आगे की राह।

उत्तर

परिचय

भारत में साइबर धोखाधड़ी तेजी से तकनीकी सुरक्षा उल्लंघनों से हटकर सोशल इंजीनियरिंग आधारित हेर-फेर की ओर स्थानांतरित हो रही है, जिसमें मानवीय विश्वास, दबाव एवं डिजिटल निरक्षरता का दुरुपयोग किया जाता है। ऐसे में RBI का संशोधित ढाँचा (2026), जो इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन (EBTs) में धोखाधड़ी से निपटने के लिए बनाया गया है, इस परिवर्तन को संबोधित करने का प्रयास करता है, लेकिन धोखाधड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती जटिलता के कारण इसकी पर्याप्तता पर प्रश्नचिह्न बना हुआ है।

IAS coaching

RBI के नियामकीय ढाँचे की प्रमुख विशेषताएँ (संरक्षणात्मक ढाँचा) 

  • धोखाधड़ी की विस्तारित परिभाषा: RBI ने अब दबाव-आधारित लेन-देन को भी धोखाधड़ी की परिभाषा में शामिल किया है, जिसमें OTP चोरी, “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम और दबाव में कराए गए ट्रांजैक्शन शामिल हैं।
    • उदाहरण: अपराधी स्वयं को कानून प्रवर्तन एजेंसी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर UPI से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
  • आंशिक दायित्व हस्तांतरण एवं मुआवजा प्रणाली: ₹50,000 तक के नुकसान पर पात्र पीड़ितों को अधिकतम ₹25,000 तक की 85% प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रदान की जाती है।
    • उदाहरण: छोटे मूल्य के UPI धोखाधड़ी मामलों में पीड़ित बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के आंशिक क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।
  • मजबूत रिपोर्टिंग एवं शिकायत समयसीमा: धोखाधड़ी की अनिवार्य रिपोर्टिंग 5 दिनों के भीतर साइबरक्राइम हेल्पलाइन (1930) के माध्यम से करना आवश्यक है।
    • उदाहरण: त्वरित रिपोर्टिंग से संदिग्ध UPI-लिंक्ड खातों को शीघ्र फ्रीज किया जा सकता है।
  • लापरवाही एवं तृतीय-पक्ष उल्लंघनों पर दायित्व: बैंक अब अलर्ट सिस्टम या सत्यापन प्रक्रिया में विफलता के लिए उत्तरदायी होंगे।
    • उदाहरण: पंजीकृत मोबाइल/ईमेल अपडेट न करने से यदि धोखाधड़ी अलर्ट मिस होता है, तो इसे साझा दायित्व के अंतर्गत माना जाएगा।

कमजोर उपभोक्ताओं की सुरक्षा में पर्याप्तता संबंधी अंतराल

  • उच्च-धोखाधड़ी वातावरण में ग्राहक सतर्कता पर अत्यधिक निर्भरता: वर्तमान ढाँचा “लापरवाही” जैसे कारकों—चेतावनियों को नजरअंदाज करना या देर से रिपोर्ट करना—के आधार पर उपभोक्ताओं पर दायित्व डालता है।
    • उदाहरण: बुजुर्ग उपयोगकर्ता जो फर्जी KYC या “पुलिस कॉल” स्कैम के लगातार शिकार होते हैं, जिससे वे समयसीमा अनुपालन में विफल हो सकते हैं।
  • उच्च-मूल्य धोखाधड़ी का सीमित कवरेज: ₹50,000 से अधिक के नुकसान पर पूर्ण मुआवजा सुरक्षा उपलब्ध नहीं है, जिससे बड़े वित्तीय नुकसान का जोखिम बना रहता है।
    • उदाहरण: बड़े पैमाने पर फिशिंग या अकाउंट टेकओवर मामलों में पर्याप्त राहत नहीं मिलती।
  • पीड़ितों पर उच्च प्रमाणिक एवं प्रक्रियात्मक बोझ: सख्त रिपोर्टिंग समय सीमा और दस्तावेजी आवश्यकताएँ डिजिटल रूप से कमजोर उपयोगकर्ताओं के लिए बाधा बनती हैं।
  • प्रोएक्टिव फ्रॉड प्रिवेंशन में संस्थागत अंतराल: यह फ्रेमवर्क अधिकतर घटना के बाद मुआवजा (ex-post compensation) पर आधारित है, जबकि रोकथाम (Ex-ante prevention) पर कम ध्यान देता है।
    • उदाहरण: रियल-टाइम एआई-आधारित ट्रांजैक्शन ब्लॉकिंग सभी बैंकों में समान रूप से अनिवार्य नहीं है।

मानव-केंद्रित साइबर धोखाधड़ी से निपटने में विद्यमान संरचनात्मक सीमाएँ

  • सोशल इंजीनियरिंग का नियामक ढाँचों से तीव्र अनुकूलन: धोखाधड़ी करने वाले तंत्र नियामक और अनुपालन ढाँचों की तुलना में अधिक तेजी से अपने तरीकों को बदलते हैं।
    • उदाहरण: बैंक अधिकारियों या रिश्तेदारों की आवाज की नकल करने वाले डीपफेक वॉइस स्कैम (Deepfake Voice Scams)।
  • ग्राहकों के मध्य डिजिटल साक्षरता का असमान स्तर: कमजोर वर्गों जैसे बुजुर्ग एवं ग्रामीण उपयोगकर्ता इन धोखाधड़ियों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
    • उदाहरण: RBI की बार-बार चेतावनियों के बावजूद OTP साझा करने वाले स्कैम जारी रहते हैं।
  • संस्थागत समन्वय का अभाव: बैंकों, दूरसंचार कंपनियों और साइबर अपराध इकाइयों के बीच सीमित एकीकरण मौजूद है।
    • उदाहरण: म्यूल अकाउंट्स (mule accounts) को फ्रीज करने में देरी होने से धन की रिकवरी दर कम हो जाती है।

आगे की राह

  • मुआवजा-आधारित से रोकथाम-केंद्रित ढाँचे की ओर परिवर्तन: सभी बैंकों एवं भुगतान गेटवे में AI/ML आधारित रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को अनिवार्य किया जाए, ताकि धोखाधड़ी को पहले ही रोका जा सके।
  • बिना अतिरिक्त बोझ के दायित्व निर्धारण: बुजुर्ग, ग्रामीण एवं कम डिजिटल साक्षरता वाले उपयोगकर्ताओं के लिए विभेदित सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, जिसमें अनुपालन शर्तें सरल हों।
    • उदाहरण: पहली बार डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार उपयोगकर्ताओं को निर्धारित सीमा तक बिना कठोर रिपोर्टिंग समयसीमा के स्वचालित प्रतिपूर्ति की जाए।
  • एकीकृत साइबर फ्रॉड कमांड संरचना: RBI, CERT-In, बैंक, दूरसंचार कंपनियों और साइबर अपराध इकाइयों के मध्य समन्वित एवं केंद्रीकृत प्रणाली स्थापित की जाए।
  • अनिवार्य डिजिटल साक्षरता एवं व्यवहारगत प्रोत्साहन: बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान तथा इन-ऐप चेतावनी प्रणालियों का पुनःडिजाइन किया जाए ताकि उपयोगकर्ता निर्णय-प्रक्रिया में सुधार हो।
    • उदाहरण: UPI ऐप्स में अज्ञात लाभार्थियों के लिए उच्च-जोखिम लेन-देन से पूर्व “फोर्स्ड पॉज स्क्रीन” लागू करना।
  • मध्यस्थों की जवाबदेही को सुदृढ़ बनाना: बैंक एवं फिनटेक संस्थानों पर ऐसा दंडात्मक ढाँचा लागू किया जाए, जो फ्रॉड अलर्ट सिस्टम या KYC अपडेट में विफलता पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

Click to Know UPSC Coaching Centres in India

निष्कर्ष

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का यह ढाँचा प्रणाली-सुरक्षा से आगे बढ़कर मानव-जोखिम की पहचान की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन यह अभी भी मुख्यतः प्रतिक्रियात्मक प्रकृति का है। एक अधिक सुदृढ़ और प्रभावी दृष्टिकोण के लिए रियल-टाइम फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम, मजबूत अंतर-संस्थागत समन्वय तथा कमजोर उपभोक्ताओं हेतु विभेदित एवं लक्षित सुरक्षा आवश्यक है, ताकि वित्तीय समावेशन डिजिटल शोषण (Digital exploitation) में परिवर्तित न हो।

Check Out UPSC CSE Books

Visit PW Store
online store 1

The transition of cyber threats from ‘system vulnerabilities’ to ‘human vulnerabilities’ marks a new phase in digital frauds. In light of RBI’s recent guidelines on Fraudulent Electronic Banking Transactions, analyze the adequacy of the regulatory framework in protecting vulnerable customers. in hindi

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.