प्रश्न की मुख्य माँग
- कथन के पक्ष में तर्क दीजिए।
- कथन के विरोध में तर्क दीजिए।
- आगे की राह सुझाइए।
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उत्तर
भारत के चार नए श्रम संहिताएँ अनुपालन को सरल बनाने और निवेश माहौल को बेहतर करने का प्रयास करती हैं, लेकिन नोएडा में हालिया फैक्टरी विरोध और छत्तीसगढ़ के वेदांता संयंत्र की त्रासदी कार्यस्थल सुरक्षा और श्रमिक संरक्षण के कमजोर होने को लेकर गंभीर चिंताएँ उजागर करते हैं।
कथन के पक्ष में तर्क
- वेतन असुरक्षा: श्रम सुधार पर्याप्त न्यूनतम वेतन सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं, जिससे औपचारिक रोजगार के बावजूद श्रमिकों के लिए बुनियादी जीवनयापन कठिन बना रहता है।
- उदाहरण: नोएडा में लगभग 300 कारखानों के हजारों परिधान श्रमिकों ने ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन की माँग को लेकर विरोध किया।
- सुरक्षा में कमी: अनुपालन में ढील और कमजोर निरीक्षण औद्योगिक दुर्घटनाओं और असुरक्षित कार्य स्थितियों को बढ़ा सकते हैं।
- उदाहरण: छत्तीसगढ़ के वेदांता के सिंहितराई तापीय संयंत्र में पाइप फटने से 20 श्रमिकों की मृत्यु हुई और 15 घायल हुए।
- निरीक्षण की कमजोरी: नियमित निरीक्षणों के स्थान पर स्व-प्रमाणीकरण पर जोर देने से श्रम और सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन कम हो सकता है।
- उदाहरण: व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता वेब-आधारित निरीक्षण और नियोक्ता-आधारित अनुपालन तंत्र को प्रोत्साहित करती है।
- नियुक्ति-छँटनी में लचीलापन: छँटनी के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की सीमा बढ़ने से श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
- उदाहरण: औद्योगिक संबंध संहिता में छँटनी के लिए अनुमति की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दी गई है।
- यूनियन पर प्रतिबंध: हड़ताल के लिए कड़े प्रावधान सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को घटाते हैं और शोषण के विरुद्ध विरोध की क्षमता को कमजोर करते हैं।
- उदाहरण: औद्योगिक संबंध संहिता कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों में हड़ताल से पहले पूर्व सूचना अनिवार्य करती है।
कथन के विरोध में तर्क
- कानूनी सरलीकरण: पहले 29 बिखरे हुए श्रम कानूनों के कारण भ्रम की स्थिति थी; उनका समेकन नियोक्ताओं और श्रमिकों दोनों के लिए स्पष्टता और अनुपालन को आसान बनाता है।
- उदाहरण: श्रम संहिताएँ 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर चार व्यापक संहिताओं में परिवर्तित करती हैं।
- सार्वभौमिक कवरेज: नई संहिताएँ सामाजिक सुरक्षा को गिग श्रमिकों, प्लेटफॉर्म श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र तक विस्तारित करती हैं।
- उदाहरण: सामाजिक सुरक्षा संहिता में ऐप-आधारित डिलीवरी कर्मियों जैसे गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए प्रावधान शामिल हैं।
- औपचारीकरण को बढ़ावा: सरल अनुपालन व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में आने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे श्रमिकों का पंजीकरण और लाभों तक पहुँच बढ़ती है।
- उदाहरण: श्रम सुविधा पोर्टल एकीकृत अनुपालन और पारदर्शी पंजीकरण को समर्थन देता है।
- डिजिटल पारदर्शिता: ऑनलाइन पंजीकरण और निरीक्षण से ‘इंस्पेक्टर राज’ और मनमानी उत्पीड़न में कमी आती है, साथ ही जवाबदेही बढ़ती है।
- उदाहरण: श्रम संहिताओं के अंतर्गत वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली विवेकाधीन भ्रष्टाचार को कम करने का प्रयास करती है।
- निवेश को समर्थन: लचीले श्रम नियम औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, विनिर्माण निवेश आकर्षित कर सकते हैं और रोजगार सृजन में सहायक हो सकते हैं।
- उदाहरण: श्रम सुधारों को मेक इन इंडिया और उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) जैसी विनिर्माण रणनीतियों से जोड़ा गया है।
आगे की राह
- जीविकोपयोगी वेतन: न्यूनतम वेतन को केवल जीवन-निर्वाह तक सीमित न रखकर महँगाई, क्षेत्रीय लागत और गरिमापूर्ण जीवन स्तर के अनुरूप निर्धारित किया जाना चाहिए।
- मजबूत निरीक्षण: डिजिटल अनुपालन के साथ-साथ स्वतंत्र, नियमित और आकस्मिक सुरक्षा निरीक्षण सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
- श्रमिकों की आवाज: श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन और विवाद समाधान में ट्रेड यूनियनों और श्रमिक प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- उदाहरण: सड़क पर विरोध के बजाय संस्थागत संवाद को सशक्त करना।
- सुरक्षा ऑडिट: बिजली संयंत्रों, खानों और खतरनाक उद्योगों में अनिवार्य तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट लागू किए जाने चाहिए।
- उदाहरण: तापीय संयंत्रों में बाहरी ऑडिट के माध्यम से कारखाना अधिनियम के सिद्धांतों को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
- सामाजिक सुरक्षा: प्रवासी, अनुबंधित और असंगठित श्रमिकों के लिए पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा को पूर्ण रूप से लागू करना आवश्यक है।
- उदाहरण: ई-श्रम पोर्टल को सामाजिक सुरक्षा संहिता के साथ एकीकृत कर सार्वभौमिक श्रमिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
निष्कर्ष
श्रम सुधार का अर्थ श्रमिक गरिमा को अनुपालन दक्षता से प्रतिस्थापित करना नहीं होना चाहिए। सतत् औद्योगिक विकास के लिए उद्यमों का लचीलापन और श्रमिकों के उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल तथा मजबूत सामूहिक संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है, ताकि आर्थिक विकास सामाजिक रूप से न्यायसंगत बना रहे।