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Q. हाल ही में रुपये में आई गिरावट भारत के बाह्य क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। वैश्विक भू-राजनीति, घरेलू आर्थिक संकेतक और नीतिगत प्रतिक्रियाओं सहित विभिन्न कारक भारत की मुद्रा स्थिरता को कैसे प्रभावित करते हैं, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, भारत के बाह्य लचीलेपन को मजबूत करने के उपाय भी सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

December 31, 2024

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • परीक्षण कीजिए कि हाल ही में हुआ रुपये का अवमूल्यन किस प्रकार भारत के बाह्य क्षेत्र की सुभेद्यताओं को उजागर करता है।
  • विश्लेषण कीजिए कि वैश्विक भूराजनीति, घरेलू आर्थिक संकेतक और नीतिगत प्रतिक्रियाएं जैसे विभिन्न कारक भारत की मुद्रा स्थिरता को कैसे प्रभावित करते हैं।
  • भारत की बाह्य प्रत्यास्थता को मजबूत करने के उपाय सुझाइये।

उत्तर

भारतीय रुपये का अवमूल्यन, बाह्य क्षेत्र की सुभेद्यताओं के बीच मुद्रा स्थिरता बनाए रखने की चुनौतियों को रेखांकित करता है। मुद्रा मूल्य में उतार-चढ़ाव वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पूंजी के बहिर्वाह के साथ-साथ राजकोषीय घाटे जैसे घरेलू कारकों से उत्पन्न होता है । भारत की बाह्य प्रत्यास्थता को बढ़ाने और इसकी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए प्रभावी नीतिगत उपाय अति महत्वपूर्ण हैं।

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हाल ही में रुपये में आई गिरावट भारत की बाह्य क्षेत्र की सुभेद्यताओं को उजागर करती है

  • वैश्विक पोर्टफोलियो बहिर्वाह: मूल्यह्रास विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर निर्भरता की भेद्यता को दर्शाता है, जो वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के दौरान कम हो जाती है।
    • उदाहरण के लिए: सितंबर 2024 के स्टॉक पीक के बाद हुये निरंतर बहिर्वाह ने रुपये को कमजोर कर दिया क्योंकि अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की अटकलों के बीच निवेशक, सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश करने लग गए।
  • व्यापार घाटा: उच्च व्यापार घाटा, आयात पर बाहरी निर्भरता को उजागर करता है, विशेष रूप से ऊर्जा के लिए, जो रुपये की कमजोरी के दौरान चालू खाता घाटे को बढ़ाता है। 
    • उदाहरण के लिए: रुपये के मूल्यह्रास के साथ कच्चे तेल के लिए भारत का आयात बिल बढ़ गया, जिससे Q4, 2024 का व्यापार घाटा बढ़ गया, जो $75 बिलियन के करीब पहुंच गया।
  • भू-राजनीतिक जोखिम: टैरिफ की धमकियाँ और BRICS मुद्रा विवाद जैसी वैश्विक घटनाएँ भारत के बाहरी व्यापार और निवेश के लिए अनिश्चितताएँ उत्पन्न करके अस्थिरता को बढ़ाती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: BRICS देशों की मुद्रा योजनाओं के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति की 2024 टैरिफ़ चेतावनी ने बाज़ार में बिकवाली को बढ़ावा दिया, जिससे भारत की बाह्य स्थिरता कमजोर हुई।
  • विदेशी मुद्रा भंडार की सीमाएँ : रुपये को स्थिर करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार पर अत्यधिक निर्भरता, वैश्विक बाजार में निरंतर उथल-पुथल के दौरान दीर्घकालिक मौद्रिक लचीलेपन को सीमित करती है। 
    • उदाहरण के लिए: दिसंबर 2024 में RBI द्वारा हस्तक्षेप करके रुपये को एक ही तिमाही में 20 बिलियन डॉलर से अधिक की कमी करके 85.53 पर वापस लाया गया।
  • नीतिगत चुनौतियाँ: कमजोर रुपया ,घरेलू मौद्रिक नीतियों को प्रतिबंधित करता है, महंगे आयातों के ज़रिए मुद्रास्फीति को बढ़ाता है जबकि विकास संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए राजकोषीय गुंजाइश को कम करता है। 
    • उदाहरण के लिए: दिसंबर 2024 में कच्चे तेल के आयात की लागत 15% बढ़ गई, जिससे नीति निर्माताओं पर मुद्रा प्रबंधन और राजकोषीय विस्तार रणनीतियों को प्रभावी ढंग से संतुलित करने का दबाव पड़ा।

भारत की मुद्रा स्थिरता को प्रभावित करने वाले कारक

वैश्विक भूराजनीति: मुद्रा स्थिरता पर प्रभाव

  • व्यापार नीतियाँ: संरक्षणवादी व्यापार उपाय, जैसे टैरिफ या प्रतिबंध, व्यापार संतुलन को बाधित करके मुद्रा स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं।
  • भू-राजनीतिक तनाव: प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक अस्थिरता या संघर्ष अस्थिरता उत्पन्न करते हैं, जिससे सेफ-हेवेन डॉलर की माँग बढ़ती है और उभरते बाजारों की मुद्राएँ कमजोर होती हैं। 
  • उदाहरण के लिए: रूस -यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव पड़ा और रुपये का मूल्य कम हुआ।
  • वैश्विक मौद्रिक नीतियाँ: उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण भारत से पूंजी का बहिर्वाह होता है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ता है। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2022-23 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी पोर्टफोलियो का बहिर्वाह हुआ, जिससे रुपया कमजोर हुआ।

घरेलू आर्थिक संकेतक: मुद्रा स्थिरता पर प्रभाव

  • व्यापार घाटा: निर्यात की तुलना में अधिक आयात होने के कारण व्यापार घाटा बढ़ने से विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह बढ़ता है, जिससे रुपया कमजोर होता है। 
    • उदाहरण के लिए: कच्चे तेल और सोने के बढ़ते आयात के कारण 2022 में भारत का रिकॉर्ड व्यापार घाटा रुपये के मूल्यह्रास को और बढ़ा देता है।
  • मुद्रास्फीति : उच्च घरेलू मुद्रास्फीति मुद्रा मूल्य को कम करती है, जिससे निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो जाता है और आयात महंगा हो जाता है। 
    • उदाहरण के लिए: कच्चे तेल जैसे आयातों की बढ़ती कीमतों ने भारत के आयात बिलों को बढ़ा दिया, जिससे वर्ष 2023 में रुपये के मूल्य में कमी दर्ज की गई।
  • निवेश के रुझान: घरेलू और विदेशी निवेश में गिरावट कमजोर आर्थिक वृद्धि का संकेत है, जिससे मुद्रा प्रवाह में कमी आ रही है। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2024 में, कॉर्पोरेट प्रदर्शन में कमी और स्टॉक वैल्यूएशन में अत्यधिक वृद्धि के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में कमी आई।

नीतिगत प्रतिक्रियाएँ: मुद्रा स्थिरता पर प्रभाव

  • विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप: मुद्रा को स्थिर करने के लिए केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप विदेशी मुद्रा भंडार द्वारा सीमित हैं और केवल अस्थायी राहत प्रदान कर सकते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: दिसंबर 2024 में RBI के देर से किये गये हस्तक्षेप ने रुपये को अस्थायी रूप से 85.53 प्रति डॉलर पर स्थिर करने में कामयाबी हासिल की।
  • राजकोषीय नीति: राजकोषीय रूप से विवश सरकार बाह्य झटकों को प्रबंधित करने की अपनी क्षमता को कम करती है, जिससे मुद्रा स्थिरता में विश्वास कमजोर होता है। 
    • उदाहरण के लिए: महामारी के दौरान भारत के रिकॉर्ड राजकोषीय घाटे ने बाह्य प्रत्यास्थता को बढ़ावा देने के सरकारी उपायों को सीमित कर दिया।
  • संचार रणनीति: मुद्रा नीतियों पर सरकार का स्पष्ट रुख निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है और अटकलों के प्रभाव को कम करता है। 
    • उदाहरण के लिए: RBI गवर्नर द्वारा वर्ष 2024 में डी-डॉलराइजेशन को खारिज करने से बाजारों में विश्वास स्थापित हुआ, जिससे रुपये के मूल्यह्रास की चिंताएँ अस्थायी रूप से कम हुईं।

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बाह्य प्रत्यास्थता मजबूत करने के उपाय

  • निर्यात को बढ़ावा देना: विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने और व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए मूल्य-वर्धित विनिर्माण और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।
    • उदाहरण के लिए: फार्मास्यूटिकल्स और IT जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने से व्यापार घाटे को कम करने और रुपये को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
  • आयात स्रोतों में विविधता लाना : विविध आपूर्तिकर्ताओं के साथ दीर्घकालिक समझौते करके अस्थिर कच्चे तेल और आवश्यक आयात पर निर्भरता को कम करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: रूस और मध्य पूर्वी देशों से कच्चे तेल के आयात का विस्तार करने से वर्ष 2023 में औसत तेल आयात लागत कम हो गई।
  • विदेशी मुद्रा भंडार का विस्तार करना: प्रभावी मुद्रा स्थिरीकरण के लिए सॉवरेन वेल्थ फंड और सोने के संचय के माध्यम से मजबूत भंडार बनाने चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2021 में RBI के 600 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार ने महामारी के दौरान अस्थिरता को प्रबंधित करने में मदद की।
  • स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना : स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए समझौते करना, अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना और विनिमय दर जोखिम को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: भारत -रूस रुपया-रूबल व्यापार तंत्र ने रूस-यूक्रेन संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम किया।
  • बाहरी ऋण प्रबंधन को बढ़ावा देना : मुद्रा जोखिमों से बचने के लिए अल्पकालिक बाहरी ऋण को कम करते हुए कम लागत और लंबी अवधि के उधार को प्राथमिकता देना चाहिए ।
    • उदाहरण के लिए: भारत द्वारा सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी करने में हुई वृद्धि ने वर्ष 2023 में पुनर्भुगतान अस्थिरता को कम करने के साथ स्थिर विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद की।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती के लिए एक सशक्त बाह्य क्षेत्र अति महत्त्वपूर्ण है। निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर, विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति सुनिश्चित करके , विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाकर और रुपये में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर, भारत मुद्रा की अस्थिरता को कम कर सकता है। संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक आर्थिक एकीकरण पर बल देने वाली एक दूरदर्शी रणनीति दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी।

The recent rupee depreciation highlights India’s external sector vulnerabilities. Critically analyze how various factors, including global geopolitics, domestic economic indicators, and policy responses, affect India’s currency stability. Also, suggest measures to strengthen India’s external resilience. in hindi

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