प्रश्न की मुख्य माँग
- चर्चा कीजिए कि सूचना का अधिकार अधिनियम किस प्रकार शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में एक ऐतिहासिक कानून रहा है।
- भारतीय प्रशासन पर RTI के सकारात्मक प्रभावों का परीक्षण कीजिए।
- भारतीय प्रशासन में RTI के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।
- RTI की प्रभावशीलता को मजबूत करने के उपाय सुझाइये।
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उत्तर
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005, शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से पारित किया एक परिवर्तनकारी कानून था । पिछले कुछ वर्षों में, इस अधिनियम के माध्यम से शासन प्रक्रिया में नागरिकों की सहभागिता को सुगम बनाया गया है। एक आंकड़े के अनुसार देश में सालाना लगभग 6 मिलियन RTI आवेदन दायर किये जाते हैं। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, 4 लाख से अधिक RTI अपील और शिकायतें लंबित हैं, जो भारतीय लोकतंत्र पर इसके महत्त्वपूर्ण प्रभाव के बावजूद इसके प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों को उजागर करती हैं।
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RTI, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाता है।
- नागरिकों को सशक्त बनाना: RTI, नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड और निर्णयों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे प्रशासन अधिक जवाबदेह बनता है।
- उदाहरण के लिए: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक वर्ष 6 मिलियन से अधिक RTI आवेदन दायर किए जाते हैं, जिससे शासन में बढ़ती हुई नागरिक भागीदारी का प्रमाण मिलता है।
- भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: RTI ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के कई मामलों का पर्दाफाश किया है।
- सरकारी प्रतिक्रियात्मकता में वृद्धि: यह अधिनियम सार्वजनिक प्राधिकारियों को नागरिकों के प्रश्नों का उत्तर 30 दिनों के भीतर देने के लिए बाध्य करता है, जिससे प्रशासन की प्रतिक्रियात्मकता बढ़ जाती है।
- सुशासन को बढ़ावा देना: RTI यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक, निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग ले सकें, जिससे शासन मजबूत हो।
- कुप्रबंधन पर अंकुश: इसने सरकारों को बेहतर रिकॉर्ड रखने की पद्धति अपनाने के लिए मजबूर किया है, जिससे प्रशासनिक कुप्रबंधन पर अंकुश लगा है।
भारतीय प्रशासन पर RTI के सकारात्मक प्रभाव
- अधिकारियों की जवाबदेही में बढ़ोतत्तरी: RTI अधिनियम,अधिकारियों को उनके द्वारा लिये गये निर्णयों का कारण बताने हेतु बाध्य करता है, जिससे उनके कार्य अधिक पारदर्शी हो जाते हैं।
- उदाहरण के लिए: बार-बार आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवालों के द्वारा जब पंजाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कुप्रबंधन का खुलासा हुआ तो पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बढ़ा दी।
- सार्वजनिक सेवा वितरण को सुव्यवस्थित करना: RTI प्रश्नों के डर के कारण सार्वजनिक विभाग अधिक दक्ष हो गए हैं।
- उदाहरण के लिए: RTI आवेदनों द्वारा लाई गई पारदर्शिता के परिणामस्वरुप सामाजिक कल्याण योजनाओं जैसे कि मनरेगा में बेहतर निधि आवंटन हुआ है।
- संस्थागत सुधार: RTI के कारण समय पर सूचना का प्रसार सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों में सुधार हुए हैं।
- सत्ता के दुरुपयोग के विरुद्ध निवारण: इस अधिनियम ने सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा स्वच्छंद रुप से निर्णय लेने पर रोक लगाने का कार्य किया है।
- नीतिगत सुधारों को सुविधाजनक बनाना: सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों द्वारा, सरकारी नीतियों में सुधारों की वकालत करने के लिए RTI डेटा का उपयोग किया गया है।
RTI के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- कम जन जागरूकता: भारत की ग्रामीण आबादी का एक बड़ा भाग RTI के अंतर्गत उसे प्राप्त अधिकारों से अनभिज्ञ है।
- उदाहरण के लिए: PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के एक सर्वेक्षण के अनुसार , राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में RTI के संबंध में केवल 18% जागरूकता है।
- RTI कार्यकर्ताओं को खतरा: भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कई RTI कार्यकर्ताओं को धमकी, उत्पीड़न या यहाँ तक कि मौत का सामना करना पड़ता है।
- उदाहरण के लिए: इस अधिनियम की शुरुआत से अब तक लगभग 100 RTI कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जो पारदर्शिता चाहने वालों के लिए बढ़ते खतरे को दर्शाता है।
- सूचना आयोगों में रिक्तियाँ: देश भर में कई सूचना आयोगों के विभिन्न पद रिक्त पड़े हैं, जिसके कारण लंबित मामलों की संख्या अधिक हो गई है।
- उदाहरण के लिए: वर्ष 2024 तक, झारखंड का सूचना आयोग चार वर्ष से निष्क्रिय था, जिससे 4 लाख से अधिक मामले लंबित हो गये।
- सूचना प्रकटीकरण में विलंब: सरकारी विभाग अक्सर RTI प्रश्नों का समय पर जवाब देने में विफल रहते हैं, जिससे अधिनियम का उद्देश्य कमजोर होता है।
- प्रतिगामी संशोधन: हालिया संशोधनों ने सरकार को सूचना आयुक्तों के वेतन और कार्यकाल को निर्धारित करने की शक्ति प्रदान कर दी है, जिससे उनकी स्वायत्तता ख़तरे में पड़ गई है।
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RTI की प्रभावशीलता को मजबूत करने के उपाय
- जन जागरूकता बढ़ाना: RTI के तहत लोगों को प्राप्त अधिकारों के संबंध में उन्हें शिक्षित करने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, व्यापक अभियान चलाने चाहिए।
- उदाहरण के लिए: RTI मंच एक ऐसा संगठन है, जिसका उद्देश्य राजस्थान में RTI से संबंधित जागरूकता और इसके उपयोग को बढ़ाना है।
- सूचना आयोगों को मजबूत बनाना: मामलों का समय पर निपटान करने के लिए सूचना आयोगों को पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराना चाहिए।
- RTI कार्यकर्ताओं की सुरक्षा: व्हिसलब्लोअर्स और RTI कार्यकर्ताओं के जीवन और अधिकारों की सुरक्षा हेतु उनके लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा लागू करनी चाहिए ।
- उदाहरण के लिए: 2014 के व्हिसलब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है ताकि खतरों का सामना करने वालों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
- डिजिटल RTI प्लेटफॉर्म का विस्तार करना: लोगों को आसानी से RTI आवेदन दायर करने में सक्षम बनाने और प्रश्नों के उत्तर में होने वाली देरी को कम करने के लिए ऑनलाइन RTI फाइलिंग प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार: सूचना की शीघ्र प्राप्ति सुनिश्चित करने और प्रशासनिक विलम्ब को कम करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना चाहिये।
RTI अधिनियम, 2005, नागरिक सशक्तिकरण और सुशासन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बना हुआ है, परंतु इसे लागू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जागरूकता, कार्यकर्ता सुरक्षा और सूचना आयोग की दक्षता से संबंधित मुद्दों को संबोधित करके, अधिनियम की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है। RTI को मजबूत करने से एक अधिक पारदर्शी और जवाबदेह भारतीय प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा, जो एक जीवंत लोकतंत्र के लिए अति महत्त्वपूर्ण है।
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