Q. “सर्वोत्तम राजनीति सही कर्म है।” नैतिक नेतृत्व के संदर्भ में इस कथन का क्या अर्थ है? बढ़ते वैश्विक संघर्षों और संकटों के बीच, चर्चा कीजिए कि महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों से प्रेरित नैतिक रूप से आधारित नेतृत्व की दुनिया को आवश्यकता क्यों है। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • नैतिक नेतृत्व के संदर्भ में महत्व की चर्चा कीजिए। 
  • वैश्विक संघर्षों और संकटों के मध्य नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

भू-राजनीतिक तनाव, ध्रुवीकृत राजनीति और घटते जनविश्वास से युक्त इस युग में, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक शांति को बनाए रखने के लिए नैतिक नेतृत्व आवश्यक हो जाता है। महात्मा गांधी का यह विचार कि “सर्वोत्तम राजनीति सही कर्म है” सार्वजनिक जीवन और शासन में नैतिक आचरण की केंद्रीयता को उजागर करता है।

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नैतिक नेतृत्व के संदर्भ में महत्त्व

  • नैतिक अखंडता की प्रधानता: नैतिक नेतृत्व में निर्णय न्याय और अंतरात्मा के आधार पर लिए जाते हैं, न कि संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए।
    • उदाहरण: महात्मा गांधी का स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा के प्रति समर्पण।
  • जवाबदेही और जनविश्वास: उचित और नैतिक आचरण पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देता है, जिससे संस्थाओं में नागरिकों का विश्वास में वृद्धि होती है।
    • उदाहरण: लाल बहादुर शास्त्री द्वारा अरियालूर रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री पद से त्याग-पत्र देना।
  • सिद्धांतों के प्रति समर्पण: नैतिक राजनीति में अन्याय का विरोध करने का साहस आवश्यक होता है, भले ही वह राजनीतिक रूप से जटिल हो।
    • उदाहरण: आपातकाल के दौरान भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल सिंह द्वारा असहमति रखने वालों की सहायता करना।
  • राजनीति को सेवा के रूप में देखना: उचित आचरण राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानता है।
    • उदाहरण: महात्मा गांधी द्वारा हरिजन उत्थान आंदोलन जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • सार्वजनिक आचरण में नैतिक मानक: नैतिक आदर्श नेता अपने आचरण से यह सुनिश्चित करते हैं कि राजनीतिक निर्णय उच्च नैतिक मूल्यों के अनुरूप हों।
    • उदाहरण: डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वारा प्राप्त उपहारों को सरकारी कोष में जमा कराना।

वैश्विक संघर्षों और संकटों के दौर में नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता

  • संघर्षों की तीव्रता को घटाना: नैतिक नेतृत्व प्रतिशोध के बजाय संवाद और शांति को प्राथमिकता देता है, जिससे संघर्ष बढ़ने से रोका जा सकता है।
    • उदाहरण: क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान जॉन एफ. केनेडी और निकिता ख्रुश्चेव के मध्य गुप्त कूटनीति ने परमाणु युद्ध को टालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • मानव-केंद्रित निर्णय-निर्माण: नैतिक नेतृत्व भूराजनीतिक लाभ से अधिक मानवीय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • उदाहरण: जेसिंडा आर्डर्न ने क्राइस्टचर्च हमलों के बाद संवेदनशीलता, पीड़ितों के सम्मान और त्वरित हथियार सुधारों को प्राथमिकता दी।
  • वैश्विक विश्वास और सहयोग: नैतिक नेतृत्व विश्वसनीयता और भरोसा स्थापित करता है, जो कूटनीतिक समाधान के लिए आवश्यक है।
    • उदाहरण: भारत का वैश्विक मंचों, जैसे संयुक्त राष्ट्र, में संवाद और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर।
  • दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान: नैतिक नेतृत्व भविष्य की पीढ़ियों के प्रति न्याय और उत्तरदायित्व को ध्यान में रखता है, विशेषकर जलवायु परिवर्तन और युद्ध जैसे मुद्दों में।
    • उदाहरण: पेरिस समझौते के तहत देशों द्वारा उत्सर्जन में कमी के लिए प्रतिबद्धताएँ।
  • उत्तरदायित्वपूर्ण नागरिकता को प्रेरित करना: नैतिक नेता नागरिकों को न्याय, समानता और सामूहिक हित को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं।
    • उदाहरण: महात्मा गांधी का नमक सत्याग्रह, जिसने लोगों को नैतिक अपील के माध्यम से संगठित किया।

निष्कर्ष

सही आचरण पर आधारित नैतिक नेतृत्व लोकतांत्रिक वैधता और वैश्विक स्थिरता को सुदृढ़ करता है। गांधीवादी मूल्यों- नैतिक साहस, सेवा और अहिंसा का पुनर्स्मरण राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदार और मानवीय शासन की दिशा में मार्गदर्शन दे सकता है, जिससे शक्ति का उपयोग संघर्ष बढ़ाने के बजाय मानव कल्याण के लिए सुनिश्चित किया जा सके, विशेषकर एक संवेदनशील और अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में।

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