UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. भारत में सड़क दुर्घटनाएँ केवल व्यक्तिगत लापरवाही के बजाय एक रोकी जा सकने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य और शासन की विफलता को दर्शाती हैं। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

July 14, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • सड़क दुर्घटनाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शासन की प्रणालीगत विफलता के रूप में स्पष्ट कीजिए।
  • भारत के सड़क सुरक्षा संकट के पीछे विद्यमान संरचनात्मक कारण।
  • आवश्यक उपाय।

उत्तर

परिचय

भारत विश्व में सड़क दुर्घटनाओं के सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2024 में 1.77 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई। यद्यपि विभिन्न आधिकारिक आँकड़ों में (1.75 लाख से 1.81 लाख मृत्यु) कुछ असंगतियाँ परिलक्षित होती हैं, किंतु व्यापक तथ्य स्पष्ट है कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली अधिकांश मौतें केवल व्यक्तिगत त्रुटियों का परिणाम नहीं हैं, बल्कि अवसंरचना, कानून प्रवर्तन तथा शासन की विफलताओं से उत्पन्न होने वाले रोकथाम योग्य परिणाम हैं।

Best Online Coaching for UPSC

सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शासन की विफलता के रूप में सड़क दुर्घटनाएँ

  • असुरक्षित सड़क अवसंरचना: दोषपूर्ण इंजीनियरिंग, अपर्याप्त रखरखाव तथा असुरक्षित सड़क डिजाइन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
    • उदाहरण: एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ (2014) में सर्वोच्च न्यायालय ने राजमार्गों के डिजाइन तथा रखरखाव के लिए अपर्याप्त वित्तपोषण की कमियों को रेखांकित किया था।
  • यातायात नियमों का कमजोर प्रवर्तन: कानून उपलब्ध होने के बावजूद उनका असंगत क्रियान्वयन निवारक प्रभाव को कम कर देता है।
    • उदाहरण: मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद अत्यधिक गति, नशे में वाहन चलाना तथा हेलमेट संबंधी नियमों के उल्लंघन जैसी समस्याएँ निरंतर बनी हुई हैं।
  • अपर्याप्त आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली: चिकित्सीय सहायता में विलंब से बचाई जा सकने वाली गंभीर चोटें भी मृत्यु का कारण बन जाती हैं।
    • उदाहरण: उच्चतम न्यायालय ने एंबुलेंसों, ट्रॉमा सेंटरों की कमी तथा पुलिस अधिकार-क्षेत्रों के मध्य समन्वय की विफलताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
  • विखंडित संस्थागत उत्तरदायित्व: अनेक मंत्रालयों एवं सरकार के विभिन्न स्तरों के मध्य उत्तरदायित्व विभाजित होने के कारण स्पष्ट जवाबदेही का अभाव रहता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय राजमार्ग केंद्र सरकार के अधीन, पुलिस व्यवस्था राज्यों के अधीन तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुख्यतः राज्यों के अधीन होने से समन्वय संबंधी अंतराल उत्पन्न होते हैं।

सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय

  • इंजीनियरिंग-आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना: दोषरहित सड़क डिजाइन, दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट्स) का सुधार तथा वैज्ञानिक सुरक्षा ऑडिट को अपनाया जाए।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा दुर्घटना-प्रवण मार्गों की पहचान एवं सुधार संबंधी पहल।
  • प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करना: प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी एवं अधिक कठोर अनुपालन प्रणाली विकसित की जाए।
    • उदाहरण: स्वचालित गति कैमरे तथा ई-चालान प्रणाली मैनुअल प्रवर्तन पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
  • सुदृढ़ ट्रॉमा देखभाल अवसंरचना का निर्माण: राजमार्गों के निकट एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नेटवर्क विकसित किए जाएँ।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय स्वास्थ्य अवसंरचना योजना के अंतर्गत ट्रॉमा सेंटरों का विस्तार रोकथाम योग्य मृत्यु को कम कर सकता है।
  • व्यवहार परिवर्तन एवं सड़क सुरक्षा शिक्षा को बढ़ावा देना: सुरक्षित वाहन संचालन के संबंध में सतत् जन-जागरूकता विकसित की जाए।
    • उदाहरण: विद्यालय स्तर पर सड़क सुरक्षा शिक्षा दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित कर सकती है।

दीर्घकालिक सड़क सुरक्षा हेतु संस्थागत सुधार

  • समन्वित राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा ढाँचे का निर्माण: योजना निर्माण एवं जवाबदेही के लिए केंद्र-राज्य स्तर पर एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए।
    • उदाहरण: GST परिषद की तर्ज पर सड़क सुरक्षा समन्वय परिषद का गठन कर राज्यों के मध्य मानकों का सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।
  • जिला-स्तरीय जवाबदेही को सुदृढ़ करना: स्थानीय निकायों को दुर्घटना प्रतिरूपों की निगरानी एवं समाधान लागू करने के लिए सशक्त बनाया जाए।
    • उदाहरण: वैधानिक जिला सड़क सुरक्षा समितियाँ स्थानीय स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित कर सकती हैं।
  • दुर्घटना संबंधी आँकड़ा प्रणाली में सुधार: साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के लिए एकीकृत डेटाबेस विकसित किया जाए।
    • उदाहरण: पुलिस, स्वास्थ्य एवं परिवहन संबंधी डेटाबेस के एकीकरण से दुर्घटना रिपोर्टिंग में विद्यमान असंगतियों का समाधान किया जा सकता है।

Click to Know UPSC Coaching Centres in India

निष्कर्ष

सड़क दुर्घटनाएँ अपरिहार्य त्रासदियाँ नहीं, बल्कि शासन तंत्र की विफलता का द्योतक हैं। इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा तथा आपातकालीन देखभाल पर आधारित 4Es दृष्टिकोण, साथ ही केंद्र-राज्य के मध्य सुदृढ़ समन्वय, अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार की संवैधानिक गारंटी को प्रभावी रूप से सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

Check Out UPSC CSE Books

Visit PW Store
online store 1

Road accidents in India represent a preventable public health and governance failure rather than merely individual negligence. Discuss the measures required to ensure road safety. in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.