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Q. सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से भारतीय बीमा क्षेत्र में क्रांति लाना है। बीमा का आधार बढ़ाने के संदर्भ में इसके संभावित प्रभाव और अनसुलझे चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

December 15, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • विधेयक के प्रमुख प्रावधान
  • बीमा कवरेज पर प्रभाव
  • अभी तक अनसुलझी चुनौतियाँ
  • आगे की राह 

उत्तर

सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 बीमा अधिनियम, 1938, बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 तथा जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 में संशोधन कर भारत के बीमा ढाँचे में व्यापक सुधार का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य बीमा प्रसार बढ़ाना, वैश्विक पूँजी आकर्षित करना तथा विनियामक निगरानी को सुदृढ़ करना है।

मुख्य प्रावधान

  • 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा: बीमा कंपनियों में पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति, जिससे दीर्घकालिक पूँजी, उन्नत प्रौद्योगिकी और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ आकर्षित हों।
    • उदाहरण: मंत्रिमंडल द्वारा विदेशी निवेश सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने की स्वीकृति।
  • बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण की सशक्त भूमिका: उत्पाद अनुमोदन, अनुपालन प्रवर्तन, पॉलिसीधारक संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु अधिक अधिकार।
  • जीवन बीमा निगम की स्वायत्तता: विस्तार, निवेश और शासन से संबंधित निर्णयों में अधिक परिचालन स्वतंत्रता, बार-बार सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता समाप्त होती है।
  • व्यवसाय सुगमता में सुधार: यह बीमा कंपनियों के लिए दक्षता में सुधार करने और नियामक विलंब को कम करने के लिए लाइसेंसिंग, विलय और निकास को सरल बनाता है।

बीमा प्रसार पर प्रभाव

  • पूँजी विस्तार: अधिक विदेशी निवेश से बीमाकर्ताओं की क्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण व अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में विस्तार संभव होगा।
    • उदाहरण: “वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा” विजन के अनुरूप निवेश उदारीकरण।
  • उत्पाद नवाचार: वैश्विक भागीदारी से भारत की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन, वहनीय और अनुकूलित बीमा उत्पादों को बढ़ावा मिलता है।
    • उदाहरण: डिजिटल बीमा और सूक्ष्म बीमा उत्पादों का प्रवेश।
  • विश्वास में वृद्धि: सशक्त विनियमन और त्वरित शिकायत निवारण से उपभोक्ता विश्वास और स्वैच्छिक बीमा अपनाने में वृद्धि हो सकती है।
  • बाजार प्रतिस्पर्द्धा: प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने से प्रीमियम में कमी और सेवा गुणवत्ता में सुधार।
    उदाहरण: नए विदेशी प्रतिभागियों के आने से प्रतिस्पर्द्धी मूल्य निर्धारण संबंधी लाभ।

चुनौतियाँ

  • संयुक्त लाइसेंसिंग का अभाव: जीवन और सामान्य बीमा के लिए एकल लाइसेंस की अनुमति नहीं, जिससे परिचालन दक्षता सीमित रहती है।
  • ग्रामीण जागरूकता की कमी: नियामक सुधारों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा साक्षरता और विश्वास का अभाव बना हुआ है।
  • उच्च प्रवेश बाधाएँ: पूँजी और अनुपालन आवश्यकताएँ छोटे, क्षेत्रीय या विशिष्ट बीमा उपक्रमों के लिए चुनौती बनी रहती हैं।
    • उदाहरण: पूँजी पर्याप्तता मानकों को लेकर चिंताएँ।

आगे की राह 

  • संयुक्त लाइसेंसिंग: एकीकृत लाइसेंस से लागत घटेगी, दक्षता बढ़ेगी और संयुक्त उत्पाद उपलब्ध होंगे।
  • वित्तीय साक्षरता अभियान: लक्षित जागरूकता अभियान ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्र की आबादी के बीच बीमा लाभों की समझ को बेहतर बना सकते हैं।
  • डिजिटल वितरण: बीमा तकनीक प्लेटफार्मों की उपयोग लागत कम करने, पहुँच बढ़ाने और दावों के निपटान की दक्षता में सुधार करने में सहायक हो सकता है।

निष्कर्ष

यह विधेयक भारत के बीमा क्षेत्र में उदारीकरण और सुदृढ़ विनियमन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। तथापि, समावेशी बीमा विकास के लिए संयुक्त लाइसेंसिंग, ग्रामीण पहुँच और वित्तीय साक्षरता जैसे पूरक सुधार आवश्यक हैं, ताकि संरचनात्मक बदलावों को अंतिम व्यक्ति तक वास्तविक बीमा उपलब्धता में बदला जा सके।

“The Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Bill, 2025, aims to revolutionize the Indian insurance sector through significant structural reforms. Critically analyze the key provisions of the Bill, highlighting its potential impact on insurance penetration and the challenges that remain unaddressed.”  in hindi

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