UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को अक्सर सार्वजनिक शिक्षा से राज्य के पीछे हटने के रूप में गलत ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, जबकि यह वास्तव में सामाजिक एकीकरण के लिए एक सोची-समझी संवैधानिक रणनीति है। सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों के आलोक में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

April 29, 2026

GS Paper IISocial Justice

प्रश्न की मुख्य माँग

  • सार्वजनिक शिक्षा से राज्य के पीछे हटने के संकेतक के रूप में धारा 12(1)(c) की आलोचना कीजिए।
  • सामाजिक एकीकरण के लिए एक परिवर्तनकारी संवैधानिक तंत्र के रूप में धारा 12(1)(c) की व्याख्या कीजिए।

उत्तर

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) निजी विद्यालयों में वंचित वर्गों के बच्चों के लिए 25% आरक्षण अनिवार्य करती है। यद्यपि इसे अक्सर सार्वजनिक शिक्षा से राज्य के पीछे हटने के रूप में देखा जाता है, यह समानता और सामाजिक एकीकरण के प्रति एक गहरी संवैधानिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सार्वजनिक शिक्षा से राज्य के पीछे हटने के संकेतक के रूप में धारा 12(1)(c) की आलोचना

  • निजी क्षेत्र पर उत्तरदायित्व का स्थानांतरण: आलोचकों का तर्क है कि वंचित छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने का दायित्व राज्य की सार्वजनिक शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने में असमर्थता या अनिच्छा को दर्शाता है, जिससे प्रभावी रूप से राज्य अपने संवैधानिक दायित्व का हनन कर रहा है।
  • सरकारी विद्यालयों में अपर्याप्त निवेश: ऐसे प्रावधानों पर निरंतर निर्भरता को सार्वजनिक शिक्षा में गुणवत्ता में गिरावट और वित्तीय कमी का संकेत माना जाता है, जिससे यह धारणा मजबूत होती है कि राज्य अपनी प्राथमिक भूमिका से पीछे हट रहा है।
  • शिक्षा प्रणाली में द्वैतवाद: उच्च-स्तरीय निजी विद्यालयों और संसाधन-विहीन सरकारी विद्यालयों का सह-अस्तित्व एक द्विस्तरीय प्रणाली बनाता है, जहाँ धारा 12(1)(c) को व्यापक सुधार के बजाय एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा जाता है।
  • प्रशासनिक और वित्तीय बोझ से जुड़ी समस्याएँ: निजी विद्यालय अक्सर प्रतिपूर्ति में देरी और नियामकीय बोझ को लेकर चिंता जताते हैं, जिससे यह धारणा और मजबूत होती है कि राज्य वित्तीय और परिचालन दोनों जिम्मेदारियों को स्थानांतरित कर रहा है।

सामाजिक एकीकरण के लिए एक परिवर्तनकारी संवैधानिक तंत्र के रूप में धारा 12(1)(c)

  • स्थिति की समानता को व्यवहार में लाना: सर्वोच्च न्यायालय (2026) ने पुष्टि की कि यह प्रावधान विभिन्न पृष्ठभूमियों के बच्चों को साथ पढ़ने का अवसर देता है, जिससे प्रस्तावना में निहित “स्थिति की समानता” की संवैधानिक अवधारणा साकार होती है।
  • साझा सामाजिक स्थानों का निर्माण: अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक वर्गों के बच्चों को एक ही कक्षा में लाकर यह सामाजिक विभाजनों को तोड़ता है और बंधुत्व व पारस्परिक समझ जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देता है।
  • क्षमताओं और सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि: निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच वंचित बच्चों के लिए अवसरों का विस्तार करती है, जिससे ऊर्ध्वगामी गतिशीलता और क्षमता-विकास को बढ़ावा मिलता है, जैसा कि वास्तविक जीवन की सफलताओं से स्पष्ट होता है।
  • दीर्घकालिक सामाजिक समरसता: प्रारंभिक स्तर पर विविधता के संपर्क से सहानुभूति और समावेशिता विकसित होती है, पूर्वाग्रह कम होते हैं और एक अधिक समरस समाज का निर्माण होता है, जो सामाजिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्य के अनुरूप है।

निष्कर्ष

यद्यपि धारा 12(1)(c) सतही रूप से राज्य के पीछे हटने जैसी प्रतीत हो सकती है, लेकिन मूलतः यह सामाजिक एकीकरण के लिए एक परिवर्तनकारी उपकरण का प्रतिनिधित्व करती है। इसकी सफलता, हालाँकि, सार्वजनिक शिक्षा को समानांतर रूप से सुदृढ़ करने पर निर्भर करती है, ताकि समानतापूर्ण और टिकाऊ परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

Section 12(1)(c) of the RTE Act is often mis-constructed as the state’s retreat from public education, whereas it is actually a deliberate constitutional strategy for social integration. Critically analyse this statement in light of recent observations by the Supreme Court. in hindi

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.