Q. सेवा क्षेत्र पिछले कुछ दशकों में भारत में आर्थिक विकास का प्रमुख चालक रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानता और सतत विकास के मुद्दों को संबोधित करने में सेवा क्षेत्र के नेतृत्व वाली वृद्धि की क्षमता एवं चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • पिछले कुछ दशकों में सेवा क्षेत्र किस प्रकार भारत में आर्थिक विकास का प्रमुख चालक रहा है, इस पर प्रकाश डालिये।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानता और सतत विकास के मुद्दों पर चर्चा कीजिए।
  • इन मुद्दों के समाधान में सेवा क्षेत्र-आधारित विकास की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
  • इन मुद्दों के समाधान में सेवा क्षेत्र के नेतृत्व वाली वृद्धि की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर

IT, वित्त और स्वास्थ्य सेवा जैसे उद्योगों को शामिल करते हुए सेवा क्षेत्र ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 50% से अधिक का योगदान दिया है, जो आर्थिक विकास में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, TCS और Infosys जैसी कंपनियों के नेतृत्व में IT सेवा उद्योग भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है। हालाँकि, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानताओं और सतत् विकास के लिए इस क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण विश्लेषण की आवश्यकता है।

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भारत में आर्थिक विकास के प्रमुख चालक

  • GDP में उच्च योगदान: सेवा क्षेत्र, भारत के GDP में 50% से अधिक का योगदान देता है, जो आर्थिक विकास को गति देने में इसके प्रभुत्व को दर्शाता है।
    • उदाहरण के लिए: अकेले IT क्षेत्र भारत के GDP में लगभग 7.4% का योगदान देता है, जो पर्याप्त विदेशी मुद्रा उत्पन्न करता है और नवाचार को बढ़ावा देता है।
  • निर्यात-आधारित वृद्धि: सेवा निर्यात, विशेष रूप से IT और BPO ने भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति को आगे बढ़ाया है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत का IT निर्यात वर्ष 2022 में 150 बिलियन डॉलर को पार कर गया, जो अमेरिका और यूरोप जैसे वैश्विक बाजारों में इसकी शक्ति को दर्शाता है।
  • शहरी विकास उत्प्रेरक: सेवा क्षेत्र के विस्तार ने महानगरों और टियर-2 शहरों में शहरीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा दिया है। 
    • उदाहरण के लिए: बेंगलुरु और हैदराबाद IT केंद्र के रूप में उभरे हैं, जहाँ निवेश आकर्षित हो रहा है तथा आवास और रिटेल जैसे सहायक व्यवसाय सृजित हो रहे हैं।
  • आधुनिक क्षेत्रों में रोजगार सृजन: IT, वित्त और स्वास्थ्य सेवा में उच्च-मूल्य वाली नौकरियाँ उभरी हैं, जिससे कुशल कार्यबल को बढ़ावा मिला है। 
    • उदाहरण के लिए: Infosys 300,000 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार देता है, जो कुशल रोजगार में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास: ई-कॉमर्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं ने उपभोक्ता व्यवहार और अर्थव्यवस्थाओं को नया रूप दिया है। 
    • उदाहरण के लिए: Flipkart और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म ने न केवल खुदरा व्यापार को बदल दिया है, बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियाँ भी सृजित की हैं।

रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानता और सतत विकास के मुद्दे

  • रोजगार सृजन संबंधी बाधाएँ: विकास के बावजूद, यह क्षेत्र उच्च कौशल वाली नौकरियों तक ही सीमित है, जिससे कम कौशल वाले श्रमिकों के लिए अवसर सीमित हो रहे हैं। 
    • उदाहरण के लिए: IT/ITES क्षेत्र 5 मिलियन लोगों को रोजगार देता है, लेकिन विनिर्माण की तुलना में कम कौशल वाले रोजगार के अवसर सीमित हैं।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ: शहर-केंद्रित विकास के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा होती है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: कर्नाटक जैसे राज्य IT हब से लाभान्वित होते हैं, जबकि बिहार सेवा-आधारित विकास और निवेश में पिछड़ जाता है।
  • पर्यावरण संबंधी चिंताएँ: IT और डिजिटल सेवाओं में उच्च ऊर्जा खपत से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत में डेटा सेंटर पर्याप्त ऊर्जा की खपत करते हैं, जो बेंगलुरु जैसे शहरों में शहरी ताप द्वीप प्रभाव में योगदान देता है।
  • बुनियादी ढांचे से संबंधित चुनौतियाँ: कमजोर ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढाँचा, वंचित क्षेत्रों में समान पहुँच और अवसरों को सीमित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत में केवल 35% ग्रामीण परिवारों के पास ब्रॉडबैंड की पहुँच है, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था में उनके एकीकरण में बाधा आती है।
  • कौशल बेमेल: कार्यबल में उन्नत भूमिकाओं के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति बनी हुई है। 
    • उदाहरण के लिए: NSDC के आँकड़ों से पता चलता है कि वित्त और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के कौशल कार्यक्रमों में बड़ा अंतर है।

सेवा क्षेत्र-आधारित वृद्धि से संबंधित चुनौतियाँ

  • सीमित समावेशिता: विकास से मुख्य रूप से शहरी, शिक्षित आबादी को लाभ मिलता है, जबकि ग्रामीण और वंचित वर्ग पीछे रह जाते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: शहरी क्षेत्रों में 60% की तुलना में ग्रामीण युवाओं में से केवल 20% ही औपचारिक सेवाओं में कार्यरत हैं।
  • वैश्विक बाजारों पर निर्भरता: निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता इस क्षेत्र को वैश्विक आर्थिक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के कारण IT निर्यात में मंदी आई, जिससे भारत के सेवा उद्योग में नौकरियाँ कम हुईं।
  • अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व: सेवाओं का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा अनौपचारिक रूप से संचालित होता है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा और स्थिर आय का अभाव होता है। 
    • उदाहरण के लिए: खुदरा सेवाओं में 70% से अधिक कर्मचारी बिना किसी नौकरी की सुरक्षा या लाभ के अनौपचारिक सेटअप में कार्य करते हैं।
  • पर्यावरणीय स्थिरता जोखिम: डिजिटल बुनियादी ढाँचे के विस्तार से ई-अपशिष्ट और ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है। 
    • उदाहरण के लिए: सीमित रीसाइक्लिंग बुनियादी ढाँचे के साथ, वर्ष 2021 में भारत का ई-अपशिष्ट उत्पादन 31% बढ़ गया।
  • उभरते क्षेत्रों में कौशल अंतराल: तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के लिए उन्नत कौशल की आवश्यकता होती है, जो व्यापक नहीं हैं। 
    • उदाहरण के लिए: भारत के केवल 25% ग्रामीण परिवार डिजिटल रूप से साक्षर हैं, जिससे उन्नत सेवाओं की भूमिकाओं में उनकी रोजगार क्षमता सीमित हो जाती है।

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सेवा क्षेत्र-आधारित वृद्धि की संभावना

  • समावेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म: ई-कॉमर्स और फिनटेक, ग्रामीण उद्यमियों और महिलाओं को सशक्त बना सकते हैं, जिससे असमानताएँ कम हो सकती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: अमेजन सहेली जैसे प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देते हैं और उनकी आय और दृश्यता बढ़ाते हैं।
  • उभरते क्षेत्रों में रोजगार सृजन: AI और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी डिजिटल सेवाओं का विस्तार उच्च कौशल वाली नौकरियों के अवसर प्रदान करता है। 
    • उदाहरण के लिए: TCS और WIPRO जैसी कंपनियाँ विशेष भूमिकाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का निर्माण करते हुए AI में निवेश कर रही हैं।
  • क्षेत्रीय विकास: सेवा केंद्रों का विकेंद्रीकरण टियर-2 और टियर-3 शहरों में विकास ला सकता है। 
    • उदाहरण के लिए: कोयम्बटूर और इंदौर जैसे शहरों में IT पार्क क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं और महानगरों की ओर पलायन को कम कर रहे हैं।
  • हरित अर्थव्यवस्था में संक्रमण: अक्षय ऊर्जा और पर्यावरण परामर्श सेवाएं सतत विकास को बढ़ावा दे सकती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: ReNew Power जैसी कंपनियाँ अक्षय ऊर्जा उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए डेटा एनालिटिक्स जैसी सेवाओं को एकीकृत कर रही हैं।
  • कौशल विकास कार्यक्रम: अनुकूलित प्रशिक्षण पहल कार्यबल कौशल को क्षेत्र की आवश्यकताओं के साथ संरेखित कर सकती है, जिससे रोजगार को बढ़ावा मिलता है। 
    • उदाहरण के लिए: कौशल भारत मिशन आतिथ्य, रसद और IT में व्यक्तियों को प्रशिक्षित करता है, जिससे सेवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ती है।

भारत के सेवा क्षेत्र के लिए समाधान-उन्मुख, भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण में नवाचार को बढ़ावा देना, कौशल विकास को बढ़ाना और समान रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिए डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना शामिल है। अविकसित क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देना और हरित प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना क्षेत्रीय असंतुलन को दूर कर सकता है और स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है। सेवाओं के विकास को दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों के साथ संरेखित करके, भारत समावेशी और प्रत्यास्थ विकास हासिल कर सकता है।

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