Q. 'तीन-राजधानी' मॉडल से एक एकल मेगा-राजधानी की ओर बदलाव, राज्य के विकास पर राजनीतिक गतिरोध के प्रभाव को दर्शाता है। आंध्र प्रदेश के लिए इसके सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

April 7, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • मुद्दे: तीन-राजधानी मॉडल
  • सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
  • आगे की राह।

उत्तर

प्रस्तावना

वर्ष 2014 में विभाजन के बाद, आंध्र प्रदेश से हैदराबाद भी अलग हो गया और उसे प्रशासनिक एवं आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए एक नई राजधानी की आवश्यकता थी। अमरावती को विकास के इंजन के रूप में परिकल्पित किया गया था, लेकिन राजनीतिक परिवर्तनों के कारण प्रतिस्पर्द्धी राजधानी मॉडल सामने आए।

मुद्दे: तीन-राजधानी मॉडल

  • नीतिगत अस्थिरता: अमरावती और तीन-राजधानी योजना के बीच बार-बार होने वाले बदलावों ने अनिश्चितता उत्पन्न की।
    • उदाहरण: अमरावती परियोजना रुकने से बुनियादी ढाचे में देरी हुई।
  • कानूनी बाधाएँ: तीन-राजधानी प्रस्तावों को न्यायिक और संवैधानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
  • संसाधनों की बर्बादी: मॉडल बदलने से कार्यों का दोहराव हुआ और लागत व्यर्थ गई।
  • निवेश में कमी: अनिश्चितता और निरंतर पूँजी नीति के अभाव ने निजी और संस्थागत निवेश को हतोत्साहित किया।
  • राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा: राजधानी का स्थान विकास के निर्णय के बजाय एक राजनीतिक उपकरण बन गया।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • क्षेत्रीय असंतुलन: एकल राजधानी द्वारा पिछड़े क्षेत्रों की उपेक्षा किए जाने का जोखिम रहता है।
    • उदाहरण: रायलसीमा और उत्तरी तटीय आंध्र के हाशिए पर जाने की चिंताएँ।
  • कृषि पर प्रभाव: बड़े पैमाने पर भूमि एकत्रीकरण (Land pooling) ने कृषक समुदायों को प्रभावित किया।
    • उदाहरण: लैंड पूलिंग योजना के तहत 217 वर्ग किमी. उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण।
  • श्रमिक संकट: लाभ जमींदारों की ओर झुका रहा, मजदूरों की ओर नहीं।
    • उदाहरण: खेतिहर मजदूरों को केवल ₹2,500 की मासिक सहायता प्राप्त हुई।
  • राजकोषीय बोझ: बहुपक्षीय ऋणों पर भारी निर्भरता ने वित्तीय तनाव बढ़ा दिया।
  • विकास में देरी: राजनीतिक उलटफेर ने बुनियादी ढाँचे की वृद्धि को धीमा कर दिया।

आगे की राह

  • संतुलित क्षेत्रीय विकास: विकास को अमरावती के साथ-साथ क्षेत्रीय समानता सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे एक ही क्षेत्र में संकेंद्रण से बचा जा सके।
    • उदाहरण: औद्योगिक गलियारों के माध्यम से रायलसीमा और उत्तरी तटीय आंध्र में लक्षित निवेश।
  • समावेशी योजना: विकास को केवल जमींदारों के बजाय किसानों, मजदूरों और कमजोर समूहों की जरूरतों को भी पूरा करना चाहिए।
  • राजकोषीय विवेक: राज्य को अत्यधिक उधार लेने पर रोक लगानी चाहिए और धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए।
  • सहकारी संघवाद: निरंतर वित्तीय और संस्थागत सहायता के लिए मजबूत केंद्र-राज्य समन्वय आवश्यक है।

निष्कर्ष

आंध्र प्रदेश की राजधानी की बहस रेखांकित करती है कि कैसे राजनीतिक द्वंद्व विकास में बाधा डाल सकती है। अमरावती की सफलता सुनिश्चित करने और समावेशी एवं न्यायसंगत सामाजिक-आर्थिक विकास प्राप्त करने के लिए एक सहकारी संघीय दृष्टिकोण, नीतिगत स्थिरता और संतुलित क्षेत्रीय निवेश अनिवार्य हैं।

The shift from a ‘Three-Capital’ model to a single mega-capital reflects the impact of political brinkmanship on state development. Critically analyze the socio-economic implications for Andhra Pradesh. in hindi

Explore UPSC Foundation Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.