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Q. क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में शराब और तंबाकू जैसी हानिकारक वस्तुओं के साथ अलग व्यवहार किया जाना चाहिए? आलोचनात्मक चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

March 21, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • हानिकारक वस्तुओं के साथ अलग तरीके से व्यवहार करने की आवश्यकता
  • व्यापार में उन्हें अलग तरीके से व्यवहार करने की चुनौतियाँ
  • आगे की राह।

उत्तर

वैश्विक व्यापार वार्ताएँ प्रायः शुल्क में कमी को प्राथमिकता देती हैं, किंतु शराब और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पाद सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ उत्पन्न करते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-47 के मार्गदर्शन में, भारत को व्यापार और स्वास्थ्य तथा सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनिवार्यता: ये प्रमुख रूप से रोके जा सकने वाले रोगों और मृत्यु का कारण बनते हैं।
    • उदाहरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ शराब के आदी हैं।
  • संवैधानिक दायित्व: राज्य पर हानिकारक पदार्थों को हतोत्साहित करने का दायित्व है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-47 मादक पेयों के निषेध का निर्देश देता है।
  • सामाजिक-आर्थिक लागत लाभ से अधिक: स्वास्थ्य लागत शुल्क लाभ को निष्प्रभावी कर देती है।
    • उदाहरण: शराब का संबंध घरेलू हिंसा, दुर्घटनाओं और उत्पादकता में कमी से है।
  • सामान्य वस्तुएँ नहीं: इनके विशिष्ट नकारात्मक बाह्य प्रभाव भिन्न व्यवहार को उचित ठहराते हैं।
    • उदाहरण: तंबाकू कैंसर और हृदय रोगों का कारण बनता है।
  • दीर्घकालिक मानव पूँजी पर प्रभाव: यह कार्यबल के स्वास्थ्य और उत्पादकता को प्रभावित करता है तथा स्वास्थ्य व्यय बढ़ाता है।

व्यापार में भिन्न व्यवहार करने की चुनौतियाँ

  • मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में दबाव: साझेदार देश बाजार पहुँच और शुल्क कटौती की माँग करते हैं।
    • उदाहरण: व्यापार वार्ताएँ निवेशक विश्वास और खुलेपन को प्राथमिकता देती हैं।
  • राज्यों की राजस्व निर्भरता: शराब कर राज्यों के लिए प्रमुख आय स्रोत है।
    • उदाहरण: भारतीय राज्य आबकारी शुल्क पर अत्यधिक निर्भर हैं।
  • तस्करी और अवैध व्यापार का जोखिम: उच्च शुल्क काला बाजारीको बढ़ावा दे सकते हैं।
    • उदाहरण: गुजरात और बिहार जैसे मद्य निषेध राज्यों में अवैध शराब व्यापार बना रहता है।
  • WTO और व्यापार प्रतिबद्धताएँ: भिन्न व्यवहार वैश्विक व्यापार जाँच के दायरे में आ सकता है।
    • उदाहरण: स्वास्थ्य अपवादों के तहत प्रतिबंधों को उचित ठहराना आवश्यक होता है।
  • उद्योग और रोजगार संबंधी चिंताएँ: घरेलू उद्योग और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।

आगे की राह

  • स्वास्थ्य-संवेदनशील व्यापार नीति: FTAs में स्पष्ट अपवाद प्रावधानों के माध्यम से हानिकारक वस्तुओं को शुल्क रियायतों से बाहर रखा जाए।
  • मजबूत नियामक ढाँचा: कराधान, लेबलिंग और प्रतिबंधों का उपयोग किया जाए।
    • उदाहरण: अनिवार्य कैंसर चेतावनी लेबल (वैश्विक प्रचलन)।
  • किसानों और श्रमिकों के लिए विविधीकरण: वैकल्पिक आजीविका जैसे फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
  • स्वास्थ्य आधार पर अंतरराष्ट्रीय औचित्य: WTO के सार्वजनिक स्वास्थ्य अपवादों का उपयोग करते हुए नीतियों को वैश्विक स्वास्थ्य प्रतिबद्धताओं के अनुरूप बनाया जाए।
  • जागरूकता और माँग में कमी: व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से उपभोग घटाया जाए, जैसे तंबाकू विरोधी अभियान।

निष्कर्ष

सार्वजनिक स्वास्थ्य और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु हानिकारक उत्पादों के साथ व्यापार नीति में भिन्न व्यवहार आवश्यक है। व्यापार में प्रत्यास्थता, प्रभावी विनियमन और जागरूकता के संयोजन से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आर्थिक लाभ, सामाजिक कल्याण को प्रभावित न करें।

Should harmful commodities like alcohol and tobacco be treated differently in international trade negotiations? Critically discuss. in hindi

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