प्रश्न की मुख्य माँग
- इस तथ्य पर प्रकाश डालिये कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महत्त्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, पिछले 94 वर्षों में भारत में स्थित किसी भी भारतीय वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।
- भारतीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के सम्मुख आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।
- अन्य अंतर्निहित कारकों पर चर्चा कीजिए जो महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- आगे की राह लिखिये।
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उत्तर
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद , भारत में रहने वाले किसी भी भारतीय वैज्ञानिक ने पिछले 94 वर्षों में नोबेल पुरस्कार नहीं जीता है, जो देश के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के सम्मुख मौजूद चुनौती को उजागर करता है । आखिरी नोबल पुरस्कार, सर C.V. रमन ने वर्ष 1930 में भौतिकी विषय में प्राप्त किया था। हालाँकि कई भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को विदेश में कार्य करते हुए पुरस्कार मिले हैं, लेकिन यह अंतर एक मजबूत अनुसंधान बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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भारतीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर की चुनौतियाँ
- बुनियादी शोध पर ध्यान न देना: भारत वैज्ञानिक सफलताओं के लिए आवश्यक मौलिक शोध की तुलना में तत्काल आर्थिक लाभ वाले प्रायोगिक शोध को प्राथमिकता देता है।
- उदाहरण के लिए: अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों की तुलना में आधारभूत शोध में भारत का निवेश काफी कम है।
- शोध के लिए कम सार्वजनिक निधि: सीमित निधि के कारण बुनियादी ढाँचे के विकास और नवाचार में बाधा आती है, जिससे शोधकर्ताओं के लिए अपर्याप्त संसाधन उपलब्ध होते हैं।
- उदाहरण के लिए: भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.7% ही अनुसंधान और विकास पर खर्च करता है, जो चीन के 2.1% से बहुत कम है।
- प्रशासनिक लालफीताशाही: अत्यधिक प्रशासनिक बाधाएँ अनुसंधान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती हैं तथा नवाचार और रचनात्मकता को हतोत्साहित करती हैं ।
- उदाहरण के लिए: शोधकर्ताओं को अक्सर अनुदान के लिए अनुमोदन प्राप्त करने में काफी देरी का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रगति में बाधा आती है।
- सीमित निजी क्षेत्र की भागीदारी: भारत में निजी क्षेत्र अनुसंधान एवं विकास में अपेक्षाकृत कम निवेश करता है , जिससे अनुसंधान के अवसर सीमित हो जाते हैं।
- उदाहरण के लिए: Google या IBM जैसी कंपनियों के विपरीत, भारतीय फर्म उच्च जोखिम, उच्च लाभ वाले अनुसंधान पहलों पर कम ध्यान केंद्रित करते हैं।
- शोध संस्थानों का खराब प्रदर्शन: भारतीय विश्वविद्यालय शोध से अधिक शिक्षण को प्राथमिकता देते हैं , और यहाँ तक कि शीर्ष संस्थान भी वैश्विक स्तर पर खराब प्रदर्शन करते हैं।
- उदाहरण के लिए: शोध परिणामों पर QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय, शीर्ष 50 विश्वविद्यालय की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
- प्रतिभाओं का कम होना: वैश्विक औसत की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति शोधकर्ताओं की संख्या कम है , जिससे वैज्ञानिक सफलताओं की इसकी संभावना कम हो जाती है।
- उदाहरण के लिए: भारत में प्रति दस लाख लोगों पर केवल 255 शोधकर्ता हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के 4245 के आंकड़े से बहुत कम है।
- पुराना पाठ्यक्रम और पद्धतियाँ: भारत में शोध प्रक्रियायें अक्सर पुरानी शिक्षण पद्धतियों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से मेल न खाने के कारण पीछे रह जाती है।
- उदाहरण के लिए: कई संस्थान उभरती हुई तकनीकों को शामिल किए बिना पारंपरिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम का पालन करना जारी रखते हैं।
अन्य अंतर्निहित कारक
- नोबेल पुरस्कार नामांकन प्रक्रिया: नोबेल पुरस्कार नामांकन की प्रक्रिया अत्यधिक चयनात्मक होती है। यह हमेशा पारदर्शी नहीं होती, जिससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि भारतीयों का नामांकन न किया जाए।
- उदाहरण के लिए: S.N.बोस और होमी भाभा जैसे प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिकों को कई बार इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया, लेकिन उन्हें कभी भी यह पुरस्कार नहीं मिला।
- प्रतिभा पलायन: कई शीर्ष भारतीय वैज्ञानिक बेहतर शोध अवसरों के लिए विदेश चले जाते हैं , जिससे भारत में प्रतिभाओं की कमी हो जाती है।
- उदाहरण के लिए: हरगोविंद खुराना और वेंकटरमन रामकृष्णन ने क्रमशः अमेरिका और ब्रिटेन जाने के बाद नोबेल पुरस्कार जीते।
- अंतःविषयक अनुसंधान का अभाव: भारतीय अनुसंधान में अक्सर अंत:विषयक सहयोग की कमी होती है , जो नवीन खोजों के लिए महत्त्वपूर्ण है।
- उदाहरण के लिए: अमेरिका जैसे देश MIT मीडिया लैब जैसे संस्थानों के माध्यम से अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं ।
- वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: भारत को अमेरिका और यूरोप जैसी वैश्विक अनुसंधान शक्तियों से कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ता है।
- उदाहरण के लिए: भौतिकी, रसायन विज्ञान और चिकित्सा में 80% से अधिक नोबेल पुरस्कार यूरोप और उत्तरी अमेरिका के वैज्ञानिकों को दिए गए हैं।
- पक्षपात और क्षेत्रीय असमानताएँ: कुछ लोग तर्क देते हैं, कि नोबेल पुरस्कार प्रक्रिया पश्चिमी देशों के प्रति पक्षपाती है, हालाँकि यह दावा विवादास्पद बना हुआ है।
- उदाहरण के लिए: इजरायल और दक्षिण कोरिया को भी उन्नत अनुसंधान क्षमताओं के बावजूद नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने में संघर्ष करना पड़ा है।
आगे की राह
- बुनियादी अनुसंधान के लिए वित्तपोषण में वृद्धि: भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप और वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी अनुसंधान में अपने निवेश को बढ़ाना चाहिए ।
- उदाहरण के लिए: सार्वजनिक वित्तपोषण को सकल घरेलू उत्पाद के कम से कम 2% तक बढ़ाने से भारत, अनुसंधान क्षेत्र में चीन जैसे देशों के करीब आ जाएगा।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना: सरकार को निजी कंपनियों को अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: दक्षिण कोरिया की तरह अनुसंधान एवं विकास निवेश के लिए कर छूट प्रदान करने से भारतीय कम्पनियों को अनुसंधान में योगदान करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना: प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और प्रशासनिक बाधाओं को कम करना, शोधकर्ताओं को नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।
- उदाहरण के लिए: अनुसंधान अनुदान और परियोजनाओं के लिए सिंगल–विंडो मंजूरी सिस्टम को लागू करना।
- विश्वविद्यालय-उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करना: विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग में सुधार करने से अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच के अंतर को कम किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए: स्टैनफोर्ड-सिलिकॉन वैली मॉडल जैसे सहयोग को भारत में भी अपनाया जा सकता है।
- शोध-उन्मुख शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना: शोध-आधारित शिक्षा पर अधिक बल देने से भारतीय वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी तैयार करने में मदद मिलेगी।
- उदाहरण के लिए: INSPIRE फ़ेलोशिप जैसे कार्यक्रम छात्रों को शोध करियर चुनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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अपनी वैश्विक वैज्ञानिक स्थिति को बेहतर बनाने और भविष्य में नोबेल पुरस्कार जीतने की अपनी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए , भारत को एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए । इसमें फंडिंग बढ़ाना, प्रशासनिक बाधाओं को कम करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है। बुनियादी अनुसंधान और अंतःविषयक सहयोग को मजबूत करने से भारत को वैज्ञानिक सफलता हासिल करने और नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।