Q. भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों ने उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्षों की तुलना में आंतरिक असमानताओं को अधिक मौलिक रूप से संबोधित किया। महाड सत्याग्रह और नमक मार्च के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

March 21, 2026

GS Paper IModern History

प्रश्न की मुख्य माँग

  • महाड सत्याग्रह की आंतरिक असमानताओं को संबोधित करने में भूमिका
  • नमक मार्च की आंतरिक असमानताओं को संबोधित करने में भूमिका

उत्तर

भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों ने अक्सर गहराई से जड़ जमाई हुई आंतरिक असमानताओं का सामना औपनिवेशिक विरोधी संघर्षों की तुलना में अधिक प्रत्यक्ष रूप से किया। जबकि नमक (दांडी) मार्च ने औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी, वहीं महाड सत्याग्रह ने गहराई से निहित जातिगत भेदभाव को लक्षित किया।

महाड़ सत्याग्रह की आंतरिक असमानताओं को संबोधित करने में भूमिका

  • मौलिक मानवाधिकारों का प्रतिपादन: सार्वजनिक संसाधनों तक समान पहुँच का दावा किया।
    • उदाहरण: दलितों द्वारा एक अधिकार के रूप में ‘चावदार’ तालाब से पानी पीना।
  • जाति-आधारित बहिष्कार को चुनौती: अस्पृश्यता की प्रथाओं का प्रत्यक्ष विरोध किया।
    • उदाहरण: उच्च जातियों का प्रतिरोध और तालाब का “शुद्धिकरण” गहरे भेदभाव को दर्शाता है।
  • समाज के भीतर से सामाजिक सुधार: औपनिवेशिक शासकों के बजाय भारतीयों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को लक्षित किया।
    •  उदाहरण: आंदोलन ने हिंदू सामाजिक व्यवस्था के भीतर गरिमापूर्ण जीवनयापन की माँग की।
  • धार्मिक-ग्रंथ आधारित असमानता से वैचारिक विच्छेद: परंपरा द्वारा वैध ठहराए गए जातिगत पदानुक्रम को अस्वीकार किया गया।
    •  उदाहरण: मनुस्मृति का सार्वजनिक दहन (वर्ष 1927)।
  • संवैधानिक समानता की नींव: भेदभाव के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों को प्रभावित किया।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-15 तथा अनुच्छेद-17 में अस्पृश्यता उन्मूलन में परिलक्षित।

नमक मार्च की आंतरिक असमानताओं को संबोधित करने में भूमिका

  • विभिन्न सामाजिक समूहों का समेकन: नमक कानून के उल्लंघन में जाति और वर्ग से परे भारतीयों को एकजुट किया।
  • औपनिवेशिक आर्थिक शोषण के विरुद्ध प्रतीकात्मक चुनौती: सभी वर्गों को प्रभावित करने वाले अन्याय को उजागर किया।
    • उदाहरण: नमक कर के विरुद्ध विरोध, जो गरीब परिवारों पर भार डालता था।
  • सामाजिक एकता पर अप्रत्यक्ष प्रभाव: सामाजिक विभाजनों से ऊपर राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया।
    • उदाहरण: महिलाओं और वंचित समूहों की भागीदारी।
  • बाह्य उत्पीड़न पर केंद्रित: आंतरिक सामाजिक पदानुक्रम के बजाय ब्रिटिश शासन को लक्षित किया।
    • उदाहरण: माँग स्वराज की थी, सामाजिक पुनर्संरचना की नहीं।
  • जातिगत असमानता पर सीमित प्रत्यक्ष प्रहार: जड़ जमाई सामाजिक प्रथाओं को मूल रूप से चुनौती नहीं दी।
    • उदाहरण: राजनीतिक आंदोलन के बावजूद अस्पृश्यता बनी रही।

निष्कर्ष

जहाँ नमक मार्च जैसे औपनिवेशिक विरोधी आंदोलनों ने भारत को राजनीतिक रूप से एकजुट किया, वहीं महाड सत्याग्रह जैसे सामाजिक सुधार आंदोलनों ने संरचनात्मक असमानताओं को अधिक मूलभूत रूप से संबोधित किया, यह दर्शाते हुए कि वास्तविक स्वतंत्रता के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी आवश्यक है।

Social reform movements in India addressed internal inequalities more fundamentally than anti-colonial struggles. Discuss in the context of Mahad Satyagraha and Salt March. in hindi

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