प्रश्न की मुख्य माँग
- स्थिरता-सुरक्षा संबंधों की चर्चा कीजिए।
- चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- आगे की राह सुझाइए।
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उत्तर
ढाका में हालिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व में राजनीतिक परिवर्तन और भारत–बांग्लादेश के बीच पुनः सक्रिय संपर्क यह दर्शाते हैं कि 4,000 किमी. से अधिक लंबी साझा सीमा पर होने वाले घटनाक्रम भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के ढाँचे को सीधे प्रभावित करते हैं।
स्थिरता–सुरक्षा संबंध
- सीमा की निरंतरता: 4,156 किमी. लंबी छिद्रयुक्त सीमा के कारण बांग्लादेश में अस्थिरता सीधे पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ, तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों को प्रभावित करती है।
- उदाहरण: असम और मेघालय क्षेत्रों में सीमा-पार तस्करी नेटवर्क का प्रभाव।
- उग्रवाद से जुड़ाव: बांग्लादेश में कमजोर शासन या राजनीतिक शून्यता, सीमावर्ती क्षेत्रों के पास उग्रवादी समूहों को सक्रिय होने का अवसर दे सकती है, जिससे पूर्वोत्तर भारत की शांति प्रभावित होती है।
- उदाहरण: अस्थिरता का लाभ उठाते हुए कट्टरपंथी तत्त्वों और आईएसआई-समर्थित नेटवर्क के सक्रिय होने का खतरा।
- कनेक्टिविटी पर निर्भरता: पूर्वोत्तर के व्यापारिक गलियारे और पारगमन मार्ग भारत-बांग्लादेश संबंधों की स्थिरता पर निर्भर हैं।
- उदाहरण: अंतरिम राजनीतिक चरण के दौरान कनेक्टिविटी परियोजनाओं के ठप होने से क्षेत्रीय आर्थिक प्रवाह बाधित हुआ।
- जल सुरक्षा: तीस्ता और गंगा जैसी साझा नदियाँ पारिस्थितिकी और मानवीय सुरक्षा को जोड़ती हैं।
- उदाहरण: लंबित तीस्ता समझौता और गंगा संधि के नवीनीकरण से विश्वास और स्थिरता प्रभावित होती है।
- आर्थिक परस्पर निर्भरता: बांग्लादेश एक महत्त्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा साझेदार है, जिसकी स्थिरता पूर्वोत्तर के विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
- उदाहरण: बांग्लादेश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारत से एलएनजी और विद्युत सहयोग।
चुनौतियाँ
- राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार शासन परिवर्तन और अंतरिम सरकारें द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की निरंतरता को बाधित करती हैं।
- उदाहरण: 18 महीने के अंतरिम काल में वीजा प्रतिबंध और परियोजनाओं में ठहराव देखा गया।
- उग्रवादी नेटवर्क: सीमा क्षेत्रों के पास कट्टरपंथी समूहों की मौजूदगी दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनती है।
- उदाहरण: सीमा जिलों में कट्टर इस्लामी समूहों के सक्रिय होने की रिपोर्टें।
- छिद्रयुक्त सीमाएँ: कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ और नदीय क्षेत्र निगरानी और नियंत्रण को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
- उदाहरण: असम–बांग्लादेश सीमा पर तस्करी और घुसपैठ के मार्ग।
- संघीय बाधाएँ: भारत के भीतर राजनीतिक मतभेद (जैसे- पश्चिम बंगाल का तीस्ता मुद्दे पर रुख) समझौतों में देरी करते हैं।
- उदाहरण: राज्य-स्तरीय विरोध के कारण तीस्ता समझौता लंबित।
- बाहरी प्रभाव: विदेशी खुफिया एजेंसियों और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्द्धा से सुरक्षा परिदृश्य और जटिल हो जाता है।
आगे की राह
- खुफिया सहयोग: बांग्लादेश के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस तथा भारत के रॉ (RAW) के मध्य समन्वय को मजबूत किया जाए और संस्थागत सुरक्षा संवाद को बढ़ावा दिया जाए।
- उदाहरण: मार्च 2026 में दिल्ली में खुफिया प्रमुख स्तर की बैठकें।
- संधि समाधान: जल-वितरण और सीमा प्रबंधन समझौतों का शीघ्र समाधान किया जाए।
- उदाहरण: वर्ष 2026 की समय-सीमा से पहले गंगा जल संधि का नवीनीकरण।
- सीमा प्रौद्योगिकी: बाड़बंदी, ड्रोन निगरानी और नदीय निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाए।
- उदाहरण: संवेदनशील क्षेत्रों में बीएसएफ द्वारा तकनीकी उन्नयन।
- कनेक्टिविटी पुनर्स्थापन: वीजा, व्यापार मार्ग और सीमा-पार अवसंरचना परियोजनाओं को पुनः सक्रिय किया जाए।
- उदाहरण: रुकी हुई रेल और पारगमन कनेक्टिविटी परियोजनाओं का पुनरारंभ।
निष्कर्ष
जैसा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, “आप दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।” इसलिए भारत और बांग्लादेश को सहयोग के माध्यम से स्थिरता को मजबूत करना होगा, क्योंकि पूर्वोत्तर की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति ढाका की आंतरिक स्थिरता से अविभाज्य रूप से जुड़ी हुई है।