Q. अल्पकालिक आय सहायता के बिना संरचनात्मक सुधारों से कृषि नीति की विश्वसनीयता कमजोर होने का खतरा है। हालिया बजट प्राथमिकताओं के संदर्भ में इस कथन की जाँच कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • हालिया बजट की प्राथमिकताओं के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
  • संबद्ध चिंताओं को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

कृषि संरचनात्मक सुधार, जैसे- डिजिटल एकीकरण और बाजार उदारीकरण, दीर्घकालिक उत्पादकता का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन इन प्रक्रियाओं अक्सर व्यवधान का एक निश्चित अंतराल(जेस्टेशन अवधि) में होता है। अल्पकालिक आय सहायता के बिना, ये परिवर्तन कृषक समुदाय को हाशिए पर डाल सकते हैं और राज्य की नीति में विश्वास को कम कर सकते हैं। हालिया बजट प्राथमिकताएँ मौजूदा सुरक्षा जालों की “निरंतरता” के साथ उच्च-तकनीकी संरचनात्मक परिवर्तनों को मिलाकर इस अंतराल को कम करने के एक रणनीतिक प्रयास को दर्शाती हैं, जिससे नीतिगत विश्वसनीयता बनी रहे।

हालिया बजट प्राथमिकताओं का परीक्षण 

  • डिजिटल संरचनात्मक कायाकल्प: केंद्रीय बजट 2026-27 ने भारत-VISTAAR (एक AI-संचालित डिजिटल सलाहकार उपकरण) को प्राथमिकता दी, जिसका लक्ष्य कृषि क्षेत्र को पारंपरिक तरीकों से डेटा-संचालित परिशुद्धता की ओर ले जाना है।
    • उदाहरण: AI के माध्यम से एग्रीस्टेक और ICAR डेटाबेस का एकीकरण एक संरचनात्मक सुधार है, जिसका उद्देश्य फसल विफलता के जोखिमों को कम करना है।
  • उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण: किसानों को एकल-फसल से हटाकर चंदन, कोको और बादाम जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर ले जाने के लिए, रणनीतिक रूप से वित्त आवंटित किया गया था।
    • उदाहरण: नारियल और काजू के लिए नई प्रोत्साहन योजनाएँ वर्ष 2030 तक वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाने के लिए डिजाइन की गई हैं।
  • आय सहायता निरंतरता: इन परिवर्तनों के जोखिमों की भरपाई के लिए, सरकार ने PM-किसान आवंटन को ₹63,500 करोड़ पर बनाए रखा, जो एक पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • उदाहरण: हितधारकों के अनुसार, हालाँकि नई पहल कमजोर थी, इसके विपरीत, PM-KISAN की स्थिर फंडिंग संरचनात्मक परिवर्तनों के बीच आर्थिक स्थिरता प्रदान करने वाले कारक के रूप में उभरी है।
  • पर्याप्त इनपुट सब्सिडी: मामूली 3% की गिरावट के बावजूद, किसानों को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से बचाने के लिए उर्वरक सब्सिडी ₹1.71 लाख करोड़ पर बनी रही।
    • उदाहरण: यह सुनिश्चित करता है कि उत्पादन की तत्काल लागत में भारी उछाल न आए, जबकि सरकार दीर्घकालिक संरचनात्मक दक्षता पर बल दे रही है।

संबद्ध चिंताएँ

  • धीमी आय वृद्धि: आलोचकों का तर्क है, कि मुद्रास्फीति समायोजन के बिना आय सहायता (PM-KISAN) में “निरंतरता” स्थिर कृषि आय को संबोधित करने में विफल रहती है।
    • उदाहरण: कार्यकर्ताओं के अनुसार, बजट में सोयाबीन और कपास जैसी फसलों के लिए MSP प्राप्ति सुनिश्चित करने हेतु रोडमैप की कमी है।
  • वित्त का कम उपयोग: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए संशोधित अनुमानों में ₹1.59 लाख करोड़ से ₹1.52 लाख करोड़ तक की गिरावट देखी गई, जो कार्यान्वयन में बाधाओं का सुझाव देती है।
  • बाजार-संबद्ध विविधीकरण का जोखिम: बिना किसी समर्पित मूल्य सुरक्षा जाल के उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ना, अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति किसानों की संवेदनशीलता को बढ़ाता है।
    • उदाहरण: विविधीकरण को “उच्च जोखिम” वाली रणनीति के रूप में देखा जाता है, यदि इसे PMFBY के तहत बढ़ी हुई बीमा सहायता प्राप्त न हो।
  • सिंचाई परिव्यय में गिरावट: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के फंड में कटौती से वह आधार कमजोर पड़ सकता है, जिस पर दीर्घकालिक संरचनात्मक उत्पादकता सुधार निर्भर करते हैं।

निष्कर्ष

कृषि नीति की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एक “हाइब्रिड मॉडल” की आवश्यकता है, जहाँ संरचनात्मक दक्षता (AI, मूल्य शृंखला) को गतिशील आय सहायता द्वारा सुदृढ़ किया जाए। ध्यान “व्यय-संचालित” से “परिणाम-उन्मुख” समर्थन की ओर जाना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) बाजार सुधारों के साथ विकसित हो, ताकि कृषि संकट भारत के ‘विकसित भारत’ लक्ष्यों को बाधित न करे।

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