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प्रश्न की मुख्य माँग
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भूजल पर भारत की अत्यधिक निर्भरता ने प्रदूषण को मानव पूँजी और खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना दिया है। फ्लोराइड, आर्सेनिक और यूरेनियम जैसे प्रदूषक, कमजोर शासन और असंवहनीय कृषि के साथ मिलकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं, फसल उत्पादकता को कम करते हैं और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को बढ़ाते हैं, जिसके लिए तत्काल प्रणालीगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
भूजल प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए समन्वित शासन, वास्तविक समय निगरानी, टिकाऊ खेती, विकेंद्रीकृत उपचार और प्रदूषण नियमों के सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता है। केवल दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से ही भारत लचीले, सुरक्षित जलभृत सुनिश्चित कर सकता है, मानव पूँजी की रक्षा कर सकता है, खाद्य प्रणालियों को सुरक्षित कर सकता है और अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय तथा आर्थिक नुकसानों को रोक सकता है।
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