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Q. पुष्टिकरण पूर्वाग्रह निष्पक्षता और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में बाधा उत्पन्न कर सकता है। शासन पर इसके प्रभाव की जाँच कीजिए और नीति निर्माताओं के बीच निष्पक्षता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएँ। (10 अंक, 150 शब्द)

January 15, 2025

GS Paper IVEthics, Integrity and Aptitude

प्रश्न की मुख्य माँग

  • शासन पर पुष्टि पूर्वाग्रह के प्रभाव का आकलन कीजिये और यह निष्पक्षता व साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में कैसे बाधा डाल सकता है।
  • नीति निर्माताओं के बीच निष्पक्षता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के उपाय सुझाइये।

उत्तर

सूचना को इस तरह से व्याख्या करने की प्रवृत्ति जो पहले से मौजूद मान्यताओं के साथ संरेखित होती है, अर्थात् पुष्टिकरण पूर्वाग्रह, निष्पक्षता और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को कमजोर करती है। तथ्यात्मक विश्लेषण पर व्यक्तिपरक आख्यानों का पक्ष लेते हुए यह पूर्वाग्रह शासन के निर्णयों को विकृत कर सकता है। उदाहरण के लिए, नीति निर्माण के दौरान चयनात्मक डेटा इंटरप्रिटेशन अक्सर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को बढ़ाता है, जो नीति निर्माताओं के बीच आलोचनात्मक सोच और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को उजागर करता है‌।

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शासन पर पुष्टि पूर्वाग्रह का प्रभाव

  • विकृत नीतिगत निर्णय: पुष्टि पूर्वाग्रह, विपरीत साक्ष्य की अनदेखी करते हुए नीति निर्माताओं को पूर्वकल्पित मान्यताओं के साथ मेल खाने वाली जानकारी को प्राथमिकता देने हेतु प्रेरित करता है करता है। \
    • उदाहरण के लिए: आर्थिक विकास आख्यानों के कारण बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के पर्यावरणीय जोखिमों को अनदेखा करने वाले नीति निर्माता, संधारणीय विकास लक्ष्यों को दरकिनार करते हैं।
  • अप्रभावी संसाधन आवंटन: पक्षपातपूर्ण निर्णय, संसाधनों को कम प्रभाव वाले क्षेत्रों में विस्थापित कर सकते हैं, जिससे मध्यक्षेप की आवश्यकता वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी हो सकती है। 
    • उदाहरण के लिए: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की तुलना में शहरी विकास पर अधिक बल देने के परिणामस्वरूप भारत की COVID-19 प्रतिक्रिया के दौरान स्वास्थ्य सेवा असमानताएँ उत्पन्न  हुईं।
  • जन विश्वास में कमी: पक्षपात से प्रभावित निर्णय, पारदर्शिता और जवाबदेही को कम करते हैं, जिससे शासन में नागरिकों का भरोसा कमजोर होता है। 
    • उदाहरण के लिए: कुछ समूहों को दूसरों पर तरजीह देने वाली पक्षपातपूर्ण नीति प्रचार ने भारत में कृषि कानून पर हुई चर्चाओं  के दौरान सार्वजनिक अशांति को जन्म दिया ।
  • साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों को कमजोर करना: नीति निर्माता अनुभवजन्य शोध को खारिज कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप खराब तरीके से डिजाइन की गई नीतियाँ बन सकती हैं, जिनमें सशक्त डेटा-संचालित आधार का अभाव होता है।
    • उदाहरण के लिए: वायु प्रदूषण शमन पर स्वतंत्र शोध की अनदेखी करने से महानगरों की व्यापक स्वच्छ वायु नीतियों को लागू करने में देरी हुई है।
  • ध्रुवीकृत शासन: पुष्टि पूर्वाग्रह, वैचारिक विभाजन को बढ़ाता है और जटिल सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक द्विदलीय नीति निर्माण को बाधित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: वैश्विक मंचों पर जलवायु परिवर्तन नीतियों से संबंधित विभाजनकारी बहस, हितधारकों के बीच गहरी वैचारिक पूर्वाग्रहों को दर्शाती है।

निष्पक्षता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के उपाय

  • क्षमता निर्माण कार्यक्रम: नीति निर्माताओं को नैतिक निर्णय लेने, संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह जागरूकता और साक्ष्य-आधारित रूपरेखाओं के बारे में प्रशिक्षित करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: नीति आयोग द्वारा नियमित कार्यशालाएँ, थिंक टैंक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से वस्तुनिष्ठ नीति विश्लेषण को बढ़ावा देती हैं।
  • सहकर्मी समीक्षाओं को संस्थागत बनाना: पूर्वाग्रहों की पहचान करने और उन्हें कम करने के लिए नीतियों और निर्णयों के थर्ड पार्टी  आकलन को प्रोत्साहित करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: U.K. के बजट उत्तरदायित्व कार्यालय के समान स्वतंत्र नीति मूल्यांकन निकायों की स्थापना निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।
  • डेटा पारदर्शिता को बढ़ावा देना: नीति मसौदों और निर्णयों की सार्वजनिक जाँच के लिए, ओपेन डेटा प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग को अनिवार्य बनाना चाहिये।
    • उदाहरण के लिए: MyGov पोर्टल नागरिकों को सरकारी नीतियों पर निष्पक्ष प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है, जिससे सहभागी शासन को बढ़ावा मिलता है।
  • नैतिक नेतृत्व को मजबूत करना: नेतृत्व की जवाबदेही और अनुकरणीय व्यवहार के माध्यम से सत्यनिष्ठा पूर्ण और नैतिक शासन की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: लाल बहादुर शास्त्री अकादमी द्वारा नैतिक नेतृत्व की पहल, सार्वजनिक सेवा में निष्पक्ष शासन पर बल देती है।
  • सहयोगात्मक नीति निर्माण को प्रोत्साहित करना: संतुलित दृष्टिकोण के लिए विविध हितधारकों को शामिल करते हुए समावेशी निर्णय लेने की प्रक्रिया को अपनाना। 
    • उदाहरण के लिए: दिल्ली का सहभागी बजट मॉडल नागरिकों के इनपुट के माध्यम से धन का समान आवंटन सुनिश्चित करता है, जिससे संभावित पूर्वाग्रह कम होते हैं।

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पुष्टिकरण पूर्वाग्रह से निपटने के लिए शासन में आलोचनात्मक सोच और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा देना आवश्यक है। नीति निर्माताओं को निरंतर प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए, विविध दृष्टिकोणों को बढ़ावा देना चाहिए और संरचित निर्णय लेने के ढाँचे को लागू करना चाहिए। ऐसे उपाय निष्पक्षता सुनिश्चित करने और प्रभावी नीतियों के निर्माण में मदद करेंगे, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।

Confirmation bias can hinder objectivity and evidence-based policymaking. Examine its impact on governance and suggest measures to promote impartiality and critical thinking among policymakers. in hindi

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