Q. हाल ही में गोवा में हुई अग्निकांड के संदर्भ में, उन प्रणालीगत शासन संबंधी कमियों का विश्लेषण कीजिए जो बार-बार होने वाली अग्निकांडों का कारण बनती हैं। भारत में अग्नि सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक सुधारों का सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • व्यवस्थागत शासन में खामियाँ
  • अग्नि सुरक्षा के लिए संरचनात्मक सुधार

उत्तर

गोवा के नाइट क्लब में लगी आग ने भारत की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में व्याप्त गंभीर और बार-बार होने वाली प्रशासनिक विफलताओं को उजागर किया है, जिनमें कमजोर लाइसेंसिंग और प्रवर्तन से लेकर खराब शहरी डिजाइन और कमजोर रोकथाम तक शामिल हैं। इसलिए, संरचनात्मक सुधारों के तहत अग्नि सुरक्षा को केवल कागजी नियमों तक सीमित न रखकर, भवन निर्माण चक्र, संस्थानों और सार्वजनिक संस्कृति में गहराई से समाहित करना आवश्यक है।

प्रणालीगत शासन-संबंधी कमियाँ

  • शिथिल लाइसेंसिंग प्रक्रिया और अवैध निर्माण: कई मनोरंजन स्थल अनधिकृत संरचनाओं और उपयोग में बदलाव के साथ संचालित होते हैं।
    • उदाहरण: गोवा के अर्पोरा नाइटक्लब में अवैध विस्तार और खप्पर/पाम की छत थी, फिर भी उसे उच्च-घनत्व क्लब के रूप में चलाया जा रहा था।
  • NBC/NDMA मानकों का कमजोर अनुपालन: निकास, सामग्री, अलार्म और ड्रिल जैसी विस्तृत सुरक्षा आवश्यकताओं की अनदेखी की जाती है।
    • उदाहरण: गोवा क्लब में केवल एक संकीर्ण निकास मार्ग और ज्वलनशील सजावट थी, जबकि NBC के अनुसार अनेक अवरोध-रहित निकास अनिवार्य हैं।
  • ‘वन-टाइम NOC’ संस्कृति, सतत अनुपालन का अभाव: फायर NOC को औपचारिकता समझा जाता है, न कि निरंतर अनुपालन की जिम्मेदारी।
    • उदाहरण: राजकोट TRP गेमिंग जोन में आंतरिक संरचनाओं को बदलकर भीड़ में वृद्धि की गई, जबकि फायर क्लीयरेंस अपर्याप्त थी।
  • कमजोर, विभाजित और अल्प-क्षमता वाली फायर सेवाएँ:  फायर सेवाओं के पास शहरी नियोजन में पर्याप्त अधिकार नहीं होते और उनकी पहुँच भी सीमित रहती है।
    • उदाहरण: गोवा क्लब के पास पहुँचने से सैकड़ों मीटर पहले फायर टेंडर रुक गए क्योंकि पहुँच मार्ग संकरा था और निर्माण प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण थी।
  • कम निवारक क्षमता और राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़:  उल्लंघनों पर मामूली दंड, धीमी कानूनी प्रक्रिया और संरचनात्मक शिथिलता प्रायः उल्लंघनों को प्रोत्साहित करती है।

अग्नि सुरक्षा हेतु संरचनात्मक सुधार

  • NBC अग्नि मानकों को देश-भर में विधिक रूप से बाध्यकारी बनाना: परामर्शात्मक कोडों को प्रवर्तनीय न्यूनतम मानकों में बदलना आवश्यक है।
    • उदाहरण: एक केंद्रीय ‘फायर एवं जीवन सुरक्षा कानून’ जो मॉल, अस्पताल, छात्रावास और मनोरंजन स्थलों में NBC भाग-IV को अनिवार्य बनाए।
  • जीवनचक्र अनुपालन और वार्षिक लेखापरीक्षा: लाइसेंस नवीनीकरण को आवधिक, सत्यापन योग्य सुरक्षा जांचों से जोड़ना।
    • उदाहरण: वार्षिक तृतीय-पक्ष फायर ऑडिट अनिवार्य हों, जिन्हें सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए, अनुपालन न होने पर व्यापार/पर्यटन लाइसेंस स्वतः समाप्त हो जाए।
  • व्यावसायिक और सशक्त फायर सेवाएँ:  फायर प्राधिकरणों को लेआउट और अनुमोदन में वैधानिक भूमिका दी जाए।
    • उदाहरण: पर्यटन क्षेत्रों के नाइटक्लबों को तभी अनुमति मिले, जब फायर विभाग सड़क चौड़ाई, पहुँच मार्ग और जल स्रोतों को प्रमाणित करे।
  • जोखिम-आधारित जोनिंग:  शहरों का डिजाइन ‘अग्नि-संवेदनशील’ समूहों की पहचान कर जोखिम को नियंत्रित करने पर आधारित हो।
    • उदाहरण: अधिसूचित “मनोरंजन क्षेत्र” जिनमें इनडोर आतिशबाजी पर प्रतिबंध है और प्रति वर्ग मीटर में कानूनी रूप से लागू होने योग्य उपस्थिति सीमाएँ हैं।
  • उच्च निवारक क्षमता और सुरक्षा संस्कृति का निर्माण: नियमों का पालन न करने पर होने वाली कानूनी, वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी लागत को बढाएँ।
    • उदाहरण: लापरवाही से मृत्यु होने पर गैर-जमानती अपराध और संपत्ति जब्ती, साथ ही स्कूलों, अस्पतालों और मॉल में अनिवार्य फायर ड्रिल हो।

निष्कर्ष

गोवा के नाइट क्लब में लगी आग से यह स्पष्ट हो गया है कि आग से सुरक्षा केवल सांकेतिक आक्रोश या प्रतीकात्मक NOC पर निर्भर नहीं रह सकती। भारत को लागू करने योग्य कानूनों, निरंतर अनुपालन, सशक्त संस्थानों और जन जागरूकता की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा एक अनिवार्य नागरिक मानदंड बन जाए और दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय उन्हें रोका जा सके।

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