Q. वेतन को रोकना और श्रम कानूनों को कमजोर करना वास्तविक औद्योगिक उन्नयन का स्थायी विकल्प नहीं हो सकता है। हालिया औद्योगिक अशांतियों के आलोक में, पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की विकास गति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • गुण: भारत बनाम पूर्वी एशिया
  • दोष: भारत बनाम पूर्वी एशिया
  • आगे की राह।

उत्तर

भूमिका

नोएडा में फैली अशांति एक गहरी ढाँचागत खामी की ओर इशारा करती है, जो यह उजागर करती है कि भारत की विनिर्माण वृद्धि, उत्पादकता में बढोतरी के बिना, केवल कम मजदूरी पर निर्भर है, जो कि पूर्वी एशिया से बिल्कुल विपरीत है, जहाँ औद्योगिक उन्नयन ने आय में वृद्धि सुनिश्चित की थी; यह स्थिति भारत की वर्तमान ‘श्रम-पूँजी’ विकास-यात्रा की सीमाओं को भी स्पष्ट करती है।

गुण: भारत बनाम पूर्वी एशिया

उपशीर्षक भारत पूर्व एशिया
लागत लाभ कम मजदूरी श्रम-प्रधान उद्योगों को आकर्षित करती है।

उदाहरण: नोएडा की इकाइयों में ₹13,000–15,000 की मजदूरी ने निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को संभव बनाया।

शुरुआत में, निर्यात के लिए कम मजदूरी का लाभ उठाया गया। 

उदाहरण के लिए: कम मजदूरी व्यवस्था के तहत दक्षिण कोरिया की शुरुआती निर्यात-आधारित वृद्धि।

निर्यात प्रोत्साहन कुल मिलाकर विनिर्माण निर्यात में वृद्धि।

उदाहरण: सरकारी आँकड़े इलेक्ट्रॉनिक्स (PLI योजना) जैसे क्षेत्रों में निर्यात में स्थिर वृद्धि दर्शाते हैं।

निर्यात-आधारित सशक्त औद्योगीकरण।

उदाहरण: वियतनाम 31 अरब डॉलर का परिधान निर्यातक बन गया।

नीतिगत समर्थन PLI जैसी लक्षित योजनाएँ विभिन्न क्षेत्रों को बढ़ावा देती हैं।

उदाहरण: भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का विस्तार।

रणनीतिक औद्योगिक नीति।

उदाहरण: दक्षिण कोरिया ने कंपनियों को व्यवस्थित रूप से वैल्यू चेन में आगे बढ़ाया।

श्रम आपूर्ति विशाल कार्यबल विस्तार की संभावना सुनिश्चित करता है।

उदाहरण: कृषि क्षेत्र से स्थानांतरित होता अतिरिक्त श्रम।

अनुशासित कार्यबल ने तीव्र औद्योगीकरण में सहायता की।

उदाहरण: ताइवान के श्रम-प्रधान उद्योग।

वैश्विक एकीकरण वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण।

उदाहरण: नोएडा-गुरुग्राम बेल्ट का निर्यात बाजारों से जुड़ाव।

उन्नयन के साथ गहन वैश्विक एकीकरण।

उदाहरण: पूर्वी एशियाई कंपनियाँ GVCs में उच्च स्तर पर पहुँचीं।

दोष: भारत बनाम पूर्वी एशिया

उपशीर्षक भारत पूर्व एशिया
उत्पादकता का जाल लगातार कम उत्पादकता वेतन वृद्धि को सीमित करती है।

उदाहरण: एक दशक लंबा आर्थिक धीमापन।

शुरुआती चरण में कम उत्पादकता के साथ, सरकार की ओर से जोरदार प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।

उदाहरण: निम्न-स्तरीय जाल से बाहर निकलने के लिए, दक्षिण कोरिया को एक आक्रामक औद्योगिक नीति की जरूरत पड़ी थी।

मजदूरी का तनाव वास्तविक मज़दूरी स्थिर है या उसमें गिरावट आ रही है।

उदाहरण: वर्ष 2019–23 के दौरान, महँगाई की दर मजदूरी की दर से अधिक रही।

शुरुआती दौर में मजदूरी पर लगाई गई रोक से श्रमिकों के कल्याण को नुकसान पहुँचा।

उदाहरण: दक्षिण कोरिया में सरकारी नियंत्रण के तहत मजदूरी को जान-बूझकर बाजार दर से कम रखा गया।

श्रम अधिकार अनौपचारीकरण, संविदाकरण, कमजोर प्रवर्तन।

उदाहरण: नोएडा में 12-घंटे की शिफ्ट, बिना वेतन के ओवरटाइम।

शुरुआती चरणों में श्रमिकों का कठोर दमन।

उदाहरण: कोरिया में स्वतंत्र यूनियनों पर प्रतिबंध और हड़तालें अवैध थीं।

असमानता की कीमत विकास के लाभ असमान हैं और सामाजिक सुरक्षा सीमित है।

उदाहरण: बढ़ती महँगाई के कारण ₹13–15 हजार की आय पर दबाव पड़ रहा है।

तेज आर्थिक विकास के दौरान भारी असमानता और श्रमिकों का शोषण।

उदाहरण: ताइवान और कोरिया के निर्यात क्षेत्रों में फैक्टरियों की कठोर परिस्थितियाँ।

बाहरी निर्भरता श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता का कमजोर होना।

उदाहरण: बांग्लादेश की तुलना में कपड़ों का निर्यात स्थिर रहा।

वैश्विक माँग पर अत्यधिक निर्भरता से कमजोरी उत्पन्न होती है।

उदाहरण: पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक व्यापार के झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं (जैसे, वर्ष 1997 का एशियाई वित्तीय संकट)।

आगे की राह

  • उत्पादकता में वृद्धि: संधारणीय वेतन वृद्धि को सक्षम करने के लिए तकनीक अपनाने और कौशल विकास के माध्यम से विनिर्माण उत्पादकता को बढ़ाना।
    • उदाहरण: भारत का आर्थिक सर्वेक्षण उच्च वास्तविक वेतन के लिए उत्पादकता-आधारित विकास को प्रमुख मानता है।
  • मूल्य उन्नयन: वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के भीतर कम मूल्य वाली असेंबली से हटकर उच्च-मूल्य वाले डिजाइन, नवाचार और ब्रांडिंग की ओर बढ़ना।
    • उदाहरण: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे अनुसंधान एवं विकास (R&D) गहन क्षेत्रों में ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन’ (PLI) योजनाओं का असेंबली से आगे विस्तार करना।
  • श्रम सुधार: कार्यस्थलों पर गरिमा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा श्रम कानूनों के सख्त प्रवर्तन को प्राथमिकता देना।
  • वेतन वृद्धि: समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए वेतन वृद्धि को उत्पादकता में सुधार के साथ जोड़ना।
    • उदाहरण: दक्षिण कोरिया जैसी पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ वास्तविक वेतन में वृद्धि हासिल की।
  • सामाजिक सहायता: श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किफायती आवास, स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक सेवाओं जैसे कल्याणकारी उपायों को मजबूत करना।
    • उदाहरण: पूर्वी एशियाई मॉडलों ने व्यापक सार्वजनिक आवास सहायता प्रदान की, जिससे औद्योगिक श्रमिकों पर जीवनयापन की लागत का दबाव कम हुआ।

निष्कर्ष

विकसित भारत 2047 के लिए, भारत को कम मजदूरी वाली प्रतिस्पर्द्धात्मकता से हटकर उत्पादकता-आधारित और श्रमिक-केंद्रित विनिर्माण की ओर बढ़ना चाहिए। यह SDG 8 और SDG 9 के अनुरूप समान विकास, औद्योगिक लचीलापन और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

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