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Q. "गुरु आचरण" (शिक्षक के आचरण) को खण्डित करने की हालिया घटनायें, शिक्षाशास्त्र पर एक बड़ा सवाल हैं। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये । (250 शब्द, 10 अंक)

September 14, 2023

GS Paper IIIndian Polity

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • परिचय: भारतीय संस्कृति और शिक्षा में “गुरु आचरण” के पारंपरिक महत्व का हवाला देकर संदर्भ स्थापित कीजिए।
  • मुख्य विषयवस्तु
    • पारंपरिक भारतीय संस्कृति में शिक्षकों की पूजनीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उल्लिखित घटना के साथ तुलनात्मक चर्चा कीजिए।
    • निजी शैक्षिक उद्यमों में निरीक्षण एवं गुणवत्ता से संबंधित कमियों पर गहराई से चर्चा कीजिए।
    • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में विधायी प्रयासों और नैतिक शिक्षाशास्त्र सुनिश्चित करने में उनकी प्रभावशीलता पर टिप्पणी कीजिए।
    • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और लोकाचार की जाँच करें, साथ ही नैतिकता और बाल मनोविज्ञान पर शिक्षकों की भूमिका की जाँच कीजिए।                                                
    • केवल बुनियादी ढांचे की जाँच से परे, स्कूलों में शिक्षण अध्यापन और नैतिकता की निगरानी के लिए तथा कठोर तंत्र की आवश्यकता पर तर्क प्रस्तुत कीजिए ।
    • वास्तविक उदाहरणों के साथ तर्क को सुदृढ़ करें, जो मुद्दे को संबोधित करने की तात्कालिकता पर प्रकाश डालता हो।
  • निष्कर्ष: नैतिक और गुणात्मक शिक्षाशास्त्र सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण पद्धतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और निगरानी तंत्र की व्यापक समीक्षा की वकालत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

परिचय:

शिक्षक-छात्र सम्बन्ध की पवित्रता को भारतीय परंपरा में गहराई से सम्मानित किया गया है, जिसे अक्सर  “गुरु आचरण” शब्द से जाना जाता है। हालाँकि, हाल की घटनाओं, जैसे कि उत्तर प्रदेश में एक शिक्षिका ने छात्रों को अपने सहपाठी को थप्पड़ मारने के लिए मजबूर किया, ने इस प्रतिष्ठित संस्थान पर एक काली छाया डाली। यह व्यवहार में शिक्षण पद्धतियों और नैतिक मानकों के साथ उनके संरेखण के बारे में गंभीर चिंताएँ पैदा करता है।   

मुख्य विषयवस्तु:

आदर्श बनाम हकीकत:

  • आदर्श: भारतीय शिक्षा प्रणाली परंपरागत रूप से गुरु या शिक्षक को ऊंचे स्थान पर रखती है और उनसे सद्गुण, धैर्य तथा  ज्ञान के प्रतिमान होने की उम्मीद करती है।
  • वास्तविकता: उत्तर प्रदेश की घटना इस आदर्श से बिल्कुल अलग विचलन का उदाहरण है। एक शिक्षक, रक्षक और पोषणकर्त्ता होने के बजाय, आघात करने वाला वाहक बन गया।

शैक्षिक उद्यमिता” के निहितार्थ:

  • यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि एक शिक्षिका अपना निजी स्कूल चला रही है, जिसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है लेकिन संभवतः वहाँ निरीक्षण की कमी है।
  • ऐसे उद्यमशील शैक्षिक प्रयास, शिक्षा तक पहुंच प्रदान करते समय, व्यावसायिक दबाव या उचित प्रशिक्षण की कमी के कारण गुणवत्ता, नैतिकता और आचरण से समझौता कर सकते हैं।

आरटीई अधिनियम के मानकों के साथ खिलवाड़:

  • गौरतलब है कि आरटीई अधिनियम ने बुनियादी ढांचे और शिक्षक योग्यता के लिए मानक निर्धारित किए हैं, किन्तु इस मामले को देखते हुए कहा जा सकता है कि शैक्षणिक नैतिकता जैसे गुणात्मक पहलुओं को दरकिनार कर दिया गया होगा। 
  • इस अधिनियम का प्रभाव कम होता जा रहा है, जैसा कि मान्यता प्राप्त स्कूलों में इस तरह की घटनाओं से पता चलता है।

शिक्षक प्रशिक्षण में कमियाँ:

  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम विषय के ज्ञान और शिक्षण तकनीकों पर जोर दे सकते हैं, किन्तु नैतिकता, सहानुभूति और बाल मनोविज्ञान जैसे क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है।
  • उत्तर प्रदेश की घटना इस बात पर चिंता पैदा करती है कि ऐसे शिक्षक कहाँ प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, इन कार्यक्रमों की सामग्री और लोकाचार क्या हैं।

जवाबदेही और निरीक्षण:

  • सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे की भलाई और शैक्षणिक नैतिकता के सभी पहलुओं का अनुपालन किया जाए।
  • यह घटना कठोर निगरानी तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित करती है जो बुनियादी ढांचे की जाँच से परे शैक्षणिक प्रथाओं और नैतिक मानकों को शामिल करती है।

नैतिक आचरण से विचलन के उदाहरण:

  • उत्तर प्रदेश का मामला एक ज्वलंत उदाहरण के रूप में सामने आया है। हालाँकि, स्कूलों में मौखिक दुर्व्यवहार, मनोवैज्ञानिक पीड़ा, या कदाचार के अन्य रूपों की अनगिनत असूचित घटनाएँ हो सकती हैं।
  • इस तरह की हरकतें न केवल छात्रों को भावनात्मक रूप से डराती हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की बुनियाद पर भी सवाल उठाती हैं।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में घटित इस घटना ने शिक्षण पेशे की मूलभूत नैतिकता को चुनौती देने वाली घटनाओं को उजागर किया है,जो यह दिखाता है किगुरु आचरण” का पवित्र आदर्श खतरे में है। विदित हो कि आरटीई अधिनियम जैसे नीतिगत उपायों का उद्देश्य शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाना है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि यह पहुंच गुणवत्ता और नैतिकता की कीमत पर न हो। जैसे-जैसे भारत अपनी शैक्षिक यात्रा में आगे बढ़ रहा है, गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता को संरक्षित किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षण शिक्षाशास्त्र, प्रशिक्षण मॉड्यूल और निरीक्षण तंत्र की व्यापक समीक्षा की जा सके।

Teaching pedagogy is a big question on the recent incidences of breaking “Guru Aacharan” (Teacher’s conduct). Critically Analyze. in hindi

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