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Q. भारत की दशकीय जनसंख्या जनगणना आयोजित करने में विलम्ब संघीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता से संबंधित गंभीर चिंताओं को जन्म देती है। कल्याणकारी योजनाओं और चुनावी परिसीमन पर जनगणना को स्थगित करने के प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 6, 2025

GS Paper IIGovernanceIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • संघीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता के संबंध में भारत की दशकीय जनसंख्या का सर्वेक्षण करने में देरी के कारण होने वाली चिंताओं पर प्रकाश डालिये।
  • जनगणना को स्थगित करने से कल्याणकारी योजनाओं और निर्वाचन परिसीमन पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा कीजिये।

उत्तर

दशकीय जनसंख्या जनगणना में विलम्ब, जो मूल रूप से वर्ष 2021 के लिए निर्धारित थी अब वर्ष 2027 तक स्थगित कर दी गई है गंभीर चिंता उत्पन्न करती है। यह स्थगन संघीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक समानता, कल्याण वितरण और चुनावी परिसीमन को प्रभावित करता है  जिससे शासन और संसाधन वितरण की सटीकता और निष्पक्षता को खतरा है।

चिंताएँ: संघीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता

संघीय प्रतिनिधित्व

  • विषम सीट आवंटन: जनगणना में विलम्ब से समय पर परिसीमन नहीं हो पाता है, जिससे जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुराना वितरण बरकरार रहता है। 
    • उदाहरण के लिए: तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को सीटें खोने का जोखिम है, जबकि उत्तरी राज्यों को लाभ हो सकता है, जिससे तर्कसंगत संतुलन बिगड़ सकता है।
  • गलत आवंटन को बढ़ावा: वर्ष 2011 के आंकड़ों का लगातार इस्तेमाल असमानताओं को बढ़ाता है, धीमी गति से बढ़ने वाले क्षेत्रों के लिए प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है। 
    • उदाहरण: अनुमानों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश को +21 सीटें मिलेंगी  जबकि केरल और तमिलनाडु को -16 सीटें तक का नुकसान हो सकता है।
  • आरक्षित सीटों में गड़बड़ी: जनगणना में विलम्ब से SC/ST कोटा प्रभावित होता है जिससे वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है। 
    • उदाहरण: वर्ष 2011 के आंकड़ों के आधार पर पुनर्निर्धारण से 18 SC/ST सीटों का अनुपात प्रभावित होता है।
  • संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन: संविधान के अनुसार प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाना चाहिए, इसे स्थगित करना संघीय सिद्धांतों को कमजोर करता है। 
    • उदाहरण: परिसीमन पर ऐतिहासिक रोक वर्ष 2026 में समाप्त हो रही है  लेकिन नई जनगणना न होने के कारण कोई नया डेटा उपलब्ध नहीं है।

सामाजिक समता

  • संसाधनों का गलत आवंटन: जनसंख्या डेटा से जुड़ी कल्याणकारी योजनाएं, लाभों को गलत दिशा में ले जा सकती हैं, जिससे सामाजिक न्याय को नुकसान पहुंच सकता है। 
    • उदाहरण: विलम्ब से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों से लगभग 100 मिलियन लोग वंचित रह सकते हैं।
  • कल्याणकारी कार्यक्रमों में लक्ष्यीकरण संबंधी त्रुटियाँ: NFSA-PDS जैसे कार्यक्रम सटीक जनगणना आंकड़ों पर निर्भर करते हैं एवं देरी से अकुशलता उत्पन्न होती है।
  • आवासहीन एवं प्रवासी सत्यापन मुद्दे: समय का गलत संरेखण आवास एवं प्रवास सर्वेक्षणों को बाधित करता है जिससे शहरी नियोजन प्रभावित होता है।
  • डिजिटल डिवाइड: डिजिटल जनगणना के क्रियान्वयन से इंटरनेट एक्सेस की कमी वाले संवेदनशील समूहों को बाहर करने का जोखिम है। 
    • उदाहरण: ऐप्स पर बड़े पैमाने पर निर्भरता डिजिटल रूप से वंचित समुदायों की अनदेखी कर सकती है।

निहितार्थ: कल्याणकारी योजनाएं और चुनावी परिसीमन

कल्याणकारी योजनाएँ

  • सब्सिडी का गलत वितरण: पुराने आंकड़ों के कारण सब्सिडी कार्यक्रमों में अधिक या कम समावेश हो जाता है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा योजना: अद्यतन जनसांख्यिकीय जानकारी का अभाव प्रभावी संसाधन आवंटन में बाधा डालता है। 
    • उदाहरण: स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे की योजना सटीक जनसंख्या डेटा पर निर्भर करती है।
  • महिला आरक्षण में विलम्ब: उचित परिसीमन के बिना विधानसभा में एक तिहाई कोटा का कार्यान्वयन अवरुद्ध हो गया है।
  • डेटा-संचालित नीति कमजोर होना: वर्तमान जाति, OBC डेटा के बिना नीति डिजाइन में मजबूती की कमी है।

निर्वाचन परिसीमन

  • विलंबित पुनर्वितरण: निर्वाचन क्षेत्र असंतुलित बने हुए हैं, जिससे समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है।
  • क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन: उत्तरी राज्यों को सीटें मिलने की संभावना से दक्षिणी राज्यों का प्रभाव घट सकता है। 
    • उदाहरण: एमके स्टालिन जैसे राजनीतिक नेताओं ने दक्षिणी राज्यों के हाशिए पर जाने का विरोध किया।
  • जातीय और जातिगत कमियाँ: पुरानी जनगणना के आंकड़ों में जनसंख्या के अनुसार SC/ST आरक्षण का गलत चित्रण किया गया है। 
    • उदाहरण: लगभग 18 आरक्षित सीटें दक्षिणी राज्यों से कम हो सकती हैं।
  • प्रतियोगिता और राजनीतिक अशांति: जनसांख्यिकीय असंतोष राष्ट्रीय तनाव को बढ़ा सकता है। 
    • उदाहरण: दक्षिणी राज्य गठबंधन परिसीमन योजनाओं का विरोध करते हैं, उत्तर-दक्षिण विभाजन की चेतावनी देते हैं।

दशकीय जनगणना में विलम्ब संघीय प्रतिनिधित्व को कमजोर करती है, सामाजिक समानता को बाधित करती है व कल्याणकारी योजनाओं को गलत दिशा में ले जाती है और चुनावी परिसीमन को रोकती है। डिजिटल निष्पादन एवं जातिगत डेटा के साथ वर्ष 2026-27 में तेजी से संचालन, न्यायसंगत शासन, संसाधन आवंटन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण है।

The delay in conducting India’s decadal population census raises critical concerns related to federal representation, and social equity. Discuss the implications of postponing the Census on welfare schemes and electoral delimitation. in hindi

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