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Q. गिग इकॉनमी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिक शोषण का एक आधुनिक रूप प्रस्तुत करती है। जाँच कीजिए कि यह भारत में सामाजिक-आर्थिक समानता, श्रम अधिकारों और शासन संबंधी ढाँचे को कैसे प्रभावित करता है। नवाचार और श्रमिक सुरक्षा दोनों को संबोधित करते हुए व्यापक समाधान सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

March 19, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • इस बात पर प्रकाश डालिये कि किस प्रकार गिग इकॉनमी  डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिक शोषण का आधुनिक रूप प्रस्तुत करती है।
  • परीक्षण कीजिए कि इसका भारत में सामाजिक-आर्थिक समता, श्रम अधिकारों और शासन ढाँचे पर क्या प्रभाव पड़ता है।
  • नवाचार और श्रमिक संरक्षण दोनों को संबोधित करते हुए व्यापक समाधान सुझाइये।

उत्तर

गिग इकॉनमी का तात्पर्य ऐसे श्रम बाजार से है जिसमें अल्पकालिक, लचीली नौकरियाँ होती हैं, जिन्हें अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मध्यस्थ किया जाता है जो श्रमिकों को ग्राहकों से जोड़ते हैं। जबकि यह सुविधा और स्वायत्तता प्रदान करता है, यह श्रम शोषण को भी बढ़ावा देता है। भारत का गिग कार्यबल जिसके वर्ष 2024-25 तक 1 करोड़ से अधिक और वर्ष 2029-30 तक 2.35 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है (नीति आयोग), नौकरी की सुरक्षा और उचित वेतन को लेकर बढ़ती चिंताओं का सामना कर रहा है।

गिग इकॉनमी श्रम शोषण का आधुनिक रूप प्रस्तुत करती है

  • डिजिटल बिचौलियों का नियंत्रण: अर्बन कंपनी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल ठेकेदारों के रूप में कार्य करते हैं, जो नियोक्ता की जिम्मेदारियों से बचते हुए वेतन और कार्यदशाओं को नियंत्रित करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: बेंगलुरु में स्विगी डिलीवरी कर्मचारियों ने वर्ष 2022 में मनमाने वेतन कटौती और डिलीवरी लक्ष्य में वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें वेतन पारदर्शिता की कमी पर प्रकाश डाला गया।
  • रेस टू बॉटम: गिग कर्मचारी कम वेतन वाले कार्य के लिये प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिसमें प्लेटफॉर्म भुगतान को न्यूनतम करने और लाभ को अधिकतम करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: भारत में ओला और उबर चालकों के, प्रति किलोमीटर किराये में समय के साथ काफी कमी आई है, बावजूद इसके कि ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे वे वित्तीय संकट में फंस गए हैं।
  • सामाजिक सुरक्षा का अभाव: गिग श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या सवेतन अवकाश जैसी सुविधाओं का अभाव होता है, जिससे वे आपात स्थितियों में असुरक्षित हो जाते हैं।
    • उदाहरण के लिए: ऑल इंडिया गिग वर्कर्स यूनियन (AIGWU) ने गिग श्रमिकों को बिना किसी मुआवजे के ड्यूटी पर मरने की कई घटनाओं के बाद श्रम कानूनों के तहत मान्यता देने की माँग की है।
  • कोई शिकायत निवारण नहीं: अस्पष्ट एल्गोरिदम और स्वतंत्र विवाद समाधान की कमी के कारण श्रमिक गलत बर्खास्तगी या अनुचित व्यवहार से संबंधित मामलों को चुनौती नहीं दे सकते।
    • उदाहरण के लिए: Urban कंपनी के सौंदर्य सेवा पेशेवरों ने वर्ष 2021 में अचानक कमीशन वृद्धि और बिना स्पष्टीकरण के खातों को निष्क्रिय करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
  • अधिकारों पर जबरन रेटिंग: श्रमिकों को रोजगार स्थिरता के लिए उचित अनुबंधों और सुरक्षा के बजाय अच्छी ग्राहक रेटिंग प्राप्त करनी  होती है।
    • उदाहरण के लिए: कई जोमैटो और स्विगी डिलीवरी बॉय ने बताया कि अगर उनकी रेटिंग एक सीमा से नीचे चली जाती है, तो उन्हें दंडित किया जाता है, यहाँ तक कि भोजन तैयार होने में देरी जैसी उनकी नियंत्रण से बाहर की समस्याओं के लिए भी।

सामाजिक-आर्थिक समानता, श्रम अधिकार और शासन पर प्रभाव

पहलू प्रभाव
सामाजिक-आर्थिक समता
  • आय असमानताएँ बढ़ती हैं: कमीशन आधारित कटौतियों और असंगत कार्य उपलब्धता के कारण गिग श्रमिकों की आय कम हो जाती है।
    उदाहरण के लिए: भारतीय ऐप-आधारित परिवहन श्रमिक महासंघ (IFAT) द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि कई उबर/ओला चालक खर्चों के बाद न्यूनतम वेतन से भी कम कमाते हैं।
  • लैंगिक और वर्ग विभाजन: गिग कार्य में लगी कई महिलाओं को न्यूनतम सुरक्षा के साथ इंस्टा मेड जैसी कम वेतन वाली घरेलू सेवाओं में कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता है।
    उदाहरण के लिए: दिल्ली में घरेलू कामगारों ने बताया कि उन्हें प्लेटफार्मों से बिना किसी आपातकालीन सहायता या पैनिक बटन के असुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
श्रम अधिकार
  • कर्मचारी का दर्जा न देना: कंपनियाँ इस बात पर बल देती हैं कि गिग कर्मचारी पार्टनर बने रहें तथा उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा या नौकरी की सुरक्षा से वंचित रखा जाता है।
    उदाहरण के लिए: कर्नाटक के गिग वर्कर कानून के मसौदे को तब रोक दिया गया जब NASSCOM ने उन्हें कर्मचारी के रूप में मान्यता देने के खिलाफ पैरवी की।
  • सामूहिक सौदेबाजी का अभाव: डिजिटल प्रणालियों के कारण गिग कर्मचारी अलग-थलग पड़ जाते हैं, जिससे वे यूनियन बनाने या बेहतर शर्तों पर वार्ता करने में असमर्थ हो जाते हैं।
शासन ढाँचा
  • कमजोर विनियमन और नीतिगत अंतराल: गिग श्रमिकों के लिए सुरक्षा संबंधी कानून बनाने में देरी से शोषणकारी व्यवसाय मॉडल को पनपने का मौका मिलता है।
    उदाहरण के लिए: सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) में गिग श्रमिकों का उल्लेख है, लेकिन कार्यान्वयन में स्पष्टता का अभाव है, जिससे इसके वास्तविक लाभ प्राप्त करने में देरी हो रही है।
  • नीति पर कॉर्पोरेट प्रभाव: तकनीकी स्टार्टअप श्रम अधिकारों को कमजोर करने के लिए सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं, जिससे जवाबदेही सीमित हो जाती है।
    उदाहरण के लिए: Urban कंपनी के संस्थापक ने श्रम विनियमनों का विरोध किया, जबकि वे अपनी कंपनी की मार्केटिंग, श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने वाली कंपनी  के रूप में करते हैं।

नवाचार और श्रमिक सुरक्षा के लिए व्यापक समाधान

  • अनिवार्य न्यूनतम वेतन: प्लेटफॉर्म को उचित न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना चाहिए, जिसमें ईंधन, रखरखाव और मुद्रास्फीति से जुड़े समायोजन शामिल हों।
    • उदाहरण के लिए: ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायलय  ने 2021 में निर्णय दिया कि उबर ड्राइवर श्रमिक हैं, स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर नहीं जिससे उन्हें न्यूनतम वेतन और अवकाश वेतन पाने का अधिकार मिला।
  • सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स को ESI, PF और दुर्घटना बीमा के तहत कवर किया जाना चाहिए, जिसका वित्तपोषण प्लेटफॉर्म योगदान से किया जाना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: राजस्थान के गिग वर्कर्स कल्याण विधेयक (2023) में कल्याण उपकर के लिए 1% -2% एग्रीगेटर योगदान अनिवार्य किया गया है।
  • स्वतंत्र शिकायत तंत्र: गिग वर्कर्स के लिए एक लोकपाल की स्थापना करनी चाहिए ताकि वे अनुचित निष्क्रियता और वेतन कटौती को चुनौती दे सकें। 
    • उदाहरण के लिए: स्पेन का ‘राइडर लॉ’ (2021) प्लेटफ़ॉर्म को श्रमिकों को प्रभावित करने वाले AI-संचालित निर्णयन का खुलासा करने के लिए बाध्य करता है।
  • पारदर्शी भुगतान एल्गोरिदम: प्लेटफार्मों को किराये का ब्यौरा बताना चाहिए, ताकि श्रमिकों को पता रहे कि आय की गणना कैसे की जाती है।
  • यूनियन बनाने का अधिकार: गिग वर्कर यूनियनों को मान्यता देनी चाहिए और उन्हें सामूहिक रूप से बेहतर वेतन और शर्तों पर बातचीत करने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: दिल्ली गिग वर्कर्स यूनियन ने वर्ष 2022 में स्विगी और जोमैटो डिलीवरी वर्कर्स पर अनुचित दंड के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

एक स्थायी गिग इकॉनमी  के भीतर  नवाचार को श्रमिक सुरक्षा, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के साथ संतुलित करना चाहिए। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, “किसी भी समाज का सही मापदंड यह है कि वह अपने सबसे कमजोर सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करता है।” श्रम कानूनों को मजबूत करना, एल्गोरिदम पारदर्शिता और सामूहिक सौदेबाजी, एक न्यायपूर्ण डिजिटल कार्यबल को आकार देगी।

The gig economy presents a modern iteration of labor exploitation through digital platforms. Examine how this impacts socio-economic equity, labor rights, and governance frameworks in India. Suggest comprehensive solutions addressing both innovation and worker protection. in hindi

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