प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत के वैश्विक आर्थिक पदचिह्न पर प्रभाव
- वैश्विक दक्षिण के साथ भारत के जुड़ाव पर प्रभाव
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उत्तर
2022 में भारत-यू.ए.ई. व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर ने भारत की बाहरी आर्थिक रणनीति में एक निर्णायक बदलाव को चिह्नित किया। व्यापार, निवेश और संपर्क में तेजी लाकर, CEPA सतर्क व्यापारिक जुड़ाव से सक्रिय आर्थिक कूटनीति की ओर भारत के संक्रमण को दर्शाता है, जो इसके वैश्विक पदचिह्न और वैश्विक दक्षिण की साझेदारियों को आकार दे रहा है।
भारत के वैश्विक आर्थिक पदचिह्न पर प्रभाव
- व्यापार की मात्रा और बाजार पहुँच का विस्तार: CEPA ने टैरिफ में कटौती की तथा बाजार पहुँच में सुधार किया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार वृद्धि में तेजी आई।
- उदाहरण: भारत-यू.ए.ई. व्यापार वर्ष 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले ही 100 अरब डॉलर को पार कर गया।
- ऊर्जा व्यापार से इतर विविधीकरण: यह साझेदारी तेल-केंद्रित संबंधों से निकलकर सेवाओं, फिनटेक और विनिर्माण जैसे गैर-तेल क्षेत्रों तक विस्तृत हुई है।
- उदाहरण: गैर-तेल व्यापार ~20% बढ़कर 65 अरब डॉलर हो गया, जो संरचनात्मक विविधीकरण को दर्शाता है।
- निवेश प्रवाह और पूँजी एकीकरण को बढ़ावा: CEPA ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और द्विपक्षीय पूँजी प्रवाह को सुगम बनाया।
- उदाहरण: भारत में यू.ए.ई. का निवेश 22 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जबकि भारतीय कंपनियों ने यू.ए.ई. में 16 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया।
- भारत को एक वैश्विक रसद और विमानन केंद्र के रूप में मजबूत बनाना: संपर्क सुगमता से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत के एकीकरण में सुधार होता है।
- उदाहरण: दोनों देशों के बीच प्रति सप्ताह 1,200 से अधिक उड़ानें इसे वैश्विक स्तर पर सबसे व्यस्त हवाई गलियारों में से एक बनाती हैं।
- भारत को एक विश्वसनीय आर्थिक भागीदार के रूप में स्थापित करना: CEPA उच्च गुणवत्ता वाले व्यापार समझौतों को संपन्न करने में भारत की विश्वसनीयता को प्रदर्शित करता है।
- उदाहरण: व्यापार लक्ष्यों की शीघ्र प्राप्ति, यूरोपीय संघ (EU) और अन्य भागीदारों के साथ बातचीत में भारत की स्थिति को मजबूत करती है।
वैश्विक दक्षिण के साथ भारत के जुड़ाव पर प्रभाव
- दक्षिण-दक्षिण आर्थिक सहयोग का मॉडल: यह गलियारा दर्शाता है कि कैसे नीतिगत संरेखण और निष्पादन विकास को गति दे सकते हैं।
- पश्चिम एशिया और अफ्रीका का प्रवेश द्वार: यू.ए.ई. एक पुनः-निर्यात और वित्तीय केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो भारत को व्यापक वैश्विक दक्षिण बाजारों से जोड़ता है।
- उदाहरण: यू.ए.ई. के बंदरगाहों के माध्यम से भेजे जाने वाले भारतीय सामान अफ्रीकी और मध्य पूर्वी बाजारों तक कुशलतापूर्वक पहुँचते हैं।
- प्रवासी-नेतृत्व वाली विकास कूटनीति: भारतीय प्रवासी लोगों से लोगों के बीच और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करते हैं।
- उदाहरण: यू.ए.ई. में लगभग पचास लाख भारतीय वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधों की रीढ़ हैं।
- नए आर्थिक गलियारों में भारत की भूमिका को मजबूत करना: CEPA एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाली व्यापक संपर्क पहलों के साथ संरेखित है।
- भारत के विकासात्मक नेतृत्व के विमर्श (Narrative) को सुदृढ़ करना: यह कॉरिडोर सहकारी पूँजी परिनियोजन और पारस्परिक आर्थिक लाभ को प्रदर्शित करता है।
निष्कर्ष
भारत-यू.ए.ई. CEPA यह दर्शाता है कि कैसे लक्षित व्यापार समझौते दक्षिण-दक्षिण सहयोग को गहरा करते हुए भारत की वैश्विक आर्थिक उपस्थिति को नया आकार दे सकते हैं। व्यापार विस्तार, निवेश प्रवाह और रणनीतिक कनेक्टिविटी को जोड़कर, ऐसी साझेदारियाँ एक उभरती हुई बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के भीतर विकास-उन्मुख शक्ति के रूप में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाती हैं।
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