प्रश्न की मुख्य माँग
- अनौपचारिक खाद्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियाँ।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता।
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उत्तर
भारत का अनौपचारिक खाद्य क्षेत्र सांस्कृतिक जीवंतता और आर्थिक आजीविका का प्रतीक तो है, लेकिन साथ ही यह सुरक्षा संबंधी खामियों से भी जूझ रहा है, जो जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती हैं। ये चिंताएँ अनौपचारिक विक्रेताओं और संगठित पैकेज्ड खाद्य उद्योग के बीच के बढ़ते अंतर को उजागर करती हैं, जिससे मौजूदा मानकों और नियामक निगरानी की तत्काल जाँच की माँग होती है।
अनौपचारिक खाद्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियाँ
- अनुपयुक्त स्वच्छता और संचालन पद्धतियाँ: अनियमित सड़क विक्रेता प्रायः दूषित पानी का उपयोग करते हैं, हाथों की स्वच्छता का अभाव रखते हैं, तथा बुनियादी स्वच्छता के बिना कार्य करते हैं।
- उदाहरण: चेन्नई में खाद्य सुरक्षा विभाग के छापे में पाया गया कि पानीपुरी विक्रेता असुरक्षित पानी का उपयोग कर रहे थे और अस्वास्थ्यकर तरीके से सामान बना रहे थे।
- खाद्य जनित बीमारियों की उच्च घटना: असुरक्षित खाना पकाने की पद्धतियाँ और मिलावटी सामग्री रोगों के बोझ को बढ़ाती है l
- उदाहरण: ORF विश्लेषण के अनुसार, प्रतिवर्ष 100 मिलियन खाद्य जनित बीमारियाँ और 1,20,000 मौतें होती हैं, जो मुख्यतः अनौपचारिक खाद्य स्रोतों से जुड़ी हैं।
- असुरक्षित खाना पकाने के तरीके: तेल के बार-बार इस्तेमाल से हानिकारक ट्रांस वसा और विषाक्त पदार्थ बनते हैं।
- उदाहरण: छोटे भोजनालयों में बार-बार गर्म किए गए तेल और अनुचित तरीके से खाना पकाने के कारण स्थानीय स्तर पर खाद्य विषाक्तता की घटनाएँ होती है।
- ट्रैसबिलिटी और जवाबदेही का अभाव: बिना पैकेज वाले खाद्य पदार्थों पर लेबलिंग, समाप्ति तिथि या स्रोत सत्यापन का अभाव होता है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण सीमित हो जाता है।
- उदाहरण: FSSAI पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में ट्रैसबिलिटी को लागू कर सकता है, लेकिन अनौपचारिक विक्रेता संरचित निगरानी से बाहर कार्य करते हैं।
- लागत में कटौती और मिलावट के लिए प्रोत्साहन: लाभ मार्जिन को अधिकतम करने के लिए सस्ते मिलावटी कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचे की आवश्यकता
- मानकीकृत राष्ट्रीय-स्तरीय विक्रेता प्रशिक्षण: अनिवार्य स्वच्छता प्रमाणन सुरक्षित खाद्य प्रबंधन में कौशल अंतराल को कम कर सकता है।
- उदाहरण: मुंबई में स्वच्छता, भंडारण और अपशिष्ट निपटान पर FSSAI-BMC प्रशिक्षण मॉड्यूल।
- सख्त प्रवर्तन और नियमित निरीक्षण: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या बढ़ाकर और समय-समय पर ऑडिट करके अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है।
- उदाहरण: चेन्नई में समन्वित बहु-एजेंसी निरीक्षणों से ऐसी प्रणालीगत खामियाँ सामने आईं, जिन्हें नियमित जाँच से रोका जा सकता था।
- अनौपचारिक विक्रेताओं का नियामक प्रणालियों में एकीकरण: औपचारिक पंजीकरण निगरानी, जवाबदेही और शिकायत निवारण को बढ़ाता है।
- उदाहरण: ईट राइट इंडिया और क्लीन स्ट्रीट फूड हब (CSFH) जैसी पहल, विक्रेताओं को रेटिंग-आधारित अनुपालन मॉडल के तहत एकीकृत करती हैं।
- निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग: विक्रेता पंजीकरण, स्वच्छता रेटिंग और उपभोक्ता रिपोर्टिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पारदर्शिता में सुधार कर सकते हैं।
- उदाहरण: महानगरों में भोजनालयों के लिए ऑनलाइन स्वच्छता रेटिंग उपभोक्ताओं को सुरक्षित विकल्प चुनने में मदद करती है।
- जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियान: उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य विकल्पों के बारे में शिक्षित करने से स्वच्छ विक्रेताओं की माँग को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण: त्योहारों के दौरान सुरक्षित भोजन को बढ़ावा देने के लिए FSSAI के नेतृत्व में देशव्यापी अभियान।
निष्कर्ष
संदूषण और खाद्य जनित बीमारियों के बढ़ते मामले व्यवस्थित सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए निगरानी को मजबूत करना, विक्रेताओं के प्रशिक्षण का विस्तार करना और एक समान प्रोटोकॉल लागू करना आवश्यक है। सुरक्षित खाद्य पदार्थों को सुनिश्चित करने में देरी नहीं की जा सकती, इसलिए भारत को जन स्वास्थ्य की सुरक्षा और विश्वास बहाल करने के लिए नियामक सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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