Q. रूस और यूक्रेन के बीच पिछले सात महीने से युद्ध चल रहा है. विभिन्न देशों ने अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रुख और कार्रवाई की है। हम सभी जानते हैं कि युद्ध का समाज के विभिन्न पहलुओं पर अपना प्रभाव पड़ता है, जिसमें मानवीय त्रासदी भी शामिल है। वे कौन से नैतिक मुद्दे हैं जिन पर युद्ध शुरू करते समय और उसके जारी रहने पर विचार किया जाना महत्वपूर्ण है? दिए गए मामले की स्थिति में शामिल नैतिक मुद्दों का औचित्य सहित वर्णन करें। (150 शब्द, 10 अंक)

July 6, 2023

GS Paper IVEthics, Integrity and Aptitude

उत्तर:

                   प्रश्न को हल करने का दृष्टिकोण:

  • प्रस्तावना: प्रश्न के संदर्भ के अनुसार संक्षिप्त प्रस्तावना लिखते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए।
  • मुख्य विषयवस्तु:
    1. रूस और यूक्रेन युद्ध में शामिल नैतिक मुद्दों का उल्लेख करें।
    2. उत्तर की पुष्टि के लिए इसके निहितार्थ बताईये।
  • निष्कर्ष: प्रासंगिक कथनों या वर्तमान संदर्भ तथा निहितार्थों के आधार पर निष्कर्ष निकालें।

प्रस्तावना:

रूस और यूक्रेन के बीच सात महीने से चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप विनाशकारी मानवीय संकट की स्थिति उत्पन्न होने के साथ कई नैतिक चिंताएँ उत्पन्न हुई। चूंकि विभिन्न देशों ने अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाने के साथ कार्रवाई की , इसलिए युद्ध की शुरुआत और निरंतरता से जुड़े नैतिक मुद्दों का आकलन किया जाना आवश्यक हो जाता है।

मुख्य विषयवस्तु:

यूक्रेन रूस युद्ध में शामिल नैतिक मुद्दे:-

  • प्राथमिक नैतिक मुद्दों में से एक गैर-हस्तक्षेप का सिद्धांत है , जो किसी राष्ट्र को बल प्रयोग करने या अन्य राष्ट्रों के मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकता है। जबकि कुछ देश यह तर्क दे सकते हैं कि मानवाधिकारों की रक्षा करने और आगे के संघर्ष को रोकने के लिए हस्तक्षेप आवश्यक है, इसे संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा सकता है।
  • एक अन्य नैतिक मुद्दा आनुपातिकता का सिद्धांत है , जिसके तहत आवश्यक है कि बल का उपयोग सैन्य उद्देश्य के लिए व्यवहारिक हो और इसमें निर्दोष नागरिकों को अत्यधिक नुकसान न पहुँचाए। रूस-यूक्रेन संघर्ष के मामले में, जन धन के नुकसान की खबरें आई हैं, जिससे इस बात पर चिंता बढ़ गई है कि क्या बल का उपयोग आनुपातिक है।
  • इसके अतिरिक्त , भेदभाव के सिद्धांत , जिसके तहत यह आवश्यक है कि बल का उपयोग केवल वैध सैन्य लक्ष्यों पर किया जाए और नागरिकों को नुकसान न पहुँचाया जाए। इस युद्ध में आवासीय क्षेत्रों और अस्पतालों जैसे नागरिक क्षेत्रों पर हमलों के आरोप लगाए गए हैं, जिससे निर्दोष लोगों की जान चली गई और आवश्यक बुनियादी अवसंरचना को नुकसान हुआ है।
  • इस संघर्ष का मानवाधिकारों और मानवीय स्थिति पर होने वाला प्रभाव भी एक महत्वपूर्ण नैतिक मुद्दा है। इस संघर्ष के कारण शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों सहित लाखों लोगों का विस्थापन हुआ है। इसके साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन, अवैध हिरासत, यातना और अवैध हत्याओं के भी मामले सामने आए है।
  • इसके अलावा, इस संघर्ष के आर्थिक और पर्यावरणीय परिणाम भी नैतिक चिंता का विषय हैं। इस संघर्ष से व्यापार बाधित हुआ, बुनियादी अवसंरचना को क्षति पहुंची, तेल रिसाव  होने से पर्यावरणीय क्षति  भी हुई , जिससे दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय परिणाम उत्पन्न हुए हैं।

निष्कर्ष:

रूस-यूक्रेन संघर्ष  में बल प्रयोग, मानवाधिकार और मानवीय स्थिति के साथ-साथ आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों से संबंधित कई नैतिक मुद्दे शामिल है। इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए इन नैतिक मुद्दों पर विचार करना और एक शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना महत्वपूर्ण है जिसमें मानवाधिकारों का सम्मान होने के साथ नागरिको की क्षति को कम किया जा सके।

The Russia and Ukraine war has been going on for the last seven months. Different countries have taken independent stands and actions keeping in view their own national interests. We are all aware that war has its own impact on the different aspects of society, including human tragedy. What are those ethical issues that are crucial to be considered while launching the war and its continuation so far? Illustrate with justification the ethical issues involved in the given state of affair. In Hindi

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