UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. हाल ही में एक निर्णय में, सर्वोच्च न्यायालय ने मासिक धर्म स्वास्थ्य तक पहुँच को संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता दी और स्कूलों में इसके क्रियान्वयन की निगरानी और सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। संवैधानिक अधिकारों को वास्तविक स्तर पर लागू करने में ऐसे न्यायालय-निर्देशित प्रवर्तन की प्रभावशीलता और चुनौतियों को उजागर कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

February 3, 2026

GS Paper IISocial Justice

प्रश्न की मुख्य माँग

  • न्यायालय द्वारा प्रवर्तन की प्रभावशीलता
  • अधिकारों को परिणामों में बदलने में चुनौतियाँ।

उत्तर

डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार (2026) के ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने गरिमापूर्ण मासिक धर्म स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद-21) और शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21A) का एक अभिन्न अंग घोषित किया है। मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) को एक संवैधानिक अनिवार्यता के रूप में स्थापित करते हुए, न्यायालय ने इस विमर्श को “वैकल्पिक कल्याण” से “लागू करने योग्य अधिकार” की ओर स्थानांतरित कर दिया है। यह निर्णय उस संरचनात्मक बहिष्कार को संबोधित करता है, जिसके कारण भारत में सालाना लगभग 23 मिलियन (2.3 करोड़) लड़कियाँ स्कूल छोड़ देती हैं।

न्यायालय द्वारा प्रवर्तन की प्रभावशीलता 

  • वास्तविक समानता का दृष्टिकोण: न्यायालय ने अनुच्छेद-14 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि असमानों के साथ समान व्यवहार करना भेदभाव को बढ़ाता है। इसलिए, समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए मुफ्त सैनिटरी उत्पादों जैसी सकारात्मक कार्रवाई को अनिवार्य किया गया।
    • उदाहरण: निर्णय सभी राज्यों को कक्षा 6-12 की लड़कियों को मुफ्त ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन प्रदान करने का निर्देश देता है।
  • अनिवार्य बुनियादी ढाँचा मानक: न्यायिक हस्तक्षेप ने MHM उपायों को RTE अधिनियम, 2009 की धारा 19 के तहत अनिवार्य “मानदंडों और मानकों” तक बढ़ा दिया है।
    • उदाहरण: निर्देशों में कार्यशील जल, साबुन और गोपनीयता-केंद्रित डिजाइनों (दिव्यांग बच्चों सहित) के साथ बालक और बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय शामिल हैं।
  • सतत् निगरानी तंत्र: सतत् परमादेश से यह सुनिश्चित होता है कि फैसला आने के बाद भी मामला समाप्त न माना जाए। न्यायालय प्रत्येक 3 महीने में अनुपालन की समीक्षा करेगा।
  • MHM कॉर्नर की स्थापना: स्कूलों को अब अतिरिक्त वर्दी, इनरवियर और डिस्पोजल बैग से लैस “आपातकालीन कॉर्नर” बनाए रखना आवश्यक है।
  • संस्थागत जवाबदेही: न्यायालय ने अनुपालन को स्कूल मान्यता से जोड़ा है। निजी स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि स्वच्छता सुविधाएँ प्रदान करने में विफल रहने पर उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
  • संवेदनशीलता और पाठ्यक्रम: NCERT और SCERTs को लिंग-संवेदनशील पाठ्यक्रम शामिल करने का निर्देश देकर, न्यायालय यौवन/तारुण्य के आस-पास के सामाजिक कलंक और “दबी हुई आवाजों” को लक्षित करता है।
    • उदाहरण: फैसला अनुपस्थिति का कारण बनने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए लड़कों और पुरुष शिक्षकों को शिक्षित करने पर जोर देता है।

अधिकारों को परिणामों में बदलने में चुनौतियाँ 

  • राजकोषीय और बजटीय अंतराल: हालाँकि न्यायालय ने मुफ्त उत्पादों को अनिवार्य किया है, किंतु इसका वित्तीय बोझ राज्य के बजट पर पड़ता है। अन्य प्राथमिकताओं के कारण अक्सर स्वच्छता के लिए वित्तपोषण की कमी हो जाती है।
  • रखरखाव और देखभाल: शौचालय बनाना एक बार की लागत है, किंतु ग्रामीण स्कूलों में कार्यशील जलापूर्ति और दैनिक सफाई सुनिश्चित करना एक लगातार बनी रहने वाली प्रशासनिक बाधा है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 के एक अध्ययन ने उजागर किया कि हालाँकि  90% स्कूलों में शौचालय हैं, लेकिन केवल 50% ही कार्यशील हैं या उनमें नियमित जलापूर्ति होती है।
  • पर्यावरणीय अपशिष्ट प्रबंधन: विकेंद्रीकृत, कम उत्सर्जन वाले इनसिनरेटर के बिना, प्रति माह लाखों सैनिटरी नैपकिन का निपटान एक बड़ी पारिस्थितिकी चुनौती प्रस्तुत करता है।
  • अंतिम-मील आपूर्ति शृंखला: दूरदराज, पहाड़ी या आदिवासी क्षेत्रों में पैड की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की आवश्यकता है, जिसमें वर्तमान में “अंतिम-मील” पहुँच का अभाव है।
  • गहरी जड़ें जमाए सांस्कृतिक वर्जनाएँ: न्यायिक आदेश स्कूल के नियमों को परिवर्तित  सकते हैं, लेकिन वे उन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे मिथकों को समाप्त करने में संघर्ष करते हैं, जो माहवारी  के दौरान गतिशीलता और आहार को प्रतिबंधित करते हैं।
  • नौकरशाही जड़ता: निरीक्षण के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) पर निर्भरता अक्सर “कागजी अनुपालन” की ओर ले जाती है, जहाँ शौचालय केवल निर्धारित दौरों के दौरान ही साफ किए जाते हैं।

निष्कर्ष

“न्यायिक आदेश” और “जमीनी हकीकत” के बीच की खाई को पाटने का समाधान समुदाय-आधारित निगरानी में निहित है। जैसा कि सुझाया गया है, गुप्त छात्र सर्वेक्षण आयोजित करने का न्यायालय का निर्देश एक महत्त्वपूर्ण पहला कदम है, किंतु वास्तविक सफलता के लिए एक “समग्र-समाज” दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें रखरखाव के लिए पंचायती राज संस्थाओं को एकीकृत करना, स्थानीय पैड उत्पादन के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्रोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि “गरिमा के साथ माहवारी का अधिकार” केवल कानून द्वारा नहीं, बल्कि स्थानीय सामाजिक चेतना द्वारा भी संरक्षित हो।

In a recent judgment, the Supreme Court recognised access to menstrual hygiene as a constitutional right and issued ongoing directions to monitor and ensure its implementation in schools. Highlight the effectiveness and challenges of such court-led enforcement in translating constitutional rights into on-ground outcomes. in hindi

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.