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Q. भारतीय युवाओं में हृदय रोगों में वृद्धि आनुवंशिक प्रवृत्ति से जीवनशैली-जनित कारकों की ओर संक्रमण को दर्शाती है। जीवनशैली के इन निर्धारकों पर चर्चा कीजिए और भारत की भविष्य की सहनशीलता को मजबूत करने के लिए निवारक रणनीतियाँ सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

September 29, 2025

GS Paper IISocial Justice

प्रश्न की मुख्य माँग

  • जीवनशैली के वे कौन से निर्धारक हैं, जिनके कारण युवा भारतीयों में हृदय रोगों में वृद्धि हुई है?
  • भारत की भविष्य की लचीलापन क्षमता को मजबूत करने के लिए निवारक रणनीतियों का प्रस्ताव दीजिए।

उत्तर

हालिया रिपोर्टों, जिनमें हेल्थ ऑफ द नेशन 2025 भी शामिल है, से पता चला है कि भारत में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के लगभग आधे रोगी 40 वर्ष से कम आयु के हैं। यह स्थिति आनुवंशिक प्रवृत्ति से जीवनशैली-जनित हृदय रोग जोखिमों की ओर चिंताजनक संक्रमण को दर्शाती है, विशेषकर ऐसे देश में जहाँ अधिकांश नागरिक 35 वर्ष से कम आयु के हैं।

युवा भारतीयों में हृदय रोगों की वृद्धि के जीवनशैली निर्धारक

  • निष्क्रिय दिनचर्या और लंबे कार्य घंटे: लगातार बैठने और शारीरिक गतिविधियों में कमी से युवाओं में हृदय स्वास्थ्य कमजोर हुआ है।
    • उदाहरण: आधुनिक सुविधाएँ और डेस्क-बाउंड जीवनशैली प्रमुख कारण बताए गए हैं।
  • अस्वस्थ आहार आदतें: तीव्र गति वाले शहरी जीवन ने अनियमित भोजन और अस्वास्थ्यकर खाद्य पर निर्भरता को बढ़ाया है, जिससे हृदय संबंधी जोखिम बढ़ते हैं।
  • तनाव और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा: आक्रामक और तेज-तर्रार जीवनशैली ने दीर्घकालिक तनाव और नींद की कमी को बढ़ाया है, जो हृदय पर बोझ डालते हैं।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन: तंबाकू और शराब का सेवन सीधे हृदय को नुकसान पहुँचाता है और तनाव व नींद की कमी के साथ मिलकर जोखिम बढ़ाता है।
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति के साथ जीवनशैली का समन्वित प्रभाव: जीवनशैली संबंधी जोखिम वंशानुगत संवेदनशीलता को और बढ़ाते हैं, जिससे युवाओं में जल्दी हृदयाघात की संभावना बढ़ती है।

भारत की भावी सहनशीलता को मजबूत करने हेतु निवारक रणनीतियाँ

  • उन्नत निदान द्वारा शीघ्र पहचान: आधुनिक जाँच उपकरण गंभीर जटिलताओं से पहले ही अवरोध और हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान कर सकते हैं।
    • उदाहरण: CT कोरोनरी एंजियोग्राम, कार्डियक कैल्शियम स्कोरिंग और कोरोनरी फिजियोलॉजी असेसमेंट्स की सिफारिश की जाती है।
  • जीवनशैली में सुधार और जागरूकता: व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तंबाकू/शराब का कम उपयोग जीवनशैली-जनित जोखिमों को घटा सकता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा अभियान: चेतावनी संकेतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने से त्वरित चिकित्सीय हस्तक्षेप संभव होगा और जीवन बचेंगे।
    • उदाहरण: केवल 25% भारतीय ही हृदय रोग के लक्षण सही ढंग से पहचान सके, जो शिक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
  • सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम और स्क्रीनिंग: राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से जाँच, उपचार और निवारक देखभाल तक समुदाय-स्तर पर पहुँच का विस्तार किया जा सकता है।
  • व्यक्तिगत और सतत् निगरानी: युवाओं को नियमित स्वास्थ्य जाँच और अनुकूलित आहार योजनाओं को अपनाना चाहिए ताकि हृदय रोग जोखिमों को टाला जा सके।

निष्कर्ष

भारत के युवाओं में हृदय रोगों की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जीवनशैली अनुशासन, व्यापक जागरूकता और सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को मिलाकर ही भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश की रक्षा कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसकी युवा आबादी राष्ट्रीय शक्ति का स्रोत बनी रहे, न कि कमजोरी का कारण।

The surge in cardiovascular diseases among young Indians highlights a transition from genetic predisposition to lifestyle-induced factors. Discuss these lifestyle determinants and propose preventive strategies to strengthen India’s future resilience. in hindi

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