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Q. चाबहार प्रतिबंधों में छूट को समाप्त करने का अमेरिका का निर्णय भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति के लिए चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। मध्य एशिया में भारत के व्यापार और रणनीतिक पहुँच पर इसके प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

September 27, 2025

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट समाप्त होने से भारत के व्यापार और मध्य एशिया तक पहुँच के लाभ।
  • चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट समाप्त होने से भारत के व्यापार और मध्य एशिया तक पहुँच के लिए चुनौतियाँ।
  • भारत के लिए आगे की राह।

उत्तर

अमेरिका द्वारा चाबहार प्रतिबंध छूट (sanctions waiver) समाप्त करने से भारत की मध्य एशिया तक पहुँच बनाने की योजना को चुनौती मिली है। पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति, ईरान की प्राथमिकताओं में परिवर्तन और क्षेत्रीय पुनर्संरेखण के बीच भारत को अपने व्यापारिक संपर्क, रणनीतिक प्रभाव और दीर्घकालिक साझेदारियों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि उसकी क्षेत्रीय पहुँच बनी रहे।

भारत के व्यापार और मध्य एशिया तक पहुँच हेतु चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट समाप्त होने से उत्पन्न लाभ

  • क्षेत्रीय व्यापारिक संपर्क में मजबूती: छूट समाप्त होने से भारत को अपने पहुँच मार्ग तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे चाबहार मध्य एशिया और यूरेशिया तक एक अहम कड़ी बन गया है।
    • उदाहरण: मई 2024 में भारत ने ईरान के साथ चाबहार के विकास और संचालन हेतु 10 वर्षीय द्विपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिससे एक भरोसेमंद व्यापार गलियारा सुनिश्चित हुआ।
  • बहुपक्षीय साझेदारी को गहराई देना: यह परिस्थिति भारत को पड़ोसी एवं क्षेत्रीय भागीदारों के साथ व्यापार एवं अवसंरचना सहयोग में अधिक सक्रियता से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।
    • उदाहरण: भारत-ईरान वार्ता के साथ-साथ आर्मेनिया और उज्बेकिस्तान के साथ त्रिपक्षीय बैठकें चाबहार के माध्यम से व्यापार विस्तार पर केंद्रित थीं।
  • चीन के क्षेत्रीय प्रभाव का संतुलन: चाबहार भारत को मध्य एशिया तक वैकल्पिक मार्ग देता है, जिससे चीन की BRI के माध्यम से पश्चिम एशिया में बढ़ती प्रभुत्वता को सीमित किया जा सकता है।
  • लचीलापन और दीर्घकालिक अवसंरचना नियोजन: छूट समाप्त होने से भारत को मजबूत एवं दीर्घकालिक अवसंरचना रणनीतियों में निवेश करने की दिशा में प्रोत्साहन मिला है।

भारत के लिए चुनौतियाँ

  • ईरान तक वरीयता प्राप्त पहुँच का नुकसान: छूट समाप्त होने से भारत को बंदरगाह संचालन में प्रतिबंध या देरी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे व्यापार और निवेश योजनाएँ प्रभावित होंगी।
  • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता: क्षेत्रीय संघर्ष और बदलते गठबंधन परिचालन जोखिम बढ़ाते हैं और भारत की रणनीतिक योजना को जटिल बनाते हैं।
    • उदाहरण: 12-दिन के इजरायल-ईरान युद्ध और खाड़ी देशों की सुरक्षा पुनर्संरेखण ने भारत की पूर्वनिर्भरता को प्रभावित किया।
  • ईरान की रणनीतिक प्राथमिकताओं का परिवर्तन: तेहरान की लुक ईस्ट  रणनीति और चीन तथा पाकिस्तान के साथ सीमा-पार संपर्क पर ध्यान भारत के लिए चाबहार पर प्रभाव कम करता है।
    • उदाहरण: ईरान चाबहार को ग्वादर और अपने रेलवे नेटवर्क से मध्य एशिया तथा चीन से जोड़ रहा है, जिससे यह कम भारत-केंद्रित बनता जा रहा है।
  • पाकिस्तान से सुरक्षा और क्षेत्रीय जोखिम: ईरान-पाकिस्तान संबंधों की प्रगाढ़ता संभावित सुरक्षा जोखिम उत्पन्न कर सकती है, जिससे भारत के व्यापार एवं रणनीतिक हित प्रभावित होंगे।
  • चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा: चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और ईरान में अवसंरचना निवेश भारत के रणनीतिक और वाणिज्यिक प्रभाव को चाबहार में सीमित कर सकते हैं।

भारत के लिए आगे की राह

  • रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देना: भारत को अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाकर अपनी स्वतंत्र क्षेत्रीय भूमिका को सुरक्षित करना होगा।
    • उदाहरण: चाबहार और IMEC दोनों में निरंतर संलग्नता भारत की बहु-संरेखण (multi-alignment) रणनीति को सुदृढ़ करती है।
  • ईरान के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को गहराना: अवसंरचना, ऊर्जा और व्यापार में सतत् सहयोग भारत की चाबहार में उपस्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद को प्रोत्साहित करना: भारत को ऐसे सुरक्षा ढाँचे का समर्थन करना चाहिए, जो क्षेत्रीय -स्वामित्व (region-owned) पर आधारित हों, ताकि निवेश में बाधा डालने वाली अस्थिरता कम हो।
    • उदाहरण: ईरान, आर्मेनिया और उज्बेकिस्तान के साथ त्रिपक्षीय बैठकों के जरिए चाबहार में क्षेत्रीय स्वामित्व मजबूत हुआ।
  • चाबहार को यूरेशियाई व्यापार हेतु उपयोग करना: मध्य एशिया की आपूर्ति शृंखलाओं के साथ चाबहार को एकीकृत कर भारत अपनी महाद्वीपीय संपर्कता को मजबूत कर सकता है।
  • बाहरी झटकों के प्रति लचीलापन मजबूत करना: भारत को बंदरगाह निवेशों का विविधीकरण करना होगा और दीर्घकालिक वाणिज्यिक अनुबंध सुरक्षित करने होंगे ताकि भू-राजनीतिक व्यवधानों का सामना किया जा सके।

निष्कर्ष

चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट की समाप्ति भारत के लिए सक्रिय और अनुकूलनीय क्षेत्रीय रणनीति अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। रणनीतिक दूरदर्शिता, कूटनीतिक लचीलापन और मजबूत व्यापारिक गलियारों में निवेश के माध्यम से भारत मध्य एशिया में अपना प्रभाव बनाए रख सकता है और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बावजूद अपने आर्थिक एवं रणनीतिक हितों की रक्षा कर सकता है।

The US decision to end the Chabahar sanctions waiver poses challenges for India’s regional connectivity strategy. Critically analyse its implications for India’s trade and strategic outreach to Central Asia. in hindi

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