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Q. 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए, सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने का दावा महत्वपूर्ण है। चर्चा कीजिये। (10 अंक, 150 शब्द) अतिरिक्त

December 15, 2023

GS Paper IV

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • प्रस्तावना: आर्थिक एवं सामाजिक मूल्यों के बारे में संक्षेप में लिखिए।
  • मुख्य विषयवस्तु:
    • भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता के बारे में लिखिए।
    • सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने के संबंध में नैतिक पहलुओं को लिखिए।  
  • निष्कर्ष: इस संबंध में उचित निष्कर्ष दीजिए।

 

प्रस्तावना:

आर्थिक मूल्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की बात करता है, यह विचार पूंजीवाद पर ध्यान केंद्रित करते हुए आय में बढ़ोतरी करने के मार्ग तलाशता है। सामाजिक मूल्य किसी संस्कृति या समाज के नैतिक सिद्धांतों और मान्यताओं से संबंधित होते हैं, जो व्यवहार और कोई निर्णय लेने को प्रभावित करते हैं। 

मुख्य विषयवस्तु

सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता:

  • विकास के चालक के रूप में आर्थिक वृद्धि: आर्थिक मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करने से मुद्रा सृजित होने के साथ, नौकरी के अवसर पैदा होते हैं साथ ही जीवन स्तर में सुधार होता है। जैसा कि 1990 के दशक के बाद से भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि में देखा गया है।
  • बुनियादी ढांचे का विकास: आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने से राजमार्गों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों जैसी मजबूत बुनियादी ढांचा प्रणालियों के निर्माण की सहूलियत मिलती है। जैसा कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के विकास से पता चलता है।
  • गरीबी उन्मूलन: यह रोजगार के अवसरों और आय सृजन के माध्यम से गरीबी में कमी लाने में सक्षम होगा। उदाहरण, मनरेगा की सफलता।
  • उद्यमिता और व्यवसाय में वृद्धि: यह उद्यमिता और व्यवसाय वृद्धि को प्रोत्साहित करेगा। फ्लिपकार्ट और ओला जैसे भारतीय स्टार्टअप ने आर्थिक विकास में योगदान देते हुए क्रमशः ई-कॉमर्स और राइड-शेयरिंग में क्रांति ला दी है।
  • सतत विकास: यह पर्यावरण और सामाजिक विचारों को एकीकृत करके सतत विकास हासिल करने में भी मदद करेगा। भारत के राष्ट्रीय सौर मिशन जैसी पहल आर्थिक विकास को गति देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देती है।
  • स्वास्थ्य देखभाल में प्रगति: यह स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे, अनुसंधान और विकास में निवेश को बढ़ावा देगा। उदाहरण के लिए, जेनेरिक दवाएँ बनाने में भारत के दवा उद्योग की सफलता।

सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक मूल्यों को प्राथमिकता देने से उपजे नैतिक मुद्दे:

  • श्रमिकों का शोषण: उदाहरण के लिए, कपड़ा और विनिर्माण जैसे कुछ उद्योगों में बाल श्रम की व्यापकता सामाजिक कल्याण पर आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देने से जुड़ी नैतिक चिंताओं को दर्शाती है।
  • आय में असमानता: केवल आर्थिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने से आय में असमानता बढ़ सकती है, जिससे हाशिए पर रहने वाले समुदाय पीछे रह जाएंगे और सामाजिक अन्याय को बढ़ावा मिलेगा।
  • पर्यावरणीय क्षरण: पारिस्थितिक कल्याण पर आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देने से वनों की कटाई में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे वायु और जल प्रदूषण में वृद्धि हो सकती है।  
  • भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण: उदाहरण के लिए, सामाजिक मूल्यों पर आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देने से क्रोनी पूंजीवाद, रिश्वतखोरी, गबन और धोखाधड़ी बढ़ सकती है, जिससे जनता का विश्वास खत्म हो सकता है और सतत विकास में बाधा आ सकती है।
  • सांस्कृतिक क्षरण: तेजी से शहरीकरण और वैश्वीकरण से पारंपरिक प्रथाओं, भाषाओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का क्षरण हो सकता है, जिससे देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को महत्वपूर्ण नुकसान हो सकता है।
  • स्वदेशी समुदायों का विस्थापन: बांध या खदान जैसी आर्थिक विकास परियोजनाएं, स्वदेशी आबादी के अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत का उल्लंघन करते हुए, जबरन स्थानांतरण का कारण बन सकती हैं।
  • मानवाधिकारों का उल्लंघन: केवल आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता देने से पहले से ही वंचित समुदाय, जैसे दलित, आदिवासी समुदाय आदि हाशिये पर जा सकते हैं।

निष्कर्ष:

इस प्रकार  एक नैतिक ढांचा अपनाना आवश्यक है जो सामाजिक कल्याण, पर्यावरणीय स्थिरता और समावेशी विकास को विकास के अभिन्न घटकों के रूप में मानते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है।

 

To achieve the vision of transforming India into a developed nation by 2047, the assertion of prioritizing economic values over social values is crucial”. Discuss. Additional in hindi

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