Q. ‘केवल जीवित रहने’ से लेकर समग्र संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) की ओर संक्रमण भारत की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के लिए समय की माँग है। इस कथन के आलोक में, आँगनवाड़ी प्रणाली में हाल के बदलावों और उनके संभावित व्यापक आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 15, 2026

GS Paper IISocial Justice

प्रश्न की मुख्य माँग

  • आंगनवाड़ी प्रणाली में हालिया परिवर्तन 
  • संभावित व्यापक आर्थिक प्रभाव
  • आगे की राह।

उत्तर

परिचय

भारत का प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) ढाँचा अब केवल बाल अस्तित्व और पोषण तक सीमित न रहकर आंगनवाड़ियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास पर केंद्रित हो रहा है। यह परिवर्तन इस समझ पर आधारित है कि प्रारंभिक बाल विकास और गुणवत्तापूर्ण पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में किया गया निवेश दीर्घकाल में मानव पूँजी निर्माण, उत्पादकता वृद्धि तथा समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास की आधारशिला है।

आंगनवाड़ी प्रणाली में हालिया परिवर्तन

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) पर फोकस: आंगनवाड़ी अब पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक बाल विकास, खेल-आधारित अधिगम और विद्यालय तत्परता पर अधिक बल दे रही हैं।
    • उदाहरण: लगभग 8 करोड़ बच्चों (0–6 वर्ष) को पूरक पोषण के साथ पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सेवाएँ भी प्रदान की जा रही हैं।
  • NCF के अनुरूपता: पूर्व-प्राथमिक पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)- 2020 के अंतर्गत क्षमता-आधारित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) सिद्धांतों के अनुरूप बनाया जा रहा है।
    • उदाहरण: फाउंडेशनल स्टेज के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework for Foundational Stage), 2022 ने 3–8 वर्ष आयु वर्ग के लिए गतिविधि-आधारित अधिगम को अपनाया।
  • सक्षम उन्नयन: मिशन सुधारों के माध्यम से अवसंरचना और सेवा प्रदायगी का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
    • उदाहरण: सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, 2021 के तहत 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को उन्नत सुविधाओं के साथ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • डिजिटल निगरानी: प्रौद्योगिकी के माध्यम से सेवा वितरण और वास्तविक समय निगरानी में सुधार हो रहा है।
    • उदाहरण: पोषण ट्रैकर ऐप महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के अंतर्गत लाभार्थियों और आंगनवाड़ी सेवाओं की डिजिटल निगरानी को सक्षम बनाता है।
  • अभिभावक सहभागिता: परिवारों को बाल विकास में साझेदार के रूप में अधिक महत्त्व दिया जा रहा है।
    • उदाहरण: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गृह भ्रमण और अभिभावक परामर्श का कार्य करती हैं।

संभावित व्यापक आर्थिक प्रभाव

  • मानव पूँजी निर्माण: बेहतर संज्ञानात्मक विकास भविष्य में उत्पादकता और कार्यबल की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
    • उदाहरण: संरचित पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के माध्यम से संभावित “सात-पॉइंट  IQ अवसर” (Seven-point IQ opportunity) प्राप्त हो सकता है।
  • शैक्षणिक उपलब्धियाँ: प्रारंभिक हस्तक्षेप शैक्षणिक परिणामों में सुधार करते हैं तथा सुधारात्मक शिक्षा की लागत को कम करते हैं।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)- 2020 ने आधारभूत चरण को आजीवन अधिगम परिणामों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना है।
  • उच्च आय: बेहतर संज्ञानात्मक कौशल अधिक रोजगार क्षमता और उच्च आय में परिवर्तित होते हैं।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश: संज्ञानात्मक रूप से अधिक सक्षम पीढ़ी भारत की युवा जनसंख्या से प्राप्त लाभ को बेहतर ढंग से उपयोग कर सकती है।
    • उदाहरण: लगभग 8 करोड़ आंगनवाड़ी लाभार्थी भविष्य के उत्पादक नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • असमानता में कमी: गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) वंचित बच्चों के बीच विकासात्मक अंतर को कम करती है।
    • उदाहरण: ICDS के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेवाओं का लाभ मुख्यतः कमजोर एवं निम्न-आय वर्ग के बच्चों को प्राप्त होता है।

आगे की राह

  • कार्यबल प्रशिक्षण: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) संबंधी दक्षताओं को सतत् क्षमता निर्माण के माध्यम से सुदृढ़ किया जाए।
    • उदाहरण: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) की “पोषण भी, पढ़ाई भी” (Poshan Bhi Padhai Bhi) पहल, 2024 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) प्रशिक्षण पर केंद्रित है।
  • गुणवत्ता मानक: मापनीय अधिगम मानकों के माध्यम से पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की एकरूप गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework), 2022 में परिकल्पित मानकों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
  • अवसंरचना सुदृढ़ीकरण:  केंद्रों को बाल-अनुकूल अधिगम स्थलों और शिक्षण सामग्री से सुसज्जित किया जाए।
    • उदाहरण: सक्षम आंगनवाड़ी (Saksham Anganwadi) के लक्ष्यों के अंतर्गत केंद्रों के उन्नयन में तेजी लाई जाए।
  • अभिभावक सहभागिता: घर पर बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को प्रोत्साहित करने हेतु देखभालकर्ताओं की भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जाए।
    • उदाहरण: आंगनवाड़ियों के माध्यम से संरचित गृह-आधारित प्रारंभिक अधिगम मॉड्यूल (Home-based early learning modules) का विस्तार किया जाए।
  • अभिसरण मॉडल: स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाए।
    • उदाहरण: पोषण 2.0 (POSHAN 2.0) के अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को पोषण हस्तक्षेपों के साथ एकीकृत करते हुए अभिसरण को बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष 

आंगनवाड़ी प्रणाली को केवल बाल अस्तित्व सुनिश्चित करने वाले मंच से आगे बढ़कर एक समग्र प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) संस्थान के रूप में विकसित होना चाहिए, जो बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को पोषित करे। इससे भारत प्रारंभिक बाल्यावस्था में किए गए निवेशों को दीर्घकालिक व्यापक आर्थिक एवं विकासात्मक लाभों में परिवर्तित कर सकेगा।

The transition from mere survival to holistic cognitive development is the need of the hour for India’s Early Childhood Care and Education (ECCE). In light of this statement, evaluate the recent shifts in the Anganwadi system and their potential macroeconomic impacts. in hindi

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