प्रश्न की मुख्य माँग
- मौसम संबंधी प्रक्रियाओं को निर्धारित करने में क्षोभमंडल का महत्त्व।
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उत्तर
क्षोभमंडल, पृथ्वी की सबसे निचली वायुमंडलीय परत (8-18 किमी.) है, जिसमें अधिकांश आर्द्रता और वायु द्रव्यमान होता है, इसे मौसम निर्माण के लिए मुख्य क्षेत्र बनाता है। इसके गुण प्रत्यक्ष रूप से उष्णकटिबंधीय, समशीतोष्ण और ध्रुवीय क्षेत्रों में मौसम संबंधी घटनाओं के विकास और तीव्रता को प्रभावित करते हैं। यह इस बात के अध्ययन की आवश्यकता उत्पन्न करता है, कि ये विविध मौसम प्रक्रियाओं को किस प्रकार निर्धारित करता है।
मौसम संबंधी प्रक्रियाओं को निर्धारित करने में क्षोभमंडल का महत्त्व
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
- तीव्र ऊर्ध्वाधर तापमान प्रवणता: ऊँचाई के साथ तापमान में तेजी से गिरावट वायु को शीघ्र ठंडा करती है, जिससे तेजी से संघनन और वर्षा होती है।
- उदाहरण: सतह-क्षोभमंडलीय अस्थिरता के कारण केरल में अचानक बादल फटना।
- अधिक ऊर्ध्वाधर विस्तार संवहन की क्रिया में वृद्धि करता है: तीव्र सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के तापमान में वृद्धि करता है, जिससे आर्द्र वायु क्षोभमंडल में ऊपर उठती है और ऊँचे बादलों का निर्माण करती है।
- उदाहरण: कांगो बेसिन और भूमध्यरेखीय अमेजन पर कपासी वर्षी मेघों का निर्माण।
- उच्च जलवाष्प सामग्री वर्षा में सहायक होती है: गर्म महासागर वायु में अत्यधिक मात्रा में आर्द्रता में वृद्धि करते हैं, जिससे वर्षा की बारंबारता और तीव्रता में अधिकता होती है।
- उदाहरण: भूमध्यरेखीय इंडोनेशिया और दक्षिण भारत में मानसून के दौरान भारी, दैनिक वर्षा।
- क्षोभमंडलीय तापन मानसून परिसंचरण को संचालित करता है: गर्म भू-भाग और ठंडे महासागरों के बीच तापमान अंतराल दाब प्रवणता को परिवर्तित करता है, जिससे ग्रीष्म ऋतु के दौरान आर्द्र मानसूनी पवनें भूमि की ओर आरोहित होती हैं।
- उदाहरण: भारतीय भू-भाग पर ग्रीष्म ऋतु का तापमान समुद्र से आर्द्र मानसूनी पवनों को आकर्षित करता है।
- मानवीय हस्तक्षेप: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वनों की कटाई और शहरीकरण क्षोभमंडल में सतह के तापमान और आर्द्रता में परिवर्तन करते हैं, जिससे संवहन की क्रिया बाधित होती है और वर्षण प्रतिरूप अनियमित हो जाता है।
समशीतोष्ण क्षेत्र
- तीव्र तापमान प्रवणता वाताग्र प्रणालियों को सक्षम बनाती है: गर्म उष्णकटिबंधीय और शीत ध्रुवीय वायु राशियों के बीच का अंतर क्षोभमंडल में अस्थिरता पैदा करता है, जिससे वाताग्री वर्षा होती है।
- उदाहरण: उत्तरी अटलांटिक और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में मध्य-अक्षांशीय चक्रवात।
- ऊपरी क्षोभमंडल में जेट धाराएँ : तेजी से चलने वाली पछुआ पवनें तूफानों और दाब क्षेत्रों की गति का मार्गदर्शन करती हैं।
- उदाहरण: ध्रुवीय जेट स्ट्रीम शीत ऋतु के दौरान ‘पश्चिमी विक्षोभ’ को उत्तर भारत में लाती है।
- क्षोभमंडलीय अस्थिरता त्वरित मौसम परिवर्तन में सहायक होती हैं: समतापीय और समदाबीय अस्थिरता, चक्रवातों के तेजी से निर्माण में सहायक होती है।
- उदाहरण: तट के किनारे क्षोभमंडलीय अस्थिरता के कारण उत्तर-पूर्वी अमेरिका को प्रभावित करने वाले नॉर’ईस्टर।
- मौसमी क्षोभसीमा की ऊँचाई में परिवर्तन चक्रवात की तीव्रता को प्रभावित करता है: ग्रीष्म ऋतु में, उच्च क्षोभसीमा पवनें, ऊर्ध्वाधर गति और गहन चक्रवातीय प्रणालियों की अनुमति देती है।
- उदाहरण: ग्रीष्म ऋतु के महीनों में मध्य चीन में गरज के साथ वर्षा।
- मानवीय हस्तक्षेप: शहरी प्रदूषण और भूमि उपयोग परिवर्तन के कारण तापमान व्युत्क्रमण सतह के पास ठंडी वायु को फँसा देता है। यह वायु की ऊर्ध्वाधर गति को रोकता है, जिससे वायु गुणवत्ता खराब हो जाती है।
- उदाहरण: दिल्ली में अक्सर शीत ऋतु में ऐसे तापमान व्युत्क्रमण के कारण अत्यधिक धुंध का अनुभव किया जाता है।
ध्रुवीय क्षेत्र
- सीमित ऊर्ध्वाधर मिश्रण: सतह के पास बहुत शीत और सघन वायु, गर्म वायु को ऊपर उठने से रोकती है, जिससे बादल आसानी से नहीं बनते और वर्षा की प्रक्रिया बाधित होती है।
- क्षोभमंडलीय-समतापमंडलीय अंतःक्रियाओं द्वारा संचालित ध्रुवीय भँवर: शीत ऊपरी क्षोभमंडल और दाबांतर ध्रुवों के चारों ओर शक्तिशाली पवनों को संचालित करता है।
- स्थिर उच्च-दाब प्रणालियों का निर्माण: निम्न क्षोभमंडल में शीत पवनें बड़े, स्थिर प्रतिचक्रवातों को जन्म देते हैं।
- उदाहरण: साइबेरियाई हाई (Siberian High) यूरेशियाई शीत ऋतु के मौसम को नियंत्रित करता है।
- मानवीय हस्तक्षेप: बढ़ते वायुमंडलीय प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैसें क्षोभमंडलीय तापमान संरचना को परिवर्तित करते हैं। यह ध्रुवीय भँवर की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है और मध्य-अक्षांशों में चरम मौसमी घटनाओं को जन्म दे सकता है।
- उदाहरण: आर्कटिक वार्मिंग से जुड़े ध्रुवीय भँवर के कमजोर होने से हालिया वर्षों में अमेरिका और यूरोप में गंभीर शीत लहरों के संचरण की घटनाएँ सामने आई हैं।
निष्कर्ष
क्षोभमंडल केवल एक भौतिक वायुमंडलीय परत मात्र नहीं है,बल्कि पृथ्वी की मौसम-प्रणाली का संचालन करने वाला इंजन है। इसकी संरचना और गतिशीलता इसे वायुमंडलीय व्यवहार का केंद्र बनाती है, जिससे विश्वसनीय मौसम पूर्वानुमान और प्रभावी जलवायु प्रतिक्रिया के लिए इसकी गहन समझ आवश्यक हो जाती है।
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