Q. वर्ष 2026 में चीन का रुख 'अभिमान एवं सावधानी' का विरोधाभास प्रस्तुत करता है, जिसमें घरेलू स्तर पर संरचनात्मक चुनौतियों के बावजूद विदेशों में रणनीतिक आत्मविश्वास की परिणिति प्रतीत है। अमेरिका-चीन संबंधों के पुनर्गठन सहित बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के आलोक में, भारत के लिए इसके निहितार्थों और 'रणनीतिक संतुलन' की आवश्यकता के पीछे के तर्क का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के लिए सकारात्मक निहितार्थ।
  • भारत के लिए नकारात्मक निहितार्थ।
  • रणनीतिक धैर्य का औचित्य।

उत्तर

वर्ष 2026 की शुरुआत में, चीन एक चिंतित लेकिन दृढ़ शक्ति के रूप में उभरा है, जो घरेलू आर्थिक संकट का सामना करते हुए विदेशों में रणनीतिक आत्मविश्वास प्रदर्शित कर रहा है। घरेलू नियंत्रण में सख्ती और वैश्विक उपस्थिति के विस्तार ने भारत के रणनीतिक दायरे को सीमित कर दिया है। अमेरिका और चीन दोनों की बदलती नीतियों में भारत की घटती प्रासंगिकता ने इस स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।

भारत के लिए सकारात्मक निहितार्थ

  • निवेश विविधीकरण: चीन द्वारा वैश्विक बाजारों के लिए अतिरिक्त उत्पादन क्षमता बढाने के कारण पश्चिमी देशों को “चीन+1” रणनीतियों को गति देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
    • उदाहरण: Apple और Samsung जैसी वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने चीनी आपूर्ति शृंखला जोखिमों से बचाव के लिए वर्ष 2025 में भारतीय विनिर्माण को काफी हद तक बढ़ाया।
  • क्षेत्रीय नेतृत्व का अभाव: घरेलू स्थिरता पर चीन का आंतरिक ध्यान भारत को “वैश्विक दक्षिण के अग्रदूत” के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
    • उदाहरण: वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) निर्यात में भारत के नेतृत्व ने अफ्रीका में चीन की ऋण-भारित BRI के विकल्प के रूप में लोकप्रियता हासिल की है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता का लाभ: अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव भारत को एक महत्त्वपूर्ण “निर्णायक राज्य” के रूप में दोनों शक्तियों के साथ बेहतर शर्तों पर बातचीत करने का अवसर देता है।
  • सामरिक सीमा तनावमुक्ति: चीन की दो मोर्चों पर टकराव से बचने और साथ ही अमेरिकी टैरिफ को नियंत्रित करने की इच्छा के कारण LAC पर “स्थिर लेकिन असामान्य” शांति स्थापित हुई है।

भारत के लिए नकारात्मक निहितार्थ

  • व्यापार घाटे में वृद्धि: चीन की औद्योगिक क्षमता से अधिक उत्पादन के कारण सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और सौर ऊर्जा घटकों की डंपिंग हो रही है, जिससे भारत की ‘मेक इन इंडिया पहल को नुकसान पहुँच रहा है।
    • उदाहरण: भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा वर्ष 2025 में 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जो चीनी मध्यस्थों पर भारत की गहरी संरचनात्मक निर्भरता को उजागर करता है।
  • अमेरिका-चीन तनाव कम होने का जोखिम: अमेरिका और चीन के बीच संभावित सामरिक “युद्धविराम” से अमेरिका की हिंद-प्रशांत नीति में भारत का रणनीतिक महत्त्व कम हो सकता है।
  • ग्रे-जोन आक्रामकता: उच्च स्तरीय वार्ता के बावजूद, चीन LAC के साथ “शियाओकांग” (सीमावर्ती गाँव) और दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढाँचे का निर्माण जारी रखे हुए है।
  • घेराबंदी कूटनीति: चीन पश्चिमी अलगाव की भरपाई के लिए भारत के पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है।
    • उदाहरण: तियानजिन में आयोजित वर्ष 2025 के SCO शिखर सम्मेलन में चीन ने पाकिस्तान और मालदीव को व्यापक सुरक्षा और आर्थिक पैकेज की पेशकश की, जिससे भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को चुनौती मिली।

‘रणनीतिक संतुलन’ का औचित्य

  • असममित शक्ति अंतराल: चीन की 18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और भारत की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को देखते हुए प्रत्यक्ष टकराव संभव नहीं है; रणनीतिक संतुलन से इस अंतर को कम किया जा सकता है।
    • उदाहरण: भारत का PLI योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना, विश्वसनीय प्रतिरोध के लिए आवश्यक औद्योगिक आधार के निर्माण हेतु एक दीर्घकालिक रणनीति है।
  • आंतरिक अस्थिरता निगरानी: चीन का अभिमान उसके गहरे जनसांख्यिकीय और ऋण संकटों को छुपाता है, जो स्वाभाविक रूप से उसकी दीर्घकालिक आक्रामकता को सीमित कर सकते हैं।
  • अमेरिकी ट्रैप से बचाव: रणनीतिक संतुलन भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले ऐसे संघर्ष में “अग्रणी राज्य” बनने से रोकता है, जो भारत के तात्कालिक आर्थिक हितों के लिए लाभकारी न हो।
  • व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का निर्माण: रणनीतिक संतुलन भारतीय वायु सेना और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए ‘स्वर्ण अवसर’ प्रदान करता है, जो वर्तमान में महत्त्वपूर्ण विमान प्रणालियों की कमी का सामना कर रही हैं।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 में चीन के प्रति भारत का दृष्टिकोण “संतुलित जुड़ाव और असममित प्रतिरोध” पर आधारित होना चाहिए। रणनीतिक संतुलन का रुख अपनाकर, नई दिल्ली समय से पहले होने वाले टकराव से बच सकती है और साथ ही घरेलू औद्योगिक और सैन्य मजबूती का निर्माण कर सकती है, जो अंततः चीन के साथ बराबरी की स्थिति में बातचीत करने के लिए आवश्यक है। भारत को लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाँ चीन स्थिरता के लिए “अंदरूनी” रुख अपनाए, वहीं भारत “बाहरी” रूप से मजबूत हो।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.