Q. नवीनतम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति आर्थिक राष्ट्रवाद और चयनात्मक बहुपक्षवाद की ओर बदलाव को दर्शाती है। इस दृष्टिकोण से अंतर-अटलांटिक संबंधों में किस प्रकार परिवर्तन आ सकता है और वैश्विक सुरक्षा संरचना पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • अंतर-अटलांटिक संबंधों पर प्रभाव
  • वैश्विक सुरक्षा संरचना पर प्रभाव
  • संबंधित चिंताएँ

उत्तर

अमेरिका की नवीनतम राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति आर्थिक राष्ट्रवाद और चयनात्मक बहुपक्षवाद की ओर एक रणनीतिक झुकाव का संकेत देती है, जिसमें आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा, घरेलू औद्योगिक पुनरुत्थान और लक्षित गठबंधनों को प्राथमिकता दी गई है। इस पुनर्संतुलन का उद्देश्य अमेरिका की प्रौद्योगिकीय और आर्थिक वर्चस्व की रक्षा करना है, किंतु इसके साथ ही यह सहयोगियों तथा वैश्विक सुरक्षा संस्थानों के साथ संबंधों को भी पुनर्संरचित करता है।

‘ट्रांस-अटलांटिक’ संबंधों पर प्रभाव

  • औद्योगिक तनाव: घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देने से सब्सिडी और बाजार पहुँच को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं, जिससे यूरोप–अमेरिका आर्थिक समन्वय पर दबाव पड़ता है।
    • उदाहरण: यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिकी मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम की आलोचना, जिससे यूरोपीय विद्युत-वाहन निर्माताओं को नुकसान होता है।
  • रक्षा दायित्व में परिवर्तन: अमेरिकी बल यूरोप में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए वहाँ के देशों पर अपने रक्षा व्यय और क्षमताओं को स्वतंत्र रूप से बढ़ाने का दबाव डालता है।
    • उदाहरण: अमेरिका द्वारा रक्षा व्यय साझा करने के आह्वान के बाद नाटो सदस्य देश अपने रक्षा बजट में तेजी ला रहे हैं।
  • चयनात्मक साझेदारियाँ: वाशिंगटन के मुद्दे-आधारित गठबंधन यूरोपीय संघ के तंत्रों को अप्रभावी कर सकते हैं, जिससे पारंपरिक संस्थागत समन्वय कमजोर हो सकता है।
    • उदाहरण: व्यापक अंतर-अटलांटिक मंचों की तुलना में AUKUS जैसे लघु-पक्षीय संगठनों के लिए अमेरिका की बढ़ती प्राथमिकता।
  • प्रौद्योगिकी–नियामकीय विचलन: अमेरिकी प्रौद्योगिकी-सुरक्षा उपाय यूरोपीय नियामकीय दृष्टिकोण से टकराते हैं, जिससे रणनीतिक मतभेद बढ़ते हैं।
    • उदाहरण: यूरोपीय संघ को सेमीकंडक्टर और डिजिटल व्यापार नियमों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर चिंता है।

वैश्विक सुरक्षा संरचना पर प्रभाव

  • बहुपक्षवाद का क्षरण: चयनात्मक गठबंधन-निर्माण संयुक्त राष्ट्र जैसे सार्वभौमिक संस्थानों को हाशिये पर डालता है, जिससे सामूहिक वैधता घटती है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) “समान विचारधारा वाले साझेदारों” के गठबंधन को बढ़ावा देती है, जिससे बहुपक्षीय ढाँचे कमजोर हो जाते हैं।
  • चीन के साथ कठोर संतुलन: आर्थिक नियंत्रण को प्राथमिकता देने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा संबंधी परिस्थितियाँ बदल रही हैं और गुटों का गठन अधिक स्पष्ट हो रहा है।
    • उदाहरण: चीनी प्रौद्योगिकी पर अमेरिकी निर्यात नियंत्रण वैश्विक आपूर्ति शृंखला की भू-राजनीति को प्रभावित कर रहा है।
  • विखंडित व्यापार-सुरक्षा: व्यापार और प्रौद्योगिकी का हथियारीकरण वैश्विक आर्थिक शासन में असुरक्षा बढ़ाता है।
    • उदाहरण: अमेरिका द्वारा चिप निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न व्यवधानों से वैश्विक रणनीतिक अनिश्चितता उत्पन्न हो रही है।
  • क्षेत्रीय शक्ति-रिक्तताएँ: कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी प्रतिबद्धता में कमी से पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अस्थिरता बढ़ सकती है।
    • उदाहरण: पश्चिमी एशिया में शक्ति संतुलन में परिवर्तन में अमेरिकी सैन्य भागीदारी में कमी का योगदान है।

संबद्ध चिंताएँ

  • गठबंधन क्षरण: आर्थिक राष्ट्रवाद, लोकतांत्रिक सहयोगियों के बीच विश्वास को कमजोर कर सकता है।
    • उदाहरण: एकपक्षीय नीतिगत बदलावों को लेकर यूरोपीय असहजता।
  • गुटों का ध्रुवीकरण: चयनात्मक बहुपक्षवाद से कठोर गुटों के निर्माण का खतरा है, जिससे महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
    • उदाहरण: वैश्विक संस्थानों में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता विखंडन।
  • ‘ग्लोबल साउथ’ का हाशिए पर जाना: उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ गठबंधन पर अमेरिकी प्राथमिकता विकासात्मक बहुपक्षवाद को हाशिए पर धकेल रही है।
    • उदाहरण: अमेरिका के नेतृत्व वाले समूहों में ‘ग्लोबल साउथ’ के सीमित प्रतिनिधित्व को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • रणनीतिक अति-विस्तार: अनेक गठबंधन नेटवर्कों का नेतृत्व अमेरिका की निरंतर नेतृत्व-क्षमता पर दबाव डाल सकता है।

निष्कर्ष

आगे चलकर, अमेरिका को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए घरेलू पुनरुद्धार और वैश्विक स्तर पर सहयोगात्मक नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। पारदर्शी, समावेशी और नियम-आधारित साझेदारियों को मजबूत करना, विशेष रूप से यूरोप और वैश्विक दक्षिण के साथ यह सुनिश्चित कर सकता है कि रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा बहुपक्षीय स्थिरता को कमजोर न करे या वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को विखंडित न हो।

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